
संथाल समुदाय का महान पर्व ‘हाथी लेकान पर्व’ धूमधाम से शुरू, संथाली टोला में उल्लास
बांका में संथाल समुदाय का प्रमुख पर्व हाथी लेकान पर्व 10 तारीख से शुरू हुआ। यह चार दिवसीय पर्व भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दौरान पारंपरिक नृत्य, पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पर्व की शुरुआत से पहले घरों की विशेष सफाई और सजावट की जाती है।
बांका। एक संवाददाता प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न संथाली टोला में संथाल समुदाय का सबसे महान पर्व हाथी लेकान पर्व 10 तारीख से ही विधिवत रूप से शुरू हो चुका है। इस पर्व को लेकर संथाल बहुल इलाकों में खासा उत्साह और उमंग देखने को मिल रही है। चार दिवसीय इस पारंपरिक पर्व में प्रकृति और वनों की विशेष अहमियत होती है, जो संथाल संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। इस पर्व की शुरुआत से पूर्व बहनें अपने भाइयों के घर आमंत्रण पर पहुंचती हैं। मान्यता है कि एक समय बहन ने भाई की रक्षा की थी, उसी स्मृति और सम्मान में इस पर्व को मनाया जाता है।
इसलिए बहन की उपस्थिति इस पर्व में अनिवार्य मानी जाती है। साथ ही सभी संबंधियों को भी निमंत्रण देकर पर्व में सहभागी बनाया जाता है। पर्व के दौरान तीन दिनों तक पारंपरिक नाच-गान और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते हैं। पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। दूसरे दिन झील का भोग लगाया जाता है तथा मीत बनाकर देव पूजा की जाती है। तीसरे दिन बेगा की पूजा कर समुदाय की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की जाती है। इसी कारण हाथी लेकान परब को संथाल समाज का सबसे महान पर्व कहा जाता है। पर्व से पूर्व संथाल समुदाय के लोग अपने घरों की विशेष सफाई करते हैं। घरों में रंग-रोगन, लिपाई-पुताई और साज-सज्जा की जाती है, ठीक वैसे ही जैसे अन्य समुदायों में दीपावली या बड़े त्योहारों के अवसर पर होता है। इस पर्व के माध्यम से संथाल समाज अपनी परंपरा, भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति के प्रति सम्मान को जीवंत बनाए रखता है।

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