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गांवों में काम आ रहे ग्रामीण डॉक्टर

गांव के अधिकांश लोग करा रहे ग्रामीण चिकित्सक से इलाजगांव के अधिकांश लोग करा रहे ग्रामीण चिकित्सक से इलाज झोलाछाप डाक्टर अपने अनुभव से बचा रहे लोगों...

गांवों में काम आ रहे ग्रामीण डॉक्टर
हिन्दुस्तान टीम,बांकाMon, 17 May 2021 03:52 AM
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बांका। कार्यालय संवाददाता

बांका जिला के कई गांव में लोग वर्तमान समय में बीमार चल रहे हैं। यही नहीं कई गांव में कई लोगों की अबतक मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी लोग सरकारी अस्पताल जाने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में बीमार ग्रामीणों के लिए गांव के झोला छाप ग्रामीण चिकित्सक ही मसीहा बना हुआ है। अधिकांश गांव के लोग इन्ही ग्रामीण डॉक्टर से अपना इलाज करा रहे हैं। हालांकि कई केस इन झोलाछाप डाक्टर से बिगड़ भी जाता है।

बांका जिला के कुल 11 प्रखंडों में कोरोना का कहर लगातार जारी है। ऐसे में बीमार पड़ने पर लोग जांच से भी कतरा रहे हैं। सरकारी अस्पताल जाने में लोगों की हिम्मत नहीं हो रही है। चाहे बेलहर का आदिवासी क्षेत्र हो या फिर शंभूगंज का सुदूर ग्रामीण इलाका हो। इन सभी जगहों पर इन दिनों झोलाछाप ग्रामीण डॉक्टर लोगों की मदद कर रहे हैं। वे अपने अनुभव के आधार पर लोगों को दवा सुई दे रहे हैं। अधिकांश लोग ठीक भी होते हैं लेकिन कुछ लोगों की जब ज्यादा तबियत बिगड़ जाती है तो फिर उन्हें अस्पताल लाया जाता है।

ग्रामीण स्तर पर इलाज व जांच की सुविधा की है कमी

बांका जिला ऐसे ही पिछड़ा जिला की श्रेणी में गिना जाता है। उसमें भी स्वास्थ्य सुविधा में भी यह जिला पिछे है। हालांकि कोरोना काल में प्रशासन के द्वारा लगातार जिले के हर अस्पताल में सुविधा बढ़ाई जा रही है। इसके बाद भी ग्रामीण इलाका स्वास्थ्य सुविधा से पूरी तरह वंचित है। ग्रामीण स्तर पर स्थापित उप स्वास्थ्य केन्द्र अधिकांश बंद ही रहता है। अगर कोई चालू भी रहता है तो वह एएनएम के भरोसे ही संचालित होता है। गांव के लोगों को प्रखंड स्तरीय अस्पताल जाने में भी परेशानी होती है। लॉक डाउन के कारण ऐसे भी गांव के लोग आने जाने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में उनके पास इलाज के लिए मात्र एक साधन है झोलाछाप डॉक्टर।

गांव में सर्दी, खांसी के साथ ही टाइफाइड की मिल रही है ज्यादा शिकायत

कुछ ग्रामीण डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गांव में सर्दी, खांसी के साथ ही टाइफाइड के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। उन्हें अनुभव के आधार पर दवा व सुई दी जाती है। इससे अधिकांश लोग ठीक भी हो जाते हैं। कुछ लोगों को ज्यादा तबियत खराब रहने पर उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। इसका कारण यह भी है कि जिले के ग्रामीण इलाका आर्थिक रूप से भी कमजोर होता है।

कोट:

जिले में स्वास्थ्य सुविधा हर प्रखंड में बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को अगर कोरोना के लक्षण दिखायी देता है तो वे तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करवाएं। साथ ही सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध है।

सुहर्ष भगत, डीएम, बांका

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