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22 सितम्बर, 2020|11:02|IST

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पितृपक्ष 2 सितंबर से तर्पण को लेकर लोगों में संशय

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बांका | नगर संवाददाता

पितरों को याद करने का पितृपक्ष 2 सितंबर से शुरू हो रहा है। जो 17 सितंबर तक चलेगा। इन16 दिनों तक पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाता है। ऐसा पहली बार होगा जब पितृपक्ष में तर्पण कराने के लिए कर्मकांडी उपलब्ध नहीं होंगे और ना ही इस बार पंडित घर पर आकर भोजन करेंगे। ऐसे में लोग इस बार श्राद्ध कर्म को सादगी से अपने घर में ही करेंगे। बाबूटोला पंचमुखी मंदिर के पंडित घनश्याम झा ने बताया कि कोराना काल में सभी तीज त्योहार का स्वरूप बदल गया है। लोग वायरस संक्रमण से बचने के लिये सामाजिक दूरी बनाकर पर्व - त्योहार की औपचारिकता निभा रहे हैं। कोरोना काल में सरकार के निर्देशानुसार नदी किनारे इस बार पूजा आदि का विधान नहीं होगा। इस बार शहर के पंडित और आचायार्े ने ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की है। पंडित व्हाटसअप और फेसबुक के जरिये ऑनलाइन पिंडदान व तर्पण करायेंगे। इसको लेकर कई यजमान ने ऑनलाइन पूजा कराने का अनुरोध किया है। साथ ही कई श्रद्वालुओं की बुकिंग के लिये फोन भी आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि घर में किये गये श्राद्ध का पुण्य तीर्थ स्थल पर किये गये श्राद्ध से आठ गुना अधिक फल मिलता है। वहीं तर्पण संपन्न होने के बाद अपनी क्षमतानुसार पितरों की याद में मंदिर में फल, मेवा, वस्त्र, अनाज दान कराना चाहिए।

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  • Web Title:Parents are skeptical about the surrender from September 2