जिले में पंचायत चुनाव से पहले बदलेगा सियासी समीकरण
बांका। निज प्रतिनिधि।बांका। निज प्रतिनिधि। आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जिलों में सरगर्मी तेज हो गई है। वहीं, इस बार पंचायत चुनाव से पहले

बांका, निज प्रतिनिधि। आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जिलों में सरगर्मी तेज हो गई है। वहीं, इस बार पंचायत चुनाव से पहले सियासी समीकरण कई स्तर पर बदलते नजर आएंगे। सबसे बडा बदलाव आरक्षण रोस्टर को लेकर होगा, जो हर 10 वर्ष पर बदल जाता है। इसके तहत कई वार्डों और पंचायतों में महिला, पुरूष, सामान्य एवं आरक्षित सीटों की स्थिति बदल जाएगी। प्रशासन ने इसके लिए वार्डवार आंकडे जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। माना जा रहा है कि इस बदलाव का सीधा असर उन संभावित उम्मीदवारों पर पडेगा, जो लंबे समय से चुनावी तैयारी में जुटे हैं।
नई आरक्षण व्यवस्था के चलते कई दावेदारों को अपनी रणनीति बदलनी पड सकती है। वहीं, इस बार परिसीमन में कोई बदलाव नहीं होगा। वर्ष 2021 के आधार पर ही वार्ड, पंचायत और अन्य सीमाएं यथावत रहेंगी और उसकी के अनुसार मतदान कराया जाएगा। जिले की 182 पंचायतों में छह पदों के लिए चुनाव होना है। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए इस बार तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। पहली बार पंचायत चुनाव में मल्टी पोस्ट ईवीएम के जरिये मतदाता एक साथ कई पदों के लिए मतदान कर सकेंगे। इसके साथ ही फर्जी मतदान पर रोक लगाने के लिए फेस रिकॉग्नाइजेशन तकनीक भी लागू करने की तैयारी है, जिससे बोगस वोटिंग की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। जिले में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई है। चुनाव के लिए जिला पदाधिकारी को जिला निर्वाचन पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि जिला पंचायती राज उप निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में कर्य करेंगे। आभी प्रारूप प्रकाशन की तैयारी को अमली जामा पहनाया जा रहा है। इसके बाद जून से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि पिछली बार 2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में कराये गये थे। इस बार पंचायत चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जाने की संभावना है। इसको लेकर अभी से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी है। जन प्रतिनिधियों से लेकर संभावित उम्मीदवार भी मतदाताओं को गोलबंद करने में जुट गये हैं। इस साल के पंचायत चुनाव में एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं (अनारक्षित श्रेणी सहित) के लिए आरक्षित वार्ड/क्षेत्र बदल जाएंगे। जो सीटें पिछले दो चुनावों से अनारक्षित थीं, वे आरक्षित हो सकती हैं। जो आरक्षित थीं, वे अनारक्षित या किसी अन्य वर्ग के खाते में जा सकती हैं। यह आवंटन एक बार फिर से विभन्नि श्रेणियों की जनसंख्या के अवरोही क्रम (ज्यादा से कम आबादी वाले क्षेत्र) के आधार पर किया जाएगा। जिले में सभी को नए आरक्षण रोस्टर जारी होने का इंतजार है। यहां सबकी निगाहें आरक्षण रोस्टर पर टिकी है।
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