प्रस्तावित नए कोर्ट भवन के भूमि अधिग्रहण को लेकर नप सभागार में हुई जनसुनवाई
बांका,निज संवाददाता।बांका,निज संवाददाता। बांका व्यवहार न्यायालय परिसर से इतर अलग से एक नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनना प्रस्तावित है। जिसमें बांका

बांका,निज संवाददाता। बांका व्यवहार न्यायालय परिसर से इतर अलग से एक नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनना प्रस्तावित है। जिसमें बांका व्यवहार न्यायालय अंतर्गत ही उत्पाद कोर्ट, पॉक्सो कोर्ट, फैमिली कोर्ट,असुरक्षित गवाह बयान परिसर, वैकल्पिक विवाद समाधान भवन,प्रसाधन भवन(टॉयलेट), विशाल डिजिटल कंप्यूटर कक्ष को भवन निर्माण विभाग,बिहार सरकार द्वारा बनाया जाना है।इसको लेकर जिला प्रशाशन द्वारा बांका नप क्षेत्र में बांका अंचल अंतर्गत नप के वार्ड 07 में चादर संख्या 4,6 में तीन अलग अलग खाता के कुल 9 खेसरा में 4.0047 एकड़ जमीन भी चिन्हित किया जा चुका है।यह जमीन एचडीएफसी बैंक के पीछे खाली जमीन है,जिसका मालिकाना हक तीन अलग अलग रैयतों के नाम से है।
न्यायालय एवं अन्य आवश्यक भवनों के निर्माण हेतु भू अर्जन प्रक्रिया पुरी करने से पुर्व वर्ष 2013 में बने नए अधिग्रहण कानून के तहत उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 तथा बिहार भू अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यस्थापान में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार नियमावली 2014 के प्रावधानों के तहत अधिग्रहण से होने वाले सामाजिक आर्थिक प्रभावों के सामाजिक मूल्यांकन हेतु सरकार द्वारा इसकी रिपोर्ट भू अर्जन पदाधिकारी को सौंपने का दायित्व अनुग्रह नारायण सिंह सामाजिक अध्ययन संस्थान पटना को दी गई है। शुक्रवार को नप के सभागार में संस्थान के दो सदस्यीय टीम में पहुंचे प्राध्यापक डॉ राजीव कमल कुमार,बांका सिविल कोर्ट के एसीजेएम फर्स्ट सह सब जज शाहनवाज आलम और बांका अंचलाधिकारी प्रियंका कुमारी के साथ नप के कार्यपालक पदाधिकारी सुमित्रानंदन ने जनसुनवाई करते हुए रैयतों समेत तमाम स्टेक होल्डर्स की बातों को ध्यान से सुनकर निष्कर्ष पर विमर्श करते हुए इसकी रिपोर्ट भू अर्जन विभाग को सौंपने की बात बताई। रैयतों में कुणाल सिंह ने कहा कि हमारी जमीन कमर्शियल है,जबकि सरकार उसे सामान्य भूमि बताकर सस्ते में जमीन लेना चाहती है,इसलिए हमारा विरोध तबतक रहेगा जबतक हमें जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता है,वहीं तीन में से एक रैयत ने अभी तक मूल्यांकन टीम से कोई बातचीत या संपर्क नहीं किया है।वहीं विधिज्ञ संघ के अधिवक्ताओं ने भी जनसुनवाई में पहुंचकर इस नए कॉम्प्लेक्स के लिए चयनित स्थल का विरोध करते हुए अपनी परेशानियों को समिति के समक्ष रखा और कहा कि मुख्य कोर्ट परिसर से इतर नए भवन के बनने से आवागमन के असुविधा होगी साथ ही अन्य सुरक्षा मामलों की भी दिक्कतें भविष्य में सामने आ सकती हैं।अभी हमें डीएम कोर्ट के लिए समाहरणालय जाना पड़ता है,जिससे मुसीबत बढ़ती है,कभी कभी एक ही डेट और समय में दोनों जगह तारीख होती है तो वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है।वहीं विकल्प के तौर पर अधिवक्ताओं ने कहा कि जब वर्तमान कोर्ट परिसर के पास पर्याप्त भूमि है,तो वहां से हटाकर दूसरा कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनना व्यावहारिक नहीं है। मालूम होकि वर्तमान में जो मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी का आवास है, उसकी जीर्णशीर्ण हालत को देखते हुए उसका डिमोलिशन किए जाने की योजना है,और सीजेएम आवास को भी नवनिर्मित जजेस कॉलोनी में ही बने जी प्लस फाइव में शिफ्ट किए जाने की बात चल रही है,हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं इस पुराने जर्जर हो चुके सीजेएम आवास ढाहने के बाद कोर्ट के पीछे जरूरी चार एकड़ जमीन आराम से मिल जायेगाइसलिए इसी जमीन पर न्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की मांग करते हुए अधिवक्ताओं में बाबूलाल यादव,संजय सिंह ,आनंदी यादव, मृत्युंजय झा ,पंकज यादव , महेश्वरी यादव,समेत सैकड़ों अधिवक्तों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन डीएम को भी सौंपा है।इस दौरान ए एन सिंह संस्थान के धर्मेश कुमार,कोर्ट के कर्मी संतोष कुमार समेत अन्य नप के कर्मी आदि उपस्थित थे।

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