अध्यात्म और विज्ञान से जुड़ मकर संक्रांति पर्व आज, बांका में उत्साह चरम पर
बांका, निज संवाददाता।बांका, निज संवाददाता। अध्यात्म, संस्कृति और परम्परा की त्रिवेणी कहे जाने वाले बांका जिले के मंदार क्षेत्र में मकर संक्रांति का म
बांका, निज संवाददाता। अध्यात्म, संस्कृति और परम्परा की त्रिवेणी कहे जाने वाले बांका जिले के मंदार क्षेत्र में मकर संक्रांति का महापर्व आज पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होते ही आज से शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो जायेगी। अध्यात्म के दृष्टिकोण से मकर संक्रांति को सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।इस दिन दान पुण्य करने की भी पुरानी परंपरा है,वहीं वैज्ञानिक और भौगोलिक रूप में मकर रेखा को पार करने से पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी पड़ने लगती है और ठंड का असर भी धीरे धीरे कमने लगता है।सूर्य
के पृथ्वी के नजदीक आने से दिन बड़े होने शुरु हो जाते हैं, प्रकृति में गर्मी का संचार होता है,जो कृषि के लिए भी फायदेमंद है।अंग प्रदेश की संस्कृति में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा और गुड़ खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसके साथ ही 'तिल' का इस दिन विशेष महत्व है। मेडिकल साइंस के अनुसार, जनवरी के महीने में शरीर को अंदरूनी गर्मी की आवश्यकता होती है। तिल की तासीर गर्म होती है और इसमें मौजूद तेल शरीर को ऊष्म ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि आयुर्वेद और परंपरा दोनों में आज के दिन तिलकुट, तिल के लड्डू और लाई खाने का विशेष विधान है। मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मंगलवार को बांका के मुख्य बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं थी। चूड़ा,गुड़ और तिल की खरीदारी को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा गया। बाजारों में गया के तिलकुट की महक और स्थानीय स्तर पर बने चीनी व गुड़ के तिलकुट की खूब जमकर बिक्री हुई। साधारण तिलकुट 300 प्रति किलो और खोवा वाले 400 रुपए प्रति किलो तक बिक्री हुई। पूजा को लेकर फलों के दुकान पर भी भीड़ दिखी। लोगों ने केला और अन्य फलों की खरीददारी लंबी कतार में लगकर किया। लडुआ (मूरी और चूड़ा के लड्डू) के पैकेट्स की डिमांड सबसे ज्यादा रही। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार व्यापार काफी बेहतर है।लडुआ इस साल 120 से 140 प्रति किलो तक बिक्री हुई। आज 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे जिले से मंदार पर्वत पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। मंदार के तलहटी में स्थित पापहरणी सरोवर में डुबकी के लिए उत्साह चरम पर रहेगी। मान्यताओं के अनुसार तड़के से ही श्रद्धालुओं के पापहरणी सरोवर में पवित्र स्नान करने और भगवान विष्णु सहित विभिन्न देवालयों में पूजा-अर्चना करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार मंदार पर्वत पर देव-असुर समुद्र मंथन की कथा जुड़ी है, तथा पापहरणी सरोवर में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। इसी आस्था के कारण दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों झारखंड और बंगाल से भी श्रद्धालु यहां पहुँचते हैं। भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से भीड़-भाड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंधन किए गए हैं। तालाब के पास कई गोताखोरों की ड्यूटी भी लगाई गई है।स्नान घाटों के पास बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती, चिकित्सा सहायता केंद्र और खोया-पाया काउंटर की व्यवस्था की गई है। साफ-सफाई के लिए विशेष दल लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे भीड़ में धैर्य बनाए रखें, बच्चों का विशेष ख्याल रखें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।

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