
खरमास खत्म होते ही अब शुरू होंगे शुभ कार्य, 4 फरवरी से शुभ विवाह मुहूर्त
जिले में फरवरी से सुनाई देगी शहनाईयों की गूंजजिले में फरवरी से सुनाई देगी शहनाईयों की गूंज 28 शुभ विवाह मुहूर्त फरवरी व मार्च में हैं बांका। निज प्रति
बांका, निज प्रतिनिधि। माद्य कृष्ण एकादशी यानी 14 जनवरी को खरमास का समापन हो गया है। जिससे हिंदू धर्म में शुभ कार्यों पर लगे प्रतिबंध भी खत्म हो गए हैं। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण का आरंभ हो गया है। इसे देवताओं का दिन माना जाता है। इसके साथ ही धार्मिक, सामाजिक और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल समय शुरू हो जाएगा। पंडित राधाकांत झा ने बताया कि इस वर्ष शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह का शुभ लग्न चार फरवरी से शुरू होगा। इससे पहले 23 जनवरी को वसंत पंचमी का दिन विशेष विशेष महत्व रखता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह अबूझ मुहूर्त है, इसमें बिना पंचांग देखे भी इस दिन शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन भूमि-पूजन, भवन निर्माण, आभूषण व वाहन खरीद, छेका-सगाई जैसे काम शुभ माने गए हैं। खरमास की समाप्ति और वसंत पंची के अबूझ मुहूर्त के साथ ही शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ दौर फिर से रफ्तार पकडने जा रहा है। जिससे जिले में फरवरी -मार्च से शहनाईयों की गूंज सुनाई देगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरू, शुक्र और शुभ स्थिति होने पर ही विवाह संस्कार के योग बनाते हैं। चार फरवरी से 14 फरवरी तक कुल 28 शुभ विवाह मुहूर्त रहेंगे। काशी विश्वनाथ पंचाग के अनुसार फरवरी में 17 और मार्च में 11 मुहूर्त हैं। यहां लग्न शुरू होते ही बजारों और कारोबार में भी तेजी आएगी। विवाह, खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठानों से जुडा व्यापार रफ्तार पकड लेगा। हालांकि क्षेत्र में अभी से ही विवाह भवन, होटल, कैटरर, टेंट-लाईट, वाहन व डीजे की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। वहीं, व्यापारी व दुकानदार भी विवाह से जुडी सामग्रियों व समानों का भंडारण शुरू कर दिया है। जिससे वे लग्न में अच्छा व्यापार कर सकें। इसके अलावे कार व बाईक शो-रूम वाले भी गाडियों को स्टॉक करने में लगे हैं। आचार्य रमन झा ने बताया कि विवाह के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न में से किसी एक का होना आवश्यक है। वहीं, अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मद्या, चित्रा, स्वाती, श्रवण, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद और उत्तरा आषाढ नक्षत्रों को शुभ माना गया है। रोहिणी, मृगशिरा और हस्त नक्षत्र में विवाह होना अति उत्तम फलदायी माना जाता है। फरवरी व मार्च में शुभ विवाह मुहूर्त फरवरी : 4, 5, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25, 26। मार्च : 2, 4, 5, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14।

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