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24 जनवरी, 2021|2:18|IST

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जीवनदायिनी दरभाषण व बडुआ नदी सूखी

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कटोरिया (बांका)। निज प्रतिनिधि

जंगल, पहाड़ों और पहाड़ी नदियों की गोद में बसे कटोरिया एवं चांदन क्षेत्र के गांवों की प्राकृतिक छटा अब धीरे—धीरे विलुप्त होती जा रही है। कभी के जमाने में यहां के सम्पूर्ण भूभागों में तरह—तरह की खनिज संपदा पाई जाती थी, जो आज पुरी तरह नष्ट होने के कगार पर है। एक तरफ जहां लकड़ी माफियाओं द्वारा जंगलों को उजाड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बालू उठाव में हुई बेतहाशा वृद्धि से नदियों का अस्तित्व मिटता जा रहा है। नदियों की संरक्षण के लिए सरकार द्वारा कई फैसले लिए जा रहे हैं। लेकिन क्षेत्र के दरभाषण नदी और बडुआ नदी को देखने के बाद इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। जो लगातार उपेक्षा किये जाने के वजह से अपनी मूल अस्तित्व को खोते हुए विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। जिसका सबसे बड़ा कारण बालू माफियाओं की लालच एवं खर्चे में हो रही बेतहाशा वृद्धि है। इसके अलावा प्रशासन द्वारा भी जल संरक्षण के प्रति भी उदासीनता इसका मुख्य कारण है।जीवनदायनी नदी थी कभीदरभाषण नदी और बडुआ नदी इस क्षेत्र की जीवन दायनी नदी के रूप में जानी जाती रही है। लेकिन कुछ वर्षों से नदी में हो रहे अवैध उत्खनन ने नदी को नाले के रूप में सीमित कर दिया है। तभी तो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी दरभाषण एवं बडुआ जहां कुछ वर्ष पूर्व भीषण गर्मी के दिनों में भी कल—कल—छल—छल की आवाज के साथ पानी का बहाव जारी रहता था। आज गर्मी के शुरुआती दिनों में यह नदी पूरी तरह सिकुड़ कर अपनी दर्द भरी कहानी बयां कर रही है। सम्पूर्ण नदी में पानी स्त्रोत के बाद बालू ही बालू नजर आती थी। वह अपना अस्तित्व गवां चुकी है। पूरी नदी से बालू का नामो—निशान मिट जाने से सम्पूर्ण नदी उबड़—खाबड़ गढ्ढे में तब्दील हो गई है। हर जगह बालू के बदले पत्थर एवं कंकरीट नजर आ रहा है। प्रखंड क्षेत्र के नदियों का जलस्तर नीचे चले जाने से नदी किनारे बसने वाले गांव के लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन को नदियों के डूबते अस्तित्व को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना होगा, वरना कल खर्च में और वृद्धि होगी और हालत इससे भी बदतर।

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  • Web Title:Jeevandayini Darbhashna and Badua river dry