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जिले के 180 स्कूूलों में होगी इंटीग्रेटेड लैब की सुविधा

जिले के 180 स्कूूलों में होगी इंटीग्रेटेड लैब की सुविधा

संक्षेप:

पेज तीन की लीडपेज तीन की लीड हिन्दुस्तान विशेष 203 प्लस टू हाई स्कूल हैं जिले में संचालित बांका। निज प्रतिनिधि। जिले के सरकारी स्कूलों के लिए

Dec 02, 2025 01:20 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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बांका, निज प्रतिनिधि। जिले के सरकारी स्कूलों के लिए नया साल एक बडा बदालव लेकर आएगा। जिले के 180 हाई स्कूलों में तैयार की जा रही इंटीग्रेटेड लैब। इस लैब में विद्यार्थी विज्ञान और गणित विषय का प्रैक्टिकल करेंगे। ये लैब बच्चों के लिए जनवरी में खोल दी जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में बडा बदलाव लाने के लिए ये पहल की जा रही है। ये परिवर्तन प्रयोग आधारित पढाई को बढावा देने के लिए की गई है। सूबे में 4621 स्कूलो में ऐसी लैब बनाई जा रही है। जिसे तैयार करने के लिए तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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एजेंसी ने जिले के 90 फीसदी स्कूलों में लैब स्थापित करने की रिपोर्ट पेश की है। जिले में 203 हाई स्कूल हैं, जहां इंटीग्रेटेड लैब स्थापित की जा रही है। जिसका भौतिक सत्यापन जिला शिक्षा पदाधिकारी कर रहे हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि यह लैब खासकर उन छात्र-छात्राओं के लिए फायदेमंद होगी जो इंटर में में गणित और विज्ञान की पढाई कर रहे हैं। अब तक सरकारी स्कूलों में स्टेम आधारित लैब की सुविधा थी, लेकिन नए मॉडल के तहत बच्चे रट्टामार पढाई से हटकर कर प्रयोग, अनुभव और नावाचार के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि यहां ऐसे उपकरण लागाए जा रहे हैं जिनसे बच्चे खुद मॉडल बनाएंगे, उसकी प्रक्रिया को समझेंगे और गणित व विज्ञान विषय को बोझ नहीं समझेंगे। इससे शिक्षा के क्षेत्र में साकारात्मक बदलाव होने के साथ ही बच्चों को गणित व विज्ञान विषयों की पढाई में आसानी होगी। इंटीग्रेटेड लैब के संचालन का उदेश्य यह भी है कि मैट्रिक और इंटर के छात्रों में विज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो सके। कठिन समझे जाने वाले विषयों को आसान और रोचक बनाने के लिए इंटीग्रेटेड लैब में तकनीकी किट, मापन उपकरण, माइक्रो लैब सेटअप, इंजीनियरिंग गतिविधियां और गणितिय प्रयोग मॉडल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण और पिछडे इलाकों के स्कूलों में पढने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा संसाधनों का लाभ मिल सकेगा। जिले के अधिकांश हाई स्कूलों में लैब की फिनिशिंग व विद्युत की व्यवस्थ्ज्ञा का काम जारी है। डीइओ ने बताया कि भौतिक सत्यापन पूरा होते ही जनवरी से प्रयोगात्मक कक्षाएं शुरू करने का निर्देश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का दावा है कि यह पहल आने वाले वर्षों में बच्चों की विषय क्षमता और सीखने के स्तर में बडा बदलाव लाएगी।