
करीब 100 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है रजौन सब्जी हाट काली मंदिर का इतिहास।
1921 ईस्वी के आस-पास हुआ था, वैष्णवी काली मंदिर का निर्माण।1921 ईस्वी के आस-पास हुआ था, वैष्णवी काली मंदिर का निर्माण। 1918 ईस्वी में हाट लगने के दो स
रजौन(बांका)। निज संवाददाता रजौन सब्जी हाट परिसर स्थित काली-दुर्गा वैष्णवी मंदिर का इतिहास करीब 100 वर्ष पुराना है। बाजारवासियों की माने तो इस मंदिर का निर्माण 1921 ईस्वी के आस-पास उस वक्त हुआ था जब रजौन थाना में चांद बिहारी सिंहा दारोगा थे। उस वक्त यह क्षेत्र बरारी स्टेट के जमींदारी में आता था। बुजुर्ग ग्रामीण देवनन्दन श्रीवास्तव, सुर्यनारायण यादव, आदि ने बताया कि उस समय के जमींदार नरेश मोहन ठाकुर से यहां के ग्रामीण संतलाल गुरुजी, जयनाथ सिंह, मोदी प्रसाद यादव, परमेश्वर लाल आदि ने लोगों ने आग्रह किया कि आप के जमींदारी इलाके में यहां एक हाट लगनी चाहिए, इसके बाद दारोगा चांद बिहारी सिंहा व जमींदार सहित बाजारवासियों की पहल पर रजौन में हाट लगना शुरू हुआ। इसके बाद यहां महामारी आदि से राहत के लिए एक काली मंदिर का निर्माण भी हुआ। इसके पहले यह के लोग बामदेव बाजार हाट-बाजार करने जाते थे। हाट लगने के बाद मंदिर का निर्माण हुआ, तब से हर वर्ष धूमधाम से काली पूजा के साथ ही चैत माह में दुर्गा पूजा भी हो रहा है। कहते है कि सच्चे मन से यह मां की आराधना करने वालों की सारी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है। रजौन बाजार के निवासी सत्यनारायण सिंह, विजय प्रसाद सह, प्रकाश मंडल आदि ने बताया कि पुराने पूर्वजों के सार्थक प्रयास के बाद वर्ष 1921 में पहली बार ईंट व टीना की छावनी वाली मंदिर में मां काली की प्रतिमा स्थापित हुई थी। तब से अब तक लगातार मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित कर काली व चैती दुर्गा की पूजा-अर्चना इस मंदिर में होता रहा है।

करीब10 वर्षों से अब युवाओं के हाथ में सौंप दिया गया है, पूजा का दायित्व।
पिछले 10 वर्षों से रजौन बाजार के युवाओं को पूजा का दायित्व सौंप दिया गया है। वर्ष 2005 में रजौन बाजार वासियों के प्रयास से भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। वर्ष 2007 में मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण होने के बाद नए सुसज्जित भव्य मंदिर इस बार पूजा समिति का दायित्व नया कमिटी गठित कर बासुकी नाथ सिंह को अध्यक्ष, निरंजन यादव उर्फ पप्पू यादव को उपाध्यक्ष, ओंकार भारती को सचिव, अनिल यादव को कोषाध्यक्ष, अमरेंद्र कुमार उपसचिव,रंजीत सह को उपकोषाध्यक्ष सहित कई बाजारवासियों को सदस्य सहित संरक्षण समिति भी अलग से बनाई गई है।

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