बांका : असम, झारखंड व बंगाल के 300 संथाल परिवारों ने ईसाई धर्म त्यागकर की घर वापसी

Jan 15, 2026 01:26 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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मंदार क्षेत्र में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सनातन संथाल महाकुंभ में 300 संथाल परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सनातन संथाल समाज में वापसी की। इस अवसर पर सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने कहा कि यह केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मिक पुनर्जागरण है।

बांका : असम, झारखंड व बंगाल के 300 संथाल परिवारों ने ईसाई धर्म त्यागकर की घर वापसी

बौंसी, निज संवाददाता। मंदार क्षेत्र में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय सनातन संथाल महाकुंभ में बुधवार को ऐतिहासिक धर्म पुनर्वापसी का साक्षी बना। इस अवसर पर असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आए करीब 300 संथाल परिवारों ने ईसाई धर्म त्यागकर पुनः सनातन संथाल समाज में घर वापसी की। अखिल भारतीय सनातन संथाल समाज द्वारा आयोजित इस महाकुंभ में धर्म जागरण, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का संदेश गूंजता रहा। कार्यक्रम अखिल भारतीय सनातन संथाल समाज की गुरुमाता रेखा हेंब्रम की पावन उपस्थिति में संपन्न हुआ, जहां सभी परिवारों का विधिवत शुद्धिकरण कर उन्हें सनातन समाज में पुनः प्रवेश कराया गया।

शुद्धिकरण संस्कार के पश्चात सभी परिवारों को सनातन समाज के मूल सिद्धांतों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भावनात्मक, श्रद्धा और आत्मगौरव से परिपूर्ण रहा। गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने कहा कि ये सभी परिवार मूल रूप से सनातन संथाल समाज के ही थे, जो किसी कारणवश ईसाई धर्म में चले गए थे। आज वे पुनः अपने मूल सनातन स्वरूप में लौटे हैं। यह केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आत्मिक पुनर्जागरण है। उन्होंने बताया कि वे अपना संपूर्ण जीवन सनातन संथाल समाज के उत्थान, संरक्षण और जागरण के लिए समर्पित कर चुकी हैं और यह अभियान निरंतर चलता रहेगा। विशेष कर असम से आए कारण मुर्मू के नेतृत्व में 40 परिवार एवं बंगाल से आए गंगा प्रसाद मुर्मू के सहयोग से आया है। इस महाकुंभ में हरिद्वार से पधारे सनातन धर्मगुरु श्री सूर्यानंद गिरी जी महाराज, कमल पावरी, राजाराम अग्रवाल, राहुल डोकानियां मनीष कुमार सहित कई संत, समाजसेवी और संगठन प्रतिनिधि मौजूद रहे। धर्म जागरण मंच एवं अन्य सामाजिक संगठनों की भी इस आयोजन में सक्रिय सहभागिता रही। महाकुंभ परिसर सनातन संस्कृति अमर रहे जैसे नारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण को प्रत्यक्ष देखा और इसे संथाल समाज के लिए गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

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