बिना लाइसेंस के संचालित मेडिकल स्टोरों पर सवाल, ग्रामीणों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़
पेज तीन की लीडपेज तीन की लीड नकली दवाइयों से मालामाल हो रहे संचालक,जबकि ठगी जा रही है भोलीभाली ग्रामीण जनता बांका, निज संवाददाता।

बांका, निज संवाददाता। जिले में बिना वैध लाइसेंस और पंजीकरण के संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से चल रहे ऐसे अवैध मेडिकल प्रतिष्ठानों पर निगरानी और कार्रवाई के अभाव में लोगों को न केवल संदिग्ध गुणवत्ता की दवाइयां बेची जा रही हैं, बल्कि कई स्थानों पर मेडिकल दुकानों की आड़ में झोलाछाप चिकित्सकों के क्लीनिक भी संचालित किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बांका सदर प्रखंड के अलावा बाराहाट, बौंसी,रजौन,बेलहर,धोरैया समेत जिले के विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे मेडिकल स्टोर संचालित हैं, जिनके पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानों में कई बार संदिग्ध और फर्जी फार्मा कंपनियों की दवाइयां भी बेची जाती हैं। इसके अलावा जीवनरक्षक दवाओं के साथ-साथ कुछ प्रतिबंधित श्रेणी की दवाओं की भी खुलेआम बिक्री होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 688 पंजीकृत दवा प्रतिष्ठान संचालित हैं। इनमें होम्योपैथी दवाओं के चार थोक एवं आठ खुदरा विक्रेता शामिल हैं, जबकि एक प्रतिष्ठान ऐसा भी है जहां होम्योपैथिक दवाओं का थोक और खुदरा दोनों प्रकार का कारोबार होता है। वहीं अंग्रेजी दवाओं के 271 थोक विक्रेता और 372 खुदरा विक्रेता पंजीकृत हैं। इसके अतिरिक्त 12 ऐसे प्रतिष्ठान हैं जिन्हें सीमित दवा बिक्री और प्राथमिक उपचार संबंधी गतिविधियों की अनुमति प्राप्त है। हालांकि जमीनी हकीकत विभागीय आंकड़ों से काफी अलग दिखाई देती है। जिले के लगभग सभी छोटे-बड़े बाजारों, चौक-चौराहों और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल दुकानों की संख्या पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या से कहीं अधिक प्रतीत होती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि जिले में निर्धारित संख्या में ही लाइसेंसधारी दुकानें हैं, तो अतिरिक्त रूप से संचालित हो रही दुकानों की वैधता की जांच कब और कैसे की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना योग्य परामर्श के दवा सेवन कई बार गंभीर दुष्परिणाम पैदा कर सकता है। गलत दवा, गलत मात्रा या नकली दवा के सेवन से मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इसलिए लोगों को किसी भी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने से पहले उसकी वैधता, बिल और चिकित्सकीय परामर्श का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जनहित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर आम लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित मेडिकल स्टोरों की पहचान करे तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि जिलेवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें。
कहते हैं अधिकारी
जिले में संचालित होने वाले फार्मेसी स्टोर की मासिक प्रतिवेदन ड्रग इंस्पेक्टर की ओर से दिए जाते हैं, अबतक किसी भी प्रखंड में संचालित इन अवैध मेडिकल स्टोर्स की जानकारी नहीं दी गयी है,जानकारी मिलते ही विभाग द्वारा ऐसे गैर लाइसेंसी संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
रवींद्र मोहन, सहायक दवाई नियंत्रक (बांका)।
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