कृषि विभाग के लिए फार्म रजिस्ट्री बनी बडी चुनौती

Jan 06, 2026 11:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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पंचायतों में कैंप लगाकर किसानों का किया जा रहा ई-केवाइसी व फार्म रजिस्ट्री पंचायतों में कैंप लगाकर किसानों का किया जा रहा ई-केवाइसी व फार्म रजिस्ट्री

कृषि विभाग के लिए फार्म रजिस्ट्री बनी बडी चुनौती

बांका, निज प्रतिनिधि। कृषि विभाग के लिए फार्म रजिस्ट्री बडी चुनौती बन गई है। यहां सभी 11 प्रखंडों को मिलाकर करीब 2 लाख 10 हजार 835 अन्नदाता किसान सम्मान निधि योजना से निबंधित हैं। जिसमें यहां अब तक महज 86 हजार 253 किसानों का ही ई केवाइसी हो सका है। ऐसे में यहां 50 फीसदी किसानों का भी ई केवाईसी नहीं हो सका है। इसी तरह यहां किसानों का फार्म रजिस्ट्री 10 फीसदी का आंकडा भी पार नहीं कर सहा है। यहां अबतक महज 14 हजार किसानों का ही फॉर्म रज्ट्रिरी हो पाया है। जिससे किसानों के फार्म रजिस्ट्री में तेजी लाने के लिए दो चरणों में शिविर लगाकर किसानों का ई-केवाईसी एवं उनका फार्म आईडी बनाया जायेगा।

इसको लेकर मंगलवार से पहले चरण के शिविर की शुरूआत कर दी गई है। जो 9 जनवरी तक चलेगी। जबकि दूसरे चरण के शिविर का आयोजन 16 से 19 जनवरी तक होगा। पहले चरण के शिविर में पहले दिन जिले के सभी 183 पंचायतों मेें 3150 किसानों का ई-केवाइसी किया गया। जबकि 412 किसानों का फार्म रजिस्ट्री किया गया। दरअसल, फॉर्म रज्ट्रिरी के माध्यम से आधार कार्ड की तरह सभी किसानों का यूनिक आईडी बनना है। बीते अप्रैल से ही इसके लिए विशेष अभियान की शुरुआत की गयी थी। लेकिन, अबतक उम्मीद के अनुसार परिणाम सामने नहीं आया है। किसानों की अरुचि और हल्का कर्मचारियों द्वारा ई-केवाईसी के सत्यापन और आईडी बनाने में अनदेखी के कारण यूनिक आईडी बनाने की रफ्तार धीमी पड़ गयी है। जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर किसानों के फार्म रजिस्ट्री बनाए जाने में तेजी आई है। इसके लिए दिसंबर में ही मास्टर ट्रेनों को विशेष प्रशक्षिण दिये गये थे। जिनके बाद जिलास्तर पर फॉर्म रज्ट्रिरी करने वाले कृषि विभाग के समन्वयक और हल्का कर्मचारियों को प्रशक्षिति किया गया। जिससे शिविर के माध्यम से गांव-गांव जाकर फॉर्म रज्ट्रिरी की प्रक्रिया को रफ्तार दी जा रही है। फार्म रजिस्ट्री के माध्यम से किसान का रिकार्ड मसलन उनकी पहचान, जमीन का विवरण और खेती-बाडी के बारे में डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसका उदेश्य किसानों को किसान आईडी यानी किसान पंजीकरण संख्या दिया जा रहा है, जो उन्हें सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से प्राप्त करने में मदद मिल सके। साथ ही कृषि से जुडी अन्य योजनाओं का लाभ लेने में किसानों को सहूलियत हो सके। वहीं, फार्म रजिस्ट्री के लिए किसानों के नाम से जमीन का जमाबंदी होना जरूरी है। जबकि शुरूआती दौर में कई किसानों ने वंशावली के आधार पर ही योजना का लाभ लिया है। दो चरणों में होने वाली इस पूरी प्रक्रिया को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी कृषि विभाग और अंचल कार्यालय को दिया गया है। पहले चरण में किसानों का सत्यापन कर निबंधन व ई-केवाईसी करने की जवाबदेही कृषि समन्वयकों को दी गयी है। जबकि, दूसरे चरण में निबंधन के बाद हल्का कर्मचारियों को रैयत किसान की जमीन का सत्यापन व ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर यूनिक आईडी जेनरेटर करना है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एप के माध्यम से की जानी है। फार्मर आईडी से किसानों को कई फायदे होंगे। खास यह कि बार-बार किसानों को ई-केवाईसी कराने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। आधार कार्ड की तरह पूरी जानकारी यूनिक आईडी में दर्ज रहेगी। फार्मर आईडी बनाने वाले किसानों को केंद्र सरकार द्वारा चलायी जा रही कृषि योजनाओं का लाभ भी मिलेगा। राहत यह कि इसके माध्यम से किसानों को सस्ता ऋण, कृषि इनपुट , विशष्टि सलाह के साथ उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। किसानों को यूनिक आईड बनवाने के लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर व जमीन का रसीद देना होगा। यूनिक आईडी में किसान का नाम, पिता का नाम, स्वामत्वि वाली जमीन का खाता, खेसरा, मोबाइल नंबर, आधार नंबर को मिलाकर एक संपूर्ण डाटाबेस तैयार किया जायेगा। कहते हैं अधिकारी यूनिक आईडी के माध्यम से एक क्लिक पर किसानों को सारी जानकारियां मिलेंगी। सरकार की योनाओं का लाभ लेने में भी सहूलियत होगी। इसके लिए जिले में शिविर का आयोजन कर किसानों का ई-केवाइसी एवं फार्म रजिस्ट्री किया जा रहा है। शिविर के पहले दिन यहां 3150 किसानों का ई-केवाइसी एवं 412 किसानों का फार्म रजिस्ट्री किया गया। त्रिपुरारी शर्मा, डीएओ, बांका।

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