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अब लाभर्थियों के चेहरे पहचान कर किया जा रहा पोषाहार का वितरण

अब लाभर्थियों के चेहरे पहचान कर किया जा रहा पोषाहार का वितरण

संक्षेप:

हिन्दुस्तान विशेषहिन्दुस्तान विशेष सेविका अब मोबाइल एप के जरिये चेहरे की पहचान कर दे रही पोषाहार नई व्यवस्था के लागू होने से पोषाहार के

Jan 04, 2026 01:50 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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बांका। निज प्रतिनिधि। जिले के आंगनबाडी केंद्रों पर अब लाभार्थियों के चेहरे की पहचान कर पोषाहार (टीएचआर) का वितरण किया जा रहा है। इसको लेकर आंगनबाड़ी लाभार्थियों को पोषाहार लेने के लिए पोषण ट्रैकर ऐप के ज़रिए चेहरा प्रमाणीकरण (फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम) और ई-केवाइसी कराना अनिवार्य है, ताकि सही व्यक्ति को पोषण मिल सके। इसके तहत लाभार्थी को केंद्र पर जाकर अपनी पहचान (फोटो और ओटीपी) देनी होगी। जिसके बाद ही उसे पोषाहार मिलेगा। इससे धोखाधड़ी रुकेगी और इस नई तकनीक से सेविकाओं को टीएचआर वितरण में कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा। हालांकि, कुछ लाभार्थियों के लिए फोन और इंटरनेट की उपलब्धता चुनौती बन रही है।

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इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थी (गर्भवती महिला, धात्री माता व बच्चों) को खुद पोषाहार लेने केंद्र पर जाना पड रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पोषण ट्रैकर ऐप में लाभार्थी का आधार नंबर दर्ज करती हैं, जिसके बाद ओटीपी का सत्यापन किया जाता है। इसके साथ ही ऐप के माध्यम से लाभार्थी के चेहरे का मिलान किया जाता है। चेहरा और ओटीपी का सत्यापित होने के बाद ही लाभार्थी को पोषाहार का पैकेट दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से फर्जीवाड़े और अपात्रों को लाभ दिये जाने की परिपार्टी पर रोक लगेगी। इस नई व्यवस्था को लागू किये जाने का मकसद यह सुनश्चिति करना है कि पोषाहार वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे और वास्तविक समय में डेटा अपडेट कर पोषण कार्यक्रम को बेहतर बनाना है । इसके लिए जिले में संचालित 2341 आंगनबाडी केंद्रों में फेस एफआरएस लागू कर दिए गए हैं। जिससे पोषाहार लेने के लिए लाभार्थी को भौतिक रूप से आंगनबाडी केंद्रों पर उपस्थित होना अनिवार्य हो गया है। जबकि पहले लाभार्थी की जगह उनके परिवार के कोई भी सदस्य पोषाहार का उठाव कर लेते थे। लेकिन अब लाभुक के चेहरे की पहचान कर ही पोषाहार दिए जा रहे हैं। 1 लाख 10 हजार 605 लाभार्थी जिले में हैं जिले में पोषाहार लेने वाले लाभार्थियों की संख्या 1 लाख 10 हजार 605 है। जिसमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं एवं छह साल तक के बच्चे शामिल हैं। इसमें 1 लाख 5 हजार 542 लाभार्थियों के आधार फेस मैचिंग की जा चुकी है। जबकि अभी 87 हजार 506 लाभार्थियों के बीच चेहरा प्रमाणीकरण (फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम) से पोषाहार का वितरण किया जा रहा है। जो कुल लाभार्थी का महज 79.12 फीसदी है। पोषाहार वितरण संबंधी रिपोर्ट और मॉनिटरिंग के लिए पोषण ट्रैकर है। पोषण ट्रैकर एप में ही एफआरएस का फीचर है। इसकी सहायता से आंगनबाड़ी केंद्र पर लाभुक का चेहरा मिलान किया जा रहा है। इसके बाद ही पोषाहार का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही लाभुक का आधार लिंक है। जिसके जरिये लाभर्थी का चेहरा पढ़ते ही उसके आधार से सत्यता की भी जांच की जा रही है। इससे आंगनबाडी केंद्रों पर पोषाहार वितरण में हो रहे भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक रोक लगेगी। कोट... पोषाहार वितरण में गड़बड़ी नहीं हो इसे सुनश्चिति करने के लिए अब लाभार्थियों के चेहरे की पहचान कर टीएचआर दिए जा रहे हैं। इसके लिए विभन्नि स्तरों पर आंगनबाड़ी सेविका को प्रशक्षिति किया गया है। जिले के प्रखंडों के आंगनबाडी केंद्रों पर बच्चों , गर्भवती और अति कुपोषित लड़कियों तथा महिलाओं को पोषहार मिल रहा है। इसमें लगभग 80 प्रतिशत लाभुक का आधार से लिंक कर उसकी फेस मैचिंग की जा चुकी है। रेणु कुमारी, डीपीओ, आइसीडीएस, बांका।