Banka News: खेल दिवस: नहीं देखा अपना भविष्य, खिलाड़ियों को पहुंचाया उनके लक्ष्य तक

हिन्दुस्तान, बांका
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Banka News: खेल दिवस पर विशेषखेल दिवस पर विशेष खेल के मैदान में सिर्फ खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को सही मंच देकर भविष्य संवारना ही

Banka News: खेल दिवस: नहीं देखा अपना भविष्य, खिलाड़ियों को पहुंचाया उनके लक्ष्य तक

Banka News: खेल के मैदान में सिर्फ खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को सही मंच देकर भविष्य संवारना ही लक्ष्य हो तो सफलता की राह आसान हो जाती है। बांका जिले में ऐसे कई लोग हैं जो अपने भविष्य की चिंता किए बिना अन्य खिलाड़ियों को उनके लक्ष्य दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। ऐसे ही लोगों के जीवन व उनके किए कार्य को आज आसमान को छू रहे खिलाड़ी भी हर वक्त याद करते हैं। ऐसे ही लोगों के जीवन की कहानी प्रस्तुत है। खेल को बनाया जुनून, 80 से अधिक राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए, प्रदीप कुमार बने बांका के खेल जगत की पहचान

वॉलीबॉल के मैदान से युवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में निभा रहे अहम भूमिका, दक्षिण बिहार का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनाने का है सपना

बांका, नगर प्रतिनिधि।

खेल के मैदान में सिर्फ खिलाड़ी तैयार करना ही नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को सही मंच देकर भविष्य संवारना ही लक्ष्य हो तो सफलता की राह आसान हो जाती है। जिला के शारीरिक शिक्षक सह जिला खेल संयोजक प्रदीप कुमार ने इसी सोच को अपना मिशन बनाया है। फरवरी 2010 से एमआरडी उच्च विद्यालय, बांका में कार्यरत प्रदीप कुमार वॉलीबॉल के क्षेत्र में खिलाड़ियों को तराशने के साथ जिले में खेल गतिविधियों को गति देने में लगातार जुटे हैं। सोनबर्षा, बिहपुर (भागलपुर) निवासी प्रदीप कुमार ने वॉलीबॉल में नेशनल रेफरी के साथ शॉर्ट एनआईएस कोच के रूप में भी पहचान बनाई है। वे बांका जिला वॉलीबॉल संघ के संयुक्त सचिव तथा बिहार राज्य वॉलीबॉल संघ के सहायक सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। साथ ही राष्ट्रीय विद्यालय वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं सहित भारतीय वॉलीबॉल संघ की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वे मुख्य प्रशिक्षक और प्रबंधक की भूमिका निभा चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 2012 से अब तक 80 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

कराटे को बनाया मिशन, 30 हजार से अधिक बालिकाओं को सिखाई आत्मरक्षा, निलेश कुमार सिंह बने मिसाल

बच्चों को मोबाइल से दूर कर खेल से जोड़ने की पहल, 20 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं प्रदर्शन

बांका, नगर प्रतिनिधि।

कराटे को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा का माध्यम बनाकर निलेश कुमार सिंह पिछले एक दशक से अधिक समय से बच्चों और बालिकाओं को नई दिशा दे रहे हैं। वर्ष 2012 में ब्लैक बेल्ट हासिल करने के बाद उन्होंने कराटे प्रशिक्षण के जरिए महिला सशक्तिकरण और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया। वर्ष 2012 में आनंदमार्ग हाई स्कूल से प्रशिक्षण की शुरुआत करने के बाद वर्ष 2015 से इंडोर स्टेडियम, बांका में बच्चों को नियमित प्रशिक्षण दे रहे हैं।विभिन्न विद्यालयों में निःशुल्क आत्मरक्षा शिविर लगाकर अब तक 30 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रशिक्षण देने का दावा किया है। साथ ही वर्ष 2019 में पुलिस लाइन में 334 महिला प्रशिक्षुओं व महिला सिपाहियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण भी दिया, जिसके लिए डीआईजी द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। इसके अलावे प्रतिदिन इंडोर स्टेडियम में तीन से 19 वर्ष तक के बच्चों को प्रशिक्षण देकर उन्हें मोबाइल की लत और अस्वस्थ जीवनशैली से दूरकर खेल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। परिणामस्वरुप, उनके प्रशिक्षण से जुड़े 20 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा ले चुके हैं। जबकि एसजीएफआई प्रतियोगिता में जिले की एक बालिका ने अंडर-14 वर्ग में स्वर्ण पदक भी हासिल किया। साथ ही विशेष आवश्यकता वाली और दृष्टिबाधित बालिकाओं को भी वे निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण देते हैं। निलेश कुमार सिंह का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों और बालिकाओं को कराटे से जोड़कर उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित करना है।

खेल शिक्षक रौशन कुमार ने खो-खो को बनाया मिशन, 30 खिलाड़ियों को पहुंचाया राष्ट्रीय स्तर तक

ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशकर दे रहे नई पहचान, अनुशासन और टीम भावना के साथ खिलाड़ियों को सफलता की राह दिखाने में जुटे

बांका, नगर प्रतिनिधि।

प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर की। इसी सोच के साथ खेल शिक्षक एवं खो-खो प्रशिक्षक रौशन कुमार लंबे समय से बच्चों और युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के प्रयास में जुटे हैं। खासकर खो-खो के प्रति उनका समर्पण जिले के युवा खिलाड़ियों को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है। रौशन कुमार प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को खेल की तकनीक के साथ अनुशासन, मेहनत, टीम भावना और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाते हैं। उनके मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण से अब तक 30 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके प्रशिक्षण कार्य की सफलता को दर्शाती है, बल्कि बांका की ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की क्षमता को भी सामने लाती है। उनका विशेष जोर ग्रामीण और छोटे शहरों के उन बच्चों पर है, जिन्हें संसाधनों और अवसरों के अभाव में अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच नहीं मिल पाता।वे ऐसे खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और बेहतर मार्गदर्शन के जरिए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार कर रहे हैं। रौशन कुमार का मानना है कि, खेल युवाओं को स्वस्थ रखने के साथ उनके व्यक्तित्व और भविष्य को भी मजबूत आधार देता है। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक प्रतिभाओं को खो-खो से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना और खेल के माध्यम से युवाओं को बेहतर भविष्य की राह दिखाना है।

खुद नौकरी नहीं की, खेल से सैंकड़ों युवाओं का भविष्य संवारा, कुर्माडीह के रामानुज सिंह "छोटू" बने मिसाल

मैदान से डिफेंस तक पहुंचाया सैंकड़ों युवाओं को, कुर्माडीह के रामानुज सिंह "छोटू" बने खेल जगत की प्रेरणा

बांका, नगर प्रतिनिधि।

मंजिल तक पहुंचने के लिए हर कोई अपने लिए रास्ता तलाशता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरों के सपनों को मंजिल तक पहुंचाने को ही अपना मिशन बना लेते हैं। जिले के शम्भूगंज प्रखंड कुर्माडीह गाँव में जन्मे रामानुज सिंह उर्फ छोटू ऐसे ही युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। खुद सरकारी नौकरी नहीं की, लेकिन खेल के माध्यम से सैंकड़ो युवाओं के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाई। आज क्षेत्र के कई युवा खेल के मैदान से निकलकर डिफेंस की नौकरी तक पहुंच चुके हैं। फुटबॉल से अपने सफर की शुरुआत करने वाले छोटू ने धीरे-धीरे खेल को ही अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया। कभी मैदान पर खिलाड़ी के रूप में नजर आए तो कभी कोच बनकर युवाओं को खेल की बारीकियां सिखाईं। वहीं, रेफरी की भूमिका निभाते हुए भी उन्होंने युवाओं को अनुशासन, मेहनत और खेल भावना का पाठ भी खूब पढ़ाया। उनका उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना रहा। ग्रामीणो ने बताया कि, उनके मार्गदर्शन में क्षेत्र के सैंकड़ों युवाओं ने खेल के साथ-साथ डिफेंस भर्ती की तैयारी की और कई युवाओं को सेना व अन्य सुरक्षा सेवाओं में नौकरी हासिल करने में सफलता मिली। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए उनका सहयोग और मार्गदर्शन विशेष मायने रखता है। छोटू कहते हैं कि, मैदान में पसीना बहाने वाला युवा जीवन में भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना सीखता है। यही सोच उन्हें लगातार युवाओं को खेल से जोड़ने और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। कुर्माडीह और आसपास के क्षेत्र में आज उन्हें लोग सिर्फ खिलाड़ी, कोच या रेफरी के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को दिशा देने वाले ‘रामानुज’ के रूप में सम्मान देते हैं।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदीप कुमार का मिशन क्या है?
प्रदीप कुमार का मिशन खिलाड़ियों को तैयार करना और उनकी प्रतिभा को सही मंच देकर भविष्य संवारना है।
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