Banka News: बच्चों को सही दिशा देने में शिक्षकों के साथ अभिभावकों की भूमिका भी अहम

हिन्दुस्तान, बांका
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Banka News: हिन्दुस्तान संवादहिन्दुस्तान संवाद अभिभावकों को अपने बच्चों को समय देने के साथ साथ उनकी गतिविधियों पर ध्यान देते हुए करना चाहिए मित्रवत

Banka News: बच्चों को सही दिशा देने में शिक्षकों के साथ अभिभावकों की भूमिका भी अहम

Banka News: बांका, नगर प्रतिनिधि। बच्चों के बेहतर भविष्य और व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। विद्यालय में शिक्षक बच्चों को शिक्षा और अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं, वहीं घर पर अभिभावकों का व्यवहार और मार्गदर्शन उनके व्यक्तित्व को आकार देता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को पर्याप्त समय देने के साथ उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनके साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। बच्चों की जरूरतों और परेशानियों को सुनकर उनका सही मार्गदर्शन करना भी जरूरी है।

अभिभावकों की जिम्मेदारी

मंगलवार को शहर के रानी महकम कुमारी उच्च विद्यालय में आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार के द्वारा हिंदुस्तान ओलंपियाड के तत्वावधान में आयोजित स्कूल संवाद कार्यक्रम में जिलेभर के सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों के प्राचार्य व शिक्षकों ने इन विषयों पर विचार साझा किए। संवाद के दौरान शिक्षकों ने कहा कि, वर्तमान समय में अभिभावकों की व्यस्तता बढ़ने के कारण विद्यालय से घर लौटने के बाद बच्चों को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। इसका सीधा असर बच्चों की गतिविधियों और व्यवहार पर पड़ रहा है। जबकि कई बार बच्चे अपनी समस्याएं अभिभावकों से साझा नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को बच्चों के साथ सहज और मित्रवत माहौल बनाकर नियमित संवाद करना चाहिए, ताकि वे बिना झिझक अपनी बात उनके समक्ष रख सकें। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि, नई पीढ़ी के बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। इसके पीछे बदलती जीवनशैली, खान-पान और दिनचर्या को भी प्रमुख वजह माना जा रहा है। बच्चों के खान-पान के साथ उनके सोने, पढ़ने और मोबाइल सहित अन्य गतिविधियों पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए। साथ ही बच्चों की हर गलती पर डांटने के बजाय उसकी वजह समझकर समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। स्कूल संवाद में यह सुझाव भी दिया गया कि, विद्यालयों के शिक्षक अपने स्कूल के अंतर्गत आने वाले गांवों को गोद लेकर महीने में कम से कम एक बार अभिभावकों और विद्यार्थियों के साथ जागरूकता संवाद करें। इस पहल से बच्चों और अभिभावकों की मूल समस्याओं को सामने लाने में मदद मिलेगी। साथ ही शिक्षक घर-परिवार के माहौल को समझकर बच्चों के व्यवहार और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का बेहतर समाधान सुझा सकेंगे।

आत्मविश्वास का विकास

मौक़े पर शिक्षकों ने कहा कि, बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है। उनके अंदर अनुशासन, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। इसके लिए विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होना अनिवार्य है। अभिभावक बच्चों की बात सुनें और शिक्षक उनके व्यवहार व पढ़ाई में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें, तो बच्चों को सही दिशा देने में काफी मदद मिल सकती है। स्कूल संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों के साथ नियमित समय बिताने और उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने की भी अपील की।

हिंदुस्तान ओलंपियाड में बच्चों को मिलेंगे आकर्षक पुरस्कार

हिंदुस्तान ओलंपियाड में जिले के स्कूल टॉपर के साथ-साथ जिला टॉपर का भी चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। ओलंपियाड के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और विभिन्न विषयों में ज्ञान का आकलन करने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता में शामिल होने से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ने के साथ ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित होगी।

प्रतिभा का सम्मान

हिंदुस्तान ओलंपियाड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की क्षमता और तैयारी का भी आकलन होता है। इससे बच्चों को अपनी कमजोरियों को पहचानकर बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा मिलती है। अभिभावकों और शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में ओलंपियाड में भाग लेने की अपील की है।

क्या कहते हैं शिक्षक?

बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए विद्यालय और परिवार दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यालय में बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने का काम करते हैं, लेकिन घर का वातावरण भी उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित संवाद करना चाहिए। साथ ही उनकी पढ़ाई के साथ व्यवहार और गतिविधियों पर भी नजर रखनी चाहिए। बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनकर समस्या का समाधान करना अधिक प्रभावी साबित होगा।

डॉ. राकेश कुमार रंजन

प्रचार्य, आरएमके स्कूल, बांका

आज के समय में बच्चों के सामने पढ़ाई के साथ कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को पर्याप्त समय देना चाहिए। कई बच्चे अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बता पाते हैं। यदि अभिभावक उनके साथ मित्रवत व्यवहार करेंगे तो बच्चे अपनी समस्याएं आसानी से साझा कर सकेंगे। इससे छोटी समस्या को समय रहते समझकर उसका समाधान किया जा सकता है। जबकि बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखने के साथ उनकी रुचि और प्रतिभा को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।

अभ्युदय अमर

प्रचार्य, आरआर पब्लिक स्कूल बांका

नई पीढ़ी के बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसके पीछे उनकी बदलती जीवनशैली और खान-पान भी एक कारण हो सकता है। अभिभावकों को बच्चों के खान-पान, नींद और दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से भी बच्चों की आदतों में बदलाव आता है। इसलिए बच्चों पर केवल रोक लगाने के बजाय उन्हें मोबाइल के सही और सीमित इस्तेमाल के बारे में समझाना चाहिए।

रंगोली कुमारी

बीएसटी शिक्षिका, आरएमके उच्च विद्यालय, बांका

बच्चों को सही दिशा देने के लिए शिक्षक और अभिभावक के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। विद्यालय में बच्चे के व्यवहार या पढ़ाई में किसी तरह का बदलाव दिखाई देता है तो इसकी जानकारी अभिभावकों तक पहुंचनी चाहिए। इसी तरह घर में बच्चे की कोई परेशानी हो तो अभिभावक शिक्षक से चर्चा करें। दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे तो बच्चे की वास्तविक समस्या सामने आएगी। बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करना अधिक जरूरी है।

साकेत बिहारी

वरीय शिक्षक, आरयूएचएस मोरामा, रजौन

अभिभावकों को बच्चों के लिए केवल उनकी जरूरतों की पूर्ति करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बच्चों को भावनात्मक रूप से भी सहयोग की जरूरत होती है। दिन में कुछ समय उनके साथ बैठकर पढ़ाई, दोस्तों और उनकी रुचियों के बारे में बातचीत करनी चाहिए। बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अभिभावकों को बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करनी चाहिए। इससे उनमें बेहतर करने की इच्छा और सकारात्मक सोच विकसित होगी।

बंजुल कुमार पांडे

प्राचार्य, एसकेपी स्कूल, बांका

बच्चों की समस्याओं को समझने के लिए उनके साथ संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी शिक्षक या अभिभावक को नहीं बताते और भीतर ही भीतर परेशान रहते हैं।इसलिए उनके साथ ऐसा व्यवहार होना चाहिए कि वे बिना किसी डर के अपनी बात कह सकें। साथ ही पढ़ाई में कमजोर बच्चे को डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझनी चाहिए। शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चे की क्षमता के अनुसार उसे आगे बढ़ने का अवसर दें, तभी उसका समुचित विकास संभव है।

डॉ. धीरज कुमार झा, शिक्षक, आर एम के स्कूल।

विद्यालय के आसपास के गांवों के साथ शिक्षकों का नियमित जुड़ाव बच्चों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।यदि शिक्षक महीने में एक बार अभिभावकों और विद्यार्थियों के साथ संवाद करें तो बच्चों की कई ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जो विद्यालय में दिखाई नहीं देतीं। इससे अभिभावकों को भी बच्चों के व्यवहार और पढ़ाई से संबंधित जरूरी जानकारी मिलेगी। ऐसे संवाद से विद्यालय और समाज के बीच संबंध मजबूत होंगे और बच्चों के विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकेगा।

आशीष कुमार, शिक्षक, आरएमके स्कूल

आज बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अनुशासन, व्यवहार, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों की जानकारी भी दी जानी चाहिए। इसके लिए शिक्षक और अभिभावक दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा। बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उनकी अपनी क्षमता को पहचानना चाहिए। हर बच्चा अलग प्रतिभा लेकर आता है। यदि उसे सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो वह बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अभिभावकों को बच्चों की प्रतिभा को समझने की जरूरत है।

पवन कुमार त्रिभुवन, प्रभारी प्रधानाध्यापक, एलएनडी प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय,बौंसी

अभिभावकों की व्यस्त दिनचर्या का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। विद्यालय से लौटने के बाद बच्चे चाहते हैं कि उनके माता-पिता उनसे बातचीत करें और उनकी बात सुनें। लेकिन पर्याप्त समय नहीं मिलने से बच्चों में अकेलेपन की भावना पैदा हो सकती है। इसलिए अभिभावकों को रोजाना कुछ समय बच्चों के लिए जरूर निकालना चाहिए। उनसे उनकी पढ़ाई, मित्रों और दिनभर की गतिविधियों के बारे में सामान्य बातचीत करनी चाहिए। इससे बच्चों के साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत होगा।

तनीषा कुमारी

शिक्षिका, भूगोल, आरएमके उच्च विद्यालय, बांका

बच्चों के व्यवहार में अचानक आने वाला बदलाव अभिभावकों और शिक्षकों के लिए संकेत हो सकता है। यदि बच्चा पहले की तुलना में अधिक चिड़चिड़ा रहने लगे, पढ़ाई से दूरी बनाने लगे या लोगों से कम बातचीत करे तो उसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए। हर बदलाव को अनुशासनहीनता मानकर डांटना उचित नहीं है। बच्चे की बात धैर्य से सुनने की जरूरत है। संवाद और समझदारी के माध्यम से ही बच्चों को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

डॉ.नीलेश कुमार, शिक्षक गणित, आरएमके उच्च विद्यालय, बांका

स्कूल संवाद जैसी पहल से शिक्षकों को अभिभावकों के विचार और समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है। अभिभावक भी बच्चे की शिक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि दोनों के बीच नियमित बातचीत होती रहे तो बच्चे की पढ़ाई और व्यवहार में होने वाले बदलावों को आसानी से समझा जा सकता है। ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होने चाहिए, ताकि विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और बच्चों को इसका लाभ मिल सके।

सौरभ गुंजन, प्राचार्य, बीडी एकेडमी, अमरपुर

बच्चों को सही दिशा देने के लिए सबसे पहले उन्हें समझना जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों पर अपनी इच्छाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और क्षमता को पहचानना चाहिए। पढ़ाई के साथ खेल, रचनात्मक गतिविधियों और अन्य प्रतिभाओं के विकास के लिए भी समय देना चाहिए। बच्चों की गलती पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए। शिक्षक भी बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने में अभिभावकों के साथ मिलकर लगातार प्रयास करें।

नीतू भारती, शिक्षिका, इतिहास, आरएमके उच्च विद्यालय, बांका

बच्चों का भविष्य तभी मजबूत होगा, जब विद्यालय और परिवार एक टीम की तरह काम करेंगे। शिक्षक बच्चों को शिक्षा देते हैं, जबकि अभिभावक उन्हें संस्कार और भावनात्मक सहयोग देते हैं। दोनों के बीच संवाद की कमी का असर बच्चों पर पड़ सकता है। इसलिए समय-समय पर अभिभावक-शिक्षक बैठक और जागरूकता संवाद होना चाहिए। बच्चों की जरूरतों को समझकर उन्हें सही मार्गदर्शन देना जरूरी है। उन्हें विश्वास दिलाना चाहिए कि उनकी बात सुनी और समझी जा रही है।

अर्चना कुमारी, शिक्षिका इंग्लिश, आरएमके उच्च विद्यालय, बांका

फोटो-5

हिन्दुस्तान संवाद में मौजूद प्राचार्य, निदेशक व शिक्षक

नाम से अर्चना कुमारी, नीतू भारती, सौरभ गुंजन, डा निलेश कुमार, तनीषा कुमारी, पवन कुमार त्रिभुवन, आशीष कुमार, डा धीरज कुमार झा, बंजूल कुमार पांडेय, साकेत बिहारी, रंगोली कुमारी, अभ्यूदय अमर, डा राकेश कुमार रंजन,

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

✦अभिभावकों को बच्चों के साथ कितना समय बिताना चाहिए?−
अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित रूप से समय बिताना चाहिए ताकि वे अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
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