जिलेभर में अमन-चैन के साथ मनाया गया बकरीद, अदा की गई नमाज़

Newswrap हिन्दुस्तान, बांका
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पेज चार की लीडपेज चार की लीड सदियों पहले पैगंबर हजरत इब्राहिम के द्वारा अल्लाह के प्रति दिखाए गए सर्वोच्च बलिदान, त्याग और अटूट समर्पण

जिलेभर में अमन-चैन के साथ मनाया गया बकरीद, अदा की गई नमाज़

बांका, नगर प्रतिनिधि। जिले में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व शनिवार को अमन-चैन, भाईचारे और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। शहर के बाबूटोला स्थित ईदगाह में मुस्लिम समुदाय के करीब 10 हजार लोगों ने एक साथ बकरीद की नमाज अदा की। सुबह से ही ईदगाह और मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी। जहाँ नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी तथा देश और समाज में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी।

कुर्बानी का महत्व

इस अवसर पर शहर के शिवाजी चौक स्थित जामा मस्जिद के इमाम हाजी मुनिरुद्दीन ने कहा कि, बकरीद सदियों पहले पैगंबर हजरत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के प्रति दिखाए गए सर्वोच्च बलिदान, त्याग और अटूट समर्पण की याद में मनाई जाती है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार एक बार अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम से उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी थी। इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल से बेहद प्रेम करते थे, लेकिन अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए वे अपने बेटे की कुर्बानी देने को भी तैयार हो गए।

कुर्बानी की परंपरा

हाजी मुनिरुद्दीन ने बताया कि, जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाने लगे, तभी अल्लाह के हुक्म से फरिश्तों ने हजरत इस्माइल को वहां से हटा दिया और उनकी जगह एक दुम्बा रख दिया। इस प्रकार हजरत इस्माइल की जान बच गई और हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति सच्ची वफादारी साबित हुई। तभी से बकरे की कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने आगे कहा कि, बकरीद केवल कुर्बानी का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, भाईचारे और गरीबों की मदद का भी संदेश देता है। इस दिन बकरे या अन्य जायज जानवर की कुर्बानी दी जाती है तथा उसके गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तथा तीसरा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। इससे अमीर और गरीब के बीच की दूरी कम होती है तथा समाज में समानता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।

सामाजिक सौहार्द

साथ ही हाजी मुनिरुद्दीन ने लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि, जब हमारे पास विकल्प मौजूद है तो छोटे जानवरों की कुर्बानी दें। गाय हमारी भी मां के समान है। सभी लोगों को कानून और आपसी भाईचारे का सम्मान करते हुए पर्व मनाना चाहिए। वहीं बकरीद को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क दिखा। शहर के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

सामान्य प्रश्न

बकरीद कब मनाई गई?
बकरीद का पर्व शनिवार को मनाया गया।

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