टैब व एमडीएम के आंकडे में हुआ अंतर तो नपेंगे प्रधानाध्यापक

Jan 17, 2026 01:30 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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हिन्दुस्तान विशेषहिन्दुस्तान विशेष जिले के सभी स्कूलों में ट्रायल मोड में शुरू हुई टैब से बच्चों की हाजिरी बांका। निज प्रतिनिधि। जिले में मध्याह्न भोजन

टैब व एमडीएम के आंकडे में हुआ अंतर तो नपेंगे प्रधानाध्यापक

बांका, निज प्रतिनिधि। जिले में मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाडे पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। इसके तहत शुक्रवार से ट्रायल बेसिस पर तीन महीने तक स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति टैबलेट के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इसके बाद इसे नियमित कर दिया जायेगा। अब यदि स्कूलों में टैबलेट पर दर्ज की गई छात्रों की उपस्थिति और एमडीएम से लाभांवित बच्चों के आंकडों में अंतर पााय गया, तो संबंधित स्कूल के प्राचार्य के साथ-साथ प्रखंड साधनसेवी पर भी कार्रवाई की जायेगी। शिक्षा विभाग के आंकडे के मुताबिक जिले में करीब दो हजार ऐसे विद्यालय हैं, जहां नियमित रूप से मध्याह्न भोजना योजना संचालित की जा रही है।

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अब शिक्षा विभाग ने स्कूलों में उपस्थिति को वास्तविक और पारदर्शी बनाने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के तहत छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की है। विभाग का साफ निर्देश है कि 16 जनवरी शुक्रवार से सभी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति केवल टैब के माध्यम से ही दर्ज की जाए। टैब पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर एमडीएम के लाभार्थियों की संख्या मानी जाएगी। ऐसे में अब स्थिति यह होगी कि जितने बच्चे विद्यालय में उपस्थित रहेंगे, उतने ही बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन की रिपोर्ट की जाएगी। यदि किसी स्कूल में टैब पर दर्ज उपस्थिति की संख्या कम है और एमडीएम का लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या अधिक पाई गई, तो इसे सीधे तौर पर गडबडी और फर्जीवाडा माना जाएगा। ऐसे मामलों में स्कूल के प्रधानाध्यापक के साथ संबंधित प्रखंड साधनसेवी की जवाबदेही तय मानी जाएगी। टैब के माध्यम से छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने का उदेश्य बच्चों के हक की रक्षा करना और सरकारी योजनाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करना है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ एमडीएम में होने वाली गडबडियों पर लगाम लगेगा, बल्कि स्कूलो में छात्रों की नियमित उपस्थिति भी बढेगी। वहीं, अभिभावकों और समाज के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकारी योजनाओं की निगरानी अब तकनीक के जरिए की जा रही है। शिक्षा विभाग की इस सख्ती से साफ है कि अब कागजों पर नहीं, बल्कि टैब और तकनीक के आधार पर ही हकीकत तय होगी। इसके लिए पूर्व में ही जिले के 2208 स्कूलों को दो-दो टैब उपलब्ध करा दिये गये हैं। इसके साथ ही शिक्षकों को भी टैब ऑपरेट करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। कहते हैं अधिकारी शिक्षा विभाग अब किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं करेगा। अब फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम से छात्रों की वास्तविक उपस्थिति सामने आएगी। टैब पर दर्ज उपस्थिति और एमडीएम लाभार्थियों की संख्या में अंतर पाए जाने पर संबंधित विद्यालय के प्रधान और प्रखंड साधनसेवी पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। राज कुमार राजू, डीपीओ, एसएसए, बांका।

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