जिला नशा मुक्ति केंद्र बदल रहा ज़िंदगियां, निःशुल्क इलाज से मिल रही नई उम्मीद
नशे की दलदल से बाहर ला रहा जिला नशा मुक्ति केंद्र, युवाओं को मिल रहा नया जीवन नशे की दलदल से बाहर ला रहा जिला नशा मुक्ति केंद्र, युवाओं को मिल रहा नया

बांका, नगर प्रतिनिधि प्रदेश में सरकार जहां एक ओर शराबबंदी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहे लोगों को नई राह दिखाने के लिए जिला नशा मुक्ति केंद्र भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। जिला मुख्यालय के बाबूटोला में स्थित यह नशा मुक्ति केंद्र समाज के उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो नशे की लत में फंसकर अपना जीवन और परिवार दोनों बर्बादी की ओर धकेल चुके हैं। यह केंद्र भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सृष्टि इंटरनेशनल को अनुदानित है। जिसका मुख्य उद्देश्य नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार और परामर्श के माध्यम से सामान्य जीवन की ओर वापस लाना है।
ज्ञात हो कि, यहां आने वाले मरीजों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज किया जाता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी बड़ी राहत मिलती है। नशा मुक्ति केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुव्यवस्थित दिनचर्या है। यहां सुबह साढ़े पांच बजे से ही मरीजों की देखभाल शुरू हो जाती है। सबसे पहले सभी को जगाकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त कराया जाता है। इसके बाद योग, प्राणायाम और हल्की एक्सरसाइज कराई जाती है, जिससे शारीरिक और मानसिक रूप से मरीजों को सशक्त बनाया जा सके। इसके बाद चाय का ब्रेक, स्नान और नाश्ते की व्यवस्था की जाती है। दिनचर्या के अगले चरण में सुबह 9:30 बजे से 11 बजे तक मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। इस दौरान विशेषज्ञ उनके मनोवैज्ञानिक पहलुओं को समझते हुए उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके बाद 11 बजे से 12 बजे तक मोटिवेशनल सेशन आयोजित किया जाता है, जिसमें जीवन के सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा की जाती है। जबकि दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक रचनात्मक गतिविधियां कराई जाती हैं, जिससे मरीजों का ध्यान नशे से हटकर सकारात्मक कार्यों में लग सके।तत्पश्चात दोपहर के भोजन के उपरांत कुछ समय के लिए विश्राम की व्यवस्था होती है। इसके बाद शाम साढ़े तीन बजे से लेकर रात दस बजे तक अलग-अलग प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इस पूरे उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया का सिलसिला लगभग एक महीने तक चलता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मार्गदर्शन में चलने वाली इस प्रक्रिया में जरूरत पड़ने पर मरीजों को दवाइयां भी दी जाती हैं। केंद्र का मूल उद्देश्य समाज में नशे के शिकार हो चुके लोगों को फिर से मुख्यधारा से जोड़ना और उनके परिवारों की खुशहाली वापस लौटाना है। खासकर युवाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र विशेष रूप से सजग है। वर्तमान समय में कई युवा सूखे नशे, विशेषकर ब्राउन शुगर की लत में फंसते जा रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। नशा मुक्ति केंद्र प्रशासन के सहयोग से उन स्थानों को भी चिन्हित कर रहा है, जहां नशे के आदी लोगों के जमावड़े लगते हैं। ऐसे हॉटस्पॉट को टारगेट कर जागरूकता और उपचार की दिशा में काम किया जा रहा है। अब तक इस केंद्र की पहल से दर्जनों लोग नशे की दलदल से बाहर निकल चुके हैं और अपने परिवार के साथ सामान्य व खुशहाल जीवन जी रहे हैं। यही वजह है कि अभी करीब दो दर्जन परिवार अपने परिजनों के इलाज के लिए यहां पहले से ही पंजीकरण करा चुके हैं। वास्तव मे 15 बेड़ों की व्यवस्था वाला यह नशा मुक्ति केंद्र जिले के सैकड़ों युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने मे महती भूमिका अदा कर रहा है।कोटयह केंद्र नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर काम कर रहा है। यहां आने वाले मरीजों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज, काउंसलिंग, योग और चिकित्सकीय देखरेख के माध्यम से किया जाता है। हमारा उद्देश्य नशे के शिकार युवाओं को स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। अब तक कई लोग उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौट चुके हैं। परिवारों का सहयोग भी इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहा है।गौरव कुमार सिंह, प्रभारी, जिला नशा मुक्ति केंद्र बांका
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