धोरैया–पुनसिया मुख्य सड़क पर गड्ढों का कहर, क्षेत्रवासियों की उम्मीदों पर फिरा पानी
बोले बांकाबोले बांका प्रस्तुति- सुमन कुमार झा धोरैया (बांका) संवाद सूत्र: धोरैया-पुनसिया मुख्य सड़क, जो बांका जिला मुख्यालय को

धोरैया (बांका), संवाद सूत्र। धोरैया-पुनसिया मुख्य सड़क, जो बांका जिला मुख्यालय को न केवल प्रखंड मुख्यालय से जोड़ती है बल्कि झारखंड राज्य को भी सीधा संपर्क प्रदान करती है, आज फिर से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। करीब दो दशक पहले जिस सड़क का हाल इतना बुरा था कि लोग पैदल चलना बस व ऑटो से यात्रा करने से बेहतर समझते थे, वही इतिहास एक बार फिर अपने पुराने रूप में लौटता दिखाई दे रहा है। लगभग पंद्रह किलोमीटर लंबी यह मुख्य सड़क कभी जीवनरेखा मानी जाती थी। वर्ष 2013 में इस सड़क का निर्माण पथ निर्माण विभाग द्वारा करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था।
इससे पहले यह सड़क ग्रामीण विकास विभाग के अधीन थी और खराब स्थिति के कारण इसका स्थानांतरण पीडब्ल्यूडी को किया गया। उस समय क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली थी। नवनिर्मित सड़क पर सुचारू यातायात शुरू हुआ, आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई और ग्रामीणों की उम्मीदें जागीं। लेकिन वह खुशी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। सड़क निर्माण के बाद उसका अनुरक्षण समयावधि समाप्त होने के साथ ही विभागीय लापरवाही और उदासीनता ने इसे एक बार फिर गर्त में धकेल दिया। वर्तमान में स्थिति यह है कि यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और यात्रियों को बस या ऑटो से सफर करना जोखिमभरा लगने लगा है। धोरैया-पुनसिया मुख्य सड़क की जर्जरता सिर्फ विभागीय उदासीनता का उदाहरण नहीं, बल्कि यह उस तंत्र की भी पोल खोलती है जो विकास की योजनाओं को कागजों में ही सीमित रख देता है। अगर समय रहते इस सड़क का कायाकल्प नहीं हुआ तो न केवल यातायात प्रभावित होगा बल्कि आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा। धोरैया-पुनसिया मार्ग की यह दुर्दशा सिर्फ स्थानीय लोगों के आवागमन को प्रभावित नहीं कर रही बल्कि लाखों की आबादी के दैनिक जीवन को भी कठिन बना रही है। यह सड़क बाजार, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने का मुख्य साधन है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे यातायात ठप हो जाता है और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। धोरैया प्रखंड के निवासी एक नागरिक ने बताया, “हमने कई बार इस सड़क की मरम्मती और पुनर्निर्माण के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विधायक और सांसद तक गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर वही हालात हैं जैसे दस-पंद्रह साल पहले हुआ करते थे।” इसी तरह स्थानीय युवा राजीव कुमार ने कहा, “इस सड़क का महत्व सिर्फ धोरैया और पुनसिया तक सीमित नहीं है। यह झारखंड से भी सीधे जुड़ती है। रोजाना हजारों लोग इस मार्ग से सफर करते हैं। परंतु वर्तमान स्थिति ने लोगों को मजबूर कर दिया है कि वे इस सड़क से गुजरने से डरने लगे हैं।” धोरैया-पुनसिया सड़क सिर्फ एक मार्ग नहीं है, बल्कि यह आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। कृषि उत्पादों की ढुलाई, छोटे व्यापारियों की आपूर्ति श्रृंखला, छात्रों का आवागमन और मरीजों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना-इन सभी गतिविधियों पर इस सड़क की स्थिति का सीधा असर पड़ता है। पुनसिया बाजार के दुकानदार विजय साह कहते हैं, “जब यह सड़क अच्छी थी तब हमारे यहां बिक्री दोगुनी होती थी। लोग आसानी से खरीदारी के लिए आते-जाते थे। अब गड्ढों से भरी सड़क के कारण ग्राहक भी कम हो गए हैं और माल लाने वाली गाड़ियां भी महंगे किराये पर चलने लगी हैं।” वर्ष 2013 में जब इस सड़क का निर्माण हुआ था, तब करीब 26 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। उस समय यह परियोजना इलाके के लिए विकास की बड़ी मिसाल मानी गई थी। लेकिन अनुरक्षण की कमी और समय पर मरम्मत नहीं होने से सड़क का डामर उखड़ने लगा और धीरे-धीरे गड्ढों ने इसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि समय पर गड्ढों की मरम्मत और सड़क पर पुन: लेयरिंग कर दी जाती तो आज यह स्थिति नहीं होती। विभागीय स्तर पर तकनीकी लापरवाही और निगरानी के अभाव ने इस सड़क को फिर से जर्जरता के दलदल में धकेल दिया है। स्थानीय लोग अब मांग कर रहे हैं कि या तो इस सड़क की तत्काल मरम्मती की जाए या इसे पूरी तरह से फिर से बनाया जाए। उनका कहना है कि यह मार्ग न केवल जिले के विकास में महत्वपूर्ण है बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड के साथ व्यापार और सामाजिक संपर्क का भी मुख्य माध्यम है। पुनसिया के एक शिक्षक, कहते हैं, “सरकार जब करोड़ों रुपये खर्च कर एक बार सड़क बना सकती है तो समय-समय पर उसकी देखरेख क्यों नहीं कर सकती? आखिर जनता कर देती है, टैक्स देती है, फिर उसे सुविधा क्यों नहीं मिल रही?” आज यह सवाल खड़ा है कि क्या धोरैया-पुनसिया सड़क एक बार फिर वैसी ही बदहाल स्थिति में चली जाएगी जैसी दो दशक पहले थी, या इस बार विभाग और जनप्रतिनिधि समय रहते सक्रिय होंगे? लोग आशा कर रहे हैं कि अभियंता प्रमुख से स्वीकृति जल्द मिले और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू हो। अन्यथा यह सड़क एक बार फिर से गड्ढों का प्रतीक बन जाएगी और इलाके की जनता को मजबूरन वही पुराने दिन देखने पड़ेंगे, जब बसों और ऑटो में सफर करने के बजाय लोग पैदल चलना ज्यादा सुरक्षित समझते थे। कहते हैं जिम्मेवार “जर्जर सड़क की सूचना अभियंता प्रमुख को पत्र के माध्यम से दी गई है। अभियंता प्रमुख से स्वीकृति मिलते ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।” संजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल बांका
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