
बांका : पदयात्रा कर मंदारगिरी पहुंचे आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज
बौंसी में कपकपाती ठंड के बीच, आचार्य श्री 108 प्रमुख सागर जी महाराज का मंडर्गिरी जी दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र में भव्य आगमन हुआ। श्रद्धालुओं ने मंगल आरती की और संतों का स्वागत किया। आचार्य ने प्रवचन में संत समाज और प्रकृति के महत्व पर जोर दिया और कहा कि देश की सुरक्षा दिगंबरत्व से संभव है।
बौंसी, निज संवाददाता। कपकपाती ठंड के बीच सम्मेद शिखर जी से पदयात्रा करते हुए राष्ट्रसंत आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के परम शिष्य, अहिंसा तीर्थ प्रणेता पूज्य दिगम्बर आचार्य श्री 108 प्रमुख सागर जी महाराज ससंघ का श्री मंदारगिरी जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र पर रविवार को भव्य मंगल आगमन हुआ। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण व्याप्त हो गया।मंदारगिरी क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने बताया कि आचार्य श्री के मंगल प्रवेश पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने मंगल आरती किया गया। भगवान वासुपूज्य जैन मंदिर के मुख्य द्वार पर महिला श्रद्धालु मस्तक पर मंगल कलश और श्रीफल धारण कर “नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु महाराज जी” के जयघोष के साथ संतों की स्वागत किया।
वहीं मंदारगिरी क्षेत्र में बौंसी थाना की पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखी। 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की तप, कैवल्य ज्ञान एवं मोक्ष स्थली मंदारगिरी जैन सिद्ध क्षेत्र पहुंचने पर आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि “संत और बसंत दोनों ही मानव जीवन में आनंद का संचार करते हैं। संत समाज में आएं तो संस्कृति जागृत होती है और बसंत आए तो प्रकृति मुस्कुराती है। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा दिगम्बरत्व की सुरक्षा से संभव है। जैसे पेड़-पौधे, वनस्पति, सूर्य और चंद्रमा दिगम्बर हैं, उन पर कोई आवरण नहीं है। यदि हम प्रकृति पर प्रदूषण का आवरण नहीं चढ़ने देंगे तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और जब पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी राष्ट्र सुरक्षित रहेगा। यात्रा में मुंगेर जैन समाज के साथ बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद थे।

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