प्रसिद्ध ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, श्रद्धालुओं को होती है परेशान

Feb 15, 2026 01:59 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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बोले बांका:बोले बांका: प्रस्तुति- विपिन कुमार सिंह अमरपुर। निज संवाददाता बांका जिले के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र ज्येष्ठगौरनाथ मं

प्रसिद्ध ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, श्रद्धालुओं को होती है परेशान

अमरपुर। निज संवाददाता बांका जिले के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ तो उमड़ती है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर परिसर में लाइट, शेड, धर्मशाला, शौचालय, पेयजल और साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होने से खासकर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु असुविधा झेलने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक महत्व के इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा सकता है, लेकिन व्यवस्थागत कमी के कारण इसकी गरिमा प्रभावित हो रही है। लाइट की व्यवस्था नहीं, शाम होते ही छा जाता है अंधेरा मंदिर परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है।

शाम ढलते ही परिसर के कई हिस्सों में अंधेरा पसर जाता है। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में कठिनाई होती है, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी यह स्थिति ठीक नहीं मानी जा रही। विशेष अवसरों और मेला के दौरान अस्थायी लाइट की व्यवस्था की जाती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। यहां सांसद मद से सोलर लाइट लगाई गई थी लेकिन यह वर्षों से बंद पड़ा है। जबकि विधायक द्वारा दिए गए एवं सीएसआर फंड से लगी सोलर लाइट पूरे परिसर को रोशनी देने में असमर्थ है। शेड और धर्मशाला के अभाव में भटकते हैं श्रद्धालु ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि सावन, महाशिवरात्रि एवं अन्य पर्व-त्योहारों में यहां हजारों की भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद परिसर में पर्याप्त शेड और धर्मशाला की व्यवस्था नहीं है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रुकने और विश्राम करने में काफी दिक्कत होती है। गर्मी तथा बारिश के मौसम में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि धर्मशाला का निर्माण हो जाए तो यहां रात्रि विश्राम की सुविधा भी मिल सकेगी। यूं तो यहां धर्मशाला बना हुआ है लेकिन उसमें रहने के लिए श्रद्धालुओं को रूपए देने पड़ते हैं। गरीब श्रद्धालु के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय की स्थिति खराब, महिलाओं को अधिक परेशानी मंदिर परिसर में शौचालय की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। जो शौचालय बने भी हैं, उनकी साफ-सफाई और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। इस कारण विशेषकर महिला श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई बार महिलाएं असहज स्थिति में इधर-उधर भटकती नजर आती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छता अभियान के बावजूद यहां की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर एवं कर्ण चिता भूमि तक पहुंच पथ जर्जर मंदिर परिसर से जुड़े अन्य धार्मिक स्थलों जैसे दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कर्ण चिता भूमि तक जाने वाला पहुंच पथ भी ठीक नहीं है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाने का रास्ता कच्चा और ऊबड़-खाबड़ होने से बुजुर्गों और बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है तो कर्ण चिता भूमि तक जाने के लिए नदी में जाना पड़ता है।बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि दोनों जगहों पर जाने के लिए पक्का मार्ग बना दिया जाए तो इन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी तथा श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ेगी। चप्पल-जूते रखने की समुचित व्यवस्था नहीं मंदिर में दर्शन के दौरान चप्पल-जूते बाहर उतारने पड़ते हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। यहां एक व्यवस्थित स्टैंड तो है लेकिन वहां टोकन व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल को लेकर चिंतित रहते हैं। भीड़ के समय जूते-चप्पल ढूंढना भी एक बड़ी समस्या बन जाती है। परिसर के बाहर फैली रहती है गंदगी मंदिर परिसर के बाहर साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। मेला या भीड़भाड़ के समय जगह-जगह कचरा जमा हो जाता है। प्लास्टिक, फूल-मालाएं और अन्य कचरे का नियमित निस्तारण नहीं होने से वातावरण प्रदूषित होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था जरूरी है। मेला परिसर में पेयजल का अभाव मंदिर परिसर में पीने के पानी की प्रयाप्त व्यवस्था है। मेला या विशेष आयोजनों के दौरान हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मेला परिसर में पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं है। अस्थायी टैंकर या हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए। शिवगंगा अधूरी, चेंजिंग रूम का अभाव मंदिर परिसर में स्थित शिवगंगा का निर्माण कार्य पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं, लेकिन उनके लिए चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं है। विशेषकर महिलाओं को कपड़े बदलने में काफी दिक्कत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चेंजिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्था हो जाए तो श्रद्धालु अधिक सुविधा महसूस करेंगे। विकास की अपार संभावनाएं स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं का मानना है कि ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है। यदि बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ कर दी जाएं, तो यह स्थल जिले ही नहीं बल्कि राज्य स्तर पर भी पहचान बना सकता है। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर की सभी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। प्रकाश, पेयजल, शौचालय, धर्मशाला, पहुंच पथ और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए, ताकि आस्था के इस केंद्र की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। बोले जिम्मेदार: अमरपुर विधानसभा क्षेत्र के ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर एवं तेलडीहा मंदिर के लिए इस बार भी सदन में चर्चा की गई है। जल्द ही दोनों जगहों के विकास की रूपरेखा तैयार हो जाएगी तथा यह पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध होगा। *जयंत राज, विधायक, अमरपुर विधानसभा क्षेत्र* कहते हैं लोग: ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर में सुविधाओं की कमी तो है लेकिन सीमित संसाधन में भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास मंदिर प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। *दुर्गा कुमार सिंह, अध्यक्ष, जेठौर मंदिर समिति* ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर समिति द्वारा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। कई कार्य प्रगति पर हैं। जिला प्रशासन का सहयोग मिले तो यहां काफी विकास हो सकता है। *बंटी सिंह, संरक्षक, जेठौर मंदिर समिति* जेठौर मंदिर में होने वाली आमदनी के हिसाब से अब तक काफी विकास हुआ है। हालांकि अभी भी कई काम बाकी है। यदि राज्य सरकार इसे पर्यटक स्थल घोषित कर दे तो यहां काफी विकास हो सकता है। *सूर्यदेव सिंह, कोषाध्यक्ष, जेठौर मंदिर समिति* ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर में अभी भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां श्रद्धालुओं के रूकने की कोई व्यवस्था नहीं है ना ही बैठने की कोई व्यवस्था है। मंदिर समिति की आमदनी सीमित है। जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। *अवधेश सिंह, उपाध्यक्ष, जेठौर मंदिर समिति* मंदिर परिसर तथा मेला परिसर में श्रद्धालु की सुविधा के लिए नगर पंचायत से पानी की व्यवस्था की जा रही है। मंदिर प्रबंधन ने इसके लिए नगर प्रशासन को आवेदन दिया है। *पंकज सिंह, सचिव, जेठौर मंदिर समिति* जेठौर मंदिर के समीप शिवगंगा का काम अधूरा पड़ा है तथा कर्ण चिता भूमि पर आने वाले लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। मैंने वहां शेड बनाने का काम शुरू किया है। लेकिन शिवगंगा एवं चेंजिंग रूम का निर्माण जरूरी है। *अशोक सिंह, जोगिया* इस वर्ष मंदिर की जमीन में मेला लगाया जा रहा है। लेकिन मेला लगने वाली जगह पर सुविधाओं का अभाव है। यहां सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। मेला में आने वाले दुकानदार एवं आम लोगों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। साथ ही सुरक्षा की व्यवस्था भी आवश्यक है। *सौरभ भदौरिया, बथनियां* जेठौर मंदिर में पिछले कुछ दिनों से सुविधाओं में वृद्धि हुई है लेकिन अभी भी श्रद्धालुओं की सेवा के लिए काफी काम बाकी है जिसे पूरा करना आवश्यक है। *रोहित झा, चिलकावर* जेठौर मंदिर में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय विधायक का प्रयास लगातार जारी है। आने वाले दिनों में मंदिर का विकास देखने को मिलेगा। यहां श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। *प्रशांत कापरी, रामचंद्रपुर* जेठौर मंदिर अपने पौराणिक महत्व को लेकर जाना जाता है। इस मंदिर का जितना विकास होना चाहिए वह नहीं हो सका है। हालांकि स्थानीय विधायक इसके लिए प्रयासरत हैं। संभावना है कि जल्द ही इसे पर्यटक स्थल घोषित किया जाएगा। *सन्नी कुमार साहा, अमरपुर* जेठौर मंदिर के विकास के लिए मंदिर प्रबंधन एवं स्थानीय लोगों द्वारा प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय विधायक एवं जिला प्रशासन से अमरपुर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। सरकारी सहयोग मिलने से इस मंदिर की भी पहचान राज्य स्तर पर होगी। *ठाकुर अंशुमान सिंह, कठैल* जेठौर मंदिर के समीप शिवगंगा का काम अधूरा पड़ा है तथा कर्ण चिता भूमि पर आने वाले लोगों के लिए कोई सुविधा नहीं है। मैंने वहां शेड बनाने का काम शुरू किया है। लेकिन शिवगंगा एवं चेंजिंग रूम का निर्माण जरूरी है। आत्मदेव सिंह फोटो 24,25 कैप्शन: अमरपुर का ज्येष्ठगौरनाथ मंदिर एवं ज्येष्ठगौरनाथ मेला परिसर में सुविधाओं का अभाव नाम से जयंत राज, ठाकुर अंशुमान सिंह, सन्नी साहा, प्रशांत कापरी, रोहित झा, सौरभ भदोरिया, अशोक सिंह, पंकज सिंह, अवधेश सिंह, सुर्यदेव सिंह, बंटी सिंह, दुर्गा कुमार सिंह, आत्मदेव सिंह

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