लंबी दूरी के सफर के लिए बांका से नहीं है कोई सीधी ट्रेन, जिलेवासियों को होती है परेशानी

Mar 01, 2026 01:18 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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बोले बांकाबोले बांका प्रस्तुति- राजदीप सिंह पर्व- त्यौहार में लोगों को सफर के दौरान झेलनी पड़ती है कई चुनौतियाँ पड़ोसी जिलों से पहले से ही

लंबी दूरी के सफर के लिए बांका से नहीं है कोई सीधी ट्रेन, जिलेवासियों को होती है परेशानी

बांका, नगर प्रतिनिधि। बिहार के बांका जिला से देश के बड़े महानगरों के लिए आज भी कोई सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं है। आलम यह है कि यहां के हजारों यात्रियों को रोज़ाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर वे लोग जो रोज़गार, शिक्षा, इलाज या व्यवसाय के सिलसिले में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई जैसे शहरों में रहते हैं, उन्हें अपने घर आने-जाने के लिए कई चरणों में यात्रा करनी पड़ती है।जबकि पर्व-त्योहार के मौसम में यह परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। चूंकि जिले से चलने वाली सबसे लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेन बांका-राजेंद्र नगर टर्मिनल इंटरसिटी एक्सप्रेस है, जो केवल पटना तक ही जाती है।राजधानी

पहुंचने के बाद यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन पकड़नी पड़ती है। वहीं दिल्ली या कोलकाता जाने वालों को कभी पटना -जमालपुर तो कभी भागलपुर या जसीडीह जैसे पड़ोसी स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इन स्टेशनो से उनलोगों को नई दिल्ली या कोलकाता के लिए ट्रेन पकड़नी पड़ती है। जबकि महानगरों में काम करने वाले लोगों का कहना है कि, बांका पहुंचने के लिए उन्हें अक्सर दो से तीन ट्रेन बदलनी पड़ती है। पहले महानगर से पटना या भागलपुर तक लंबी दूरी की ट्रेन, फिर वहां से लोकल या इंटरसिटी ट्रेन से बांका आना पड़ता है। कई बार कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाने पर यात्रियों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। फौज में कार्यरत रुपेश कुमार सिंह का कहना है कि, यदि बांका से सीधे दिल्ली या कोलकाता के लिए ट्रेन चलती, तो उन्हें बार-बार ट्रेन बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। चूंकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह यात्रा और भी थकाऊ हो जाती है। अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि, जब आसपास के जिलों को सीधी रेल सुविधा मिल सकती है, तो बांका को क्यों नहीं? जिले की बड़ी आबादी बाहर रहकर काम करती है। ऐसे में सीधी रेल सेवा की मांग वर्षों से उठती रही है। मगर आज तक सरकार या कोई मौजूदा जनप्रतिनिधि इसपर ध्यान देना उचित नहीं समझ रहे हैं।वहीं छठ, होली, दीवाली और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों के समय बांका के लोगों की परेशानी चरम पर पहुंच जाती है। इन पर्वों में बड़ी संख्या में जिले के प्रवासी मजदूर और कर्मचारी घर लौटते हैं। लेकिन सीधी ट्रेन न होने के कारण पहले उन्हें पड़ोसी जिलों तक जाना पड़ता है। वहां से चलने वाली ट्रेनें पहले से ही खचाखच भरी रहती हैं। छात्र कुमार अभिषेक का कहना है कि, जब वे भागलपुर या जमालपुर स्टेशन पहुंचते हैं, तब तक सामान्य डिब्बों में भी पैर रखने की जगह नहीं बचती।आरक्षित सीटें हफ्तों पहले ही फुल हो जाती हैं। नतीजतन कई लोग टिकट होने के बावजूद ट्रेन में चढ़ नहीं पाते और निराश होकर वापस लौट जाते हैं। बांका के यात्रियों को आज भी लंबी दूरी की यात्रा के लिए पड़ोसी जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। भागलपुर और जमालपुर से कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें दिल्ली और कोलकाता के लिए चलती हैं, लेकिन इन स्टेशनों तक पहुंचना ही एक चुनौती बन जाता है। निजी वाहनों या बसों से सफर कर पहले इन स्टेशनों तक जाना पड़ता है, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं। वहीं सीधी ट्रेन न होने का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। शहर के व्यवसाई कमलजीत पंडित का मानना है कि, इससे जिले के व्यापार और उद्योग को भी नुकसान हो रहा है। बड़े शहरों से माल लाने-ले जाने में अतिरिक्त समय और लागत लगती है। जबकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए पटना या दिल्ली जाना पड़ता है, लेकिन सीधी ट्रेन न होने से उन्हें असुविधा होती है।इसके अलावा, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। बार-बार ट्रेन बदलने की मजबूरी उनके लिए और भी कष्टदायक साबित होती है।फिलहाल स्थिति यह है कि बांका के लोग महानगरों तक पहुंचने के लिए कई चरणों में यात्रा करने को मजबूर हैं। हर त्योहार के समय यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ जाता है, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। जिलेवासियों की निगाहें अब सरकार और रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं कि कब उन्हें सीधी रेल सेवा की सौगात मिलेगी और उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी? कहते हैं जिम्मेवार बांका से विभिन्न महानगरों के लिए सीधी ट्रेन सेवा के लिए कई बार रेल मंत्रालय को लिखा गया है। इसके लिए लगातार मेरा प्रयास जारी है ताकि बांका के लोगों को ट्रेन सेवा का पूरा लाभ मिल सके। आने वाले समय में बांका में ट्रेनों के विस्तार की योजना है। गिरिधारी यादव, सांसद, बांका

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