बांका जिले में भी कई जगहों पर सप्लाय हो रहा प्रदुषित जल
पेज चार की लीडपेज चार की लीड हिन्दुस्तान पड़ताल इंदौर की घटना के बाद हर व्यक्ति के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उनके घर में

बांका, नगर प्रतिनिधि। नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर परिषद के करहरिया मोहल्ले के वार्ड संख्या 10 में नल-जल योजना के तहत आपूर्ति किया जा रहा पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते जा रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि, जलमीनार से सप्लाई होने वाला पानी अत्यधिक आयरनयुक्त है, जिससे न केवल पानी का रंग लाल-पीला दिखाई देता है, बल्कि उसमें से दुर्गंध भी आती है। मजबूरी में लोग इसी पानी को पीने और दैनिक उपयोग में लाने को विवश हैं। वार्डवासियों के अनुसार, नल से निकलने वाले पानी में अक्सर टंकी में जमा कचरा भी बाहर आ जाता है।
बाल्टी और बर्तनों में पानी भरने पर तलछट साफ दिखाई देती है। आलम यह है कि, कपड़े धोने पर उन पर लाल दाग पड़ जाते हैं। जिस कारण वार्डवासीयों में त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियों और दांतों के पीलेपन जैसी समस्याएं बढ़ते जा रही हैं। बावजूद इसके, नगर परिषद की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जलमीनार लगने के बाद से आज तक टंकी की कभी सफाई नहीं कराई गई है। जिस कारण वर्षों से टंकी के भीतर कचरा, जंग और गंदगी जमा होती जा रहा है, जिसका सीधा असर पानी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन वार्ड संख्या 10 में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। वार्डवासियों ने बताया कि आयरनयुक्त पानी की समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद के वार्ड 10 के सदस्य और संबंधित विभाग में शिकायत की गई, लेकिन आज तक पानी शुद्ध करने के लिए फिल्टर नहीं लगाया जा सका है। हर बार आश्वासन जरूर दिया गया, परंतु जमीनी स्तर पर कोई ख़ास काम नहीं हुआ है। इससे लोगों में दिनों दिन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वह दिन दूर नहीं ज़ब नगर परिषद बांका भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी घटना बांका में देखने को मिले। जहां दूषित पानी की आपूर्ति से बड़े पैमाने पर ना सिर्फ लोग बीमार पड़ गए, बल्कि एक दर्जन से भी अधिक लोग काल के गाल में समा गए। वार्डवासी अनुप दास, कपिल दास, दुभिया देवी आदि का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि पहले ही सतर्क होकर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छ जल आपूर्ति प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नल-जल योजना के तहत संचालित जलमीनारों की नियमित सफाई, पानी की गुणवत्ता की जांच और आवश्यकतानुसार फिल्टर प्लांट की स्थापना अनिवार्य है। यदि समय-समय पर टंकी की सफाई और पानी की जांच नहीं कराई गई, तो यह समस्या अन्य वार्डों में भी फैल सकती है। इस संबंध में जिम्मेदारों का कहना है कि, जलमीनार की सफाई और पानी की जांच को लेकर योजना बनाई जा रही है, साथ ही अतिशीघ्र फिल्टर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। फिलहाल नगर परिषद के वार्ड संख्या 10 के लोग स्वच्छ पेयजल के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर परिषद समय रहते इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेती है, या फिर लोग यूं ही आयरनयुक्त और दूषित पानी पीकर अस्पताल के चक्कर लगाते हैं।
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