जिले में लक्ष्य के विरूद्ध 15 फीसदी किसानों को ही मिल सका है केसीसी का लाभ
बोले बांकाबोले बांका प्रस्तुति- रवि वर्मा बैंक की लंबी कागजी प्रक्रिया में उलझा किसानों का केसीसी दस्तावेजों की कमी से अटक रहा किसानों

बांका, निज प्रतिनिधि। केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने वाले किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के तहत सरल तरीके से बैंक से ऋण दिये जाने की घोषणा की है। इसके लिए सरकार की ओर से केसीसी घर-घर अभियान भी चलाए गए। लेकिन किसानों को केसीसी लेने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड रहा है। बैंक केसीसी के लिए किसानों से ऑनलाइन भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र देने की बात कह रहे हैं। जिससे छोटे व सीमांत किसानों को केसीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना को केसीसी से लिंक कर दिया है, ताकि पीएम किसान योजना के रिकॉर्ड पर ही किसान को केसीसी का लाभ मिल सके।
वहीं, किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को दो लाख तक का ऋण बिना किसी गारंटी एवं तीन लाख रूपये तक का कर्ज चार फीसदी ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का प्रावधान लागू किया गया है। जो एक जनवरी 2025 से ही प्रभावी है। यह सुविधा खेती, पशुपालन और मछली पालन के लिए दी गई है। जिसका उदेश्य किसानों को साहूकारों से मुक्ति और आसान ऋण उपलब्ध कराना है। लेकिन जिले में किसान क्रेडिट कार्ड योजना की सार्थकता सिद्ध नहीं हो पा रही है। आलम तो ये है कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लक्ष्य के विरूद्ध महज 15 फीसदी किसानों को ही केसीसी का लाभ मिल सका है। स्टेट लेवल कमिटि बिहार की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में यहां 40 हजार 87 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड एवं किसान क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण किया जाना था। जिसमें अब तक महज 6 हजार 63 किसानों को ही केसीसी व नवीनीकरण का लाभ मिल सका है। इसमें यहां 12 हजार 367 किसानों को केसीसी का लाभ दिये जाने का लक्ष्य तय किया गया है। जिसमें अब तक महज 1863 किसानों को ही केसीसी का लाभ मिल सका है। इसके अलावे पूर्व में केसीसी का लाभ लेने वाले 27 हजार 720 लाभार्थियों का नवीनीकरण किया जाना है। जिसमें महज 4200 लाभार्थी का ही केसीसी नवीनीकरण हो सका है। वहीं बैंक अक्सर केसीसी लोन देने में देरी कर रहे हैं या फिर इनकार कर देते हैं। इसको लेकर बैंकर्स की बैठक में जिला प्रशासन की ओर से किसानों को केसीसी का लाभ देने में तेजी लाने के निर्देश दिये जा रहे हैं, बावजूद इसके क्षेत्र के किसानों को केसीसी का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जमीन के कागजात, खतौनी और अन्य दस्तावेजों को लेकर लंबी कागजी कार्रवाई होती है। ऐसे में अपूर्ण दस्तावेज की वजह से भी किसानों को केसीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। केसीसी का लाभ लेने के लिए कई किसान अंचल कार्यालय से मेनुअल एलपीसी (भूमि प्रमाण पत्र) बनवाया है। लेकिन अब बैंक की ओर से किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लिए ऑनलाइन भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। जबकि किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 50 हजार तक के ऋण के लिए भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बैंकों की मनमानी की वजह से क्षेत्र के छोट-छोटे किसान केसीसी योजना से वंचित हो रहे हैं। बोले जिम्मेदार जिले के बैंकों में अभी पूर्व में केसीसी का लाभ लेने वाले किसानों से ऋण की वसूली की जा रही है। जिससे उसका नवीनीकरण किया जा सके। इसके साथ ही बैंकों में केसीसी से जुडे कार्यों का अपडेशन करने के साथ ही किसानों को केसीसी का लाभ भी दिया जा रहा है। वहीं, क्षेत्र के किसान एवं किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को बैंक की जो भी प्रक्रिया है उसे पूरा करना होगा। केसीसी के लिए अन्य दस्तावेजों के साथ ही ऑनलाइन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। उसके बिना किसानों को केसीसी का लाभ नहीं मिल सकता है। रंजन कुमार, एलडीएम, बांका। जिले के प्रखंडों में कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार एवं एटीएम व बीटीएम किसानों से संपर्क कर केसीसी के लिए आवेदन सृजित करते हैं। इन आवेदनों को प्रखंड कृषि पदाधिकारी की ओर से केसीसी के लिए संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाता है। जिससे किसानों को सहज तरीके से केसीसी ऋण की सुविधा मिल सके। इसके अलावे कृषि विभाग की ओर से केसीसी का लाभ लेने के लिए किसानों को जागरूक किए जाने के साथ ही इसकी प्रक्रिया से भी अवगत कराया जा रहा है। त्रिपुरारी शर्मा, डीएओ, बांका।

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