केरल के बाद अब बांका बनेगा तिलापिया मछली उत्पादन का हब
पेज वन या पेज तीन की लीडपेज वन या पेज तीन की लीड हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव जिले में तिलापिया मछली प्रोडक्शन व प्रोसेसिंग प्लांट की होगी स्थापना जिले के ज

बांका, निज प्रतिनिधि। केरल के बाद अब बिहार में भी तिलापिया मछली का उत्पादन किया जायेगा। जिसे एक्वेटिक चिकन भी कहा जाता है। जो बांका जिले के जलाशयों व तालाबों में भी आकार लेगा। तिलापिया मछली अपनी उत्पादन क्षमता के कारण आमदनी का बेहतर विकल्प है। मत्स्यपालाकों के बीच इसे प्रचलित करने के लिए पहली बार इसपर पर प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए सूबे में जल संसाधनों से अच्छादित जिलों में मत्स्य विभाग तिलापिया मछली की हैचरी, प्रोड्क्शन व प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करेगा। बिहार में सबसे अधिक 10 जलाशय बांका जिले में हैं। जिसका जल क्षेत्र 50 हजार हेक्टेयर है।
यहां 20 एकड भूमि में तिलापिया मछली की हैचरी, प्रोड्क्शन व प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किये जाएंगे। जहां मछली का उत्पादन व बीज तैयार करने के साथ ही उसका उत्पाद भी तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से जिले में जमीन की तलाश की जा रही है। तिलापिया जेनेटिक इम्प्रूफ फार्मिंग (मोनो सेक्स) है। जो प्रजनन नहीं करती है। इस मछली की उर्जा प्रजनन में खर्च न होकर बायोमास में कनवर्ट हो जाता है। जिससे इसकी ग्रोथ रेट हाई होती है। मछली की यह प्रजाति केरल में बेहतर मानी जाती है। इसकी पौष्टिकता और स्वाद को ध्यान में रखकर यहां के मत्स्यपालकों तक इसे पहुंचाने की योजना है। जिले में जलाशयों के अलावे तीन हजार हेक्टेयर भूमि में तालाब हैं। जिससे यहां तिलापिया मछली के उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। जिसको देखते हुए यहां प्रोड्क्शन व प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना करने के साथ ही किसानों की आय बढाने के लिए मत्स्य विभाग पहली बार शत प्रतिशत अनुदान पर तिलापिया मछली का बीज देने का निर्णय लिया है। इसका मकसद कम लागत में किसानों को ज्यादा मुनाफा देना और अन्य राज्यों से आने वाली मछलियों पर निर्भरता खत्म करना है। इसके लिए मत्स्य पालकों से सहमति लेकर सूची बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों को प्रति एकड तालाब के लिए 8 हजार तिलापिया मछली के बीज मुफ्त में दिये जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि जिले में कम से कम 250 टन तिलापिया का उत्पादन हो। फिलवक्त सूबे की मंडियों में यह मछली दूसरे प्रदेशों से मंगाई जाती है, जिससे किसानों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां तिलापिया मछली का उत्पादन होने से दूसरे प्रदेशों पर निर्भरता भी कम होगी। एक मत्स्यपालक एक एकड में सालाना तीन लाख रूपये का मुनाफा ले सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मादा तिलापिया मछली का ही पालन होता है। ऐसे में मत्स्यपालाकें को इनके प्रजनन की समस्या नहीं रहती है। अभी बिहार के समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर एवं पूर्वी व पश्चिम चंपारण के चयनित प्रगतिशील मत्स्यपालक तालाब में तिलापिया मछली का पालन कर रहे हैं। लेकिन बांका जिले में मत्स्य विभाग की ओर से बडे पैमाने पर तिलापिया मछली के उत्पादन व अन्य प्रांतों में उसके निर्यात की योजना है। तिलापिया मछली पालन का सबसे बडा आकर्षण इसकी तेज ग्रोथ है। यह मात्र छह महीने में 800 ग्राम से एक किलो तक की हो जाती है। अच्छी यह भी कि इस मछली में बीमारियां न के बारबर होती है और यह सर्वाहारी है। जो तालाब में मौजूद प्राकृतिक चारा या कुछ भी खाकर यह आसानी से बढ जाती है, जिससे दाने (फीड) का खर्च काफी कम हो जाता है। तिलायिा मछली सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद गुणकारी है। तिलापिया का सेवन अस्थमा (दमा) के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। इसके नियमित सेवन से श्वसन तंत्र को मजबूती मिलती है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटिन और कैलोरी कम होती है, जो वजन कम करने और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। तिलापिया मछली मत्स्य पालकों व किसानों के लिए भी फायदेमंद है। तिलापिया मछली कम ऑक्सीजन और हल्के गंदे पानी में भी आसानी से जीवित रह सकती है। यह 6 महीने में तैयार हो जाती है, इसलिए किसान एक साल में एक ही तालाब से दो बार इसकी उपज ले सकते हैं। जबकि, रेहु व कतला को एक किलो तक होने में डेढ से दो साल लग जाते हैं। तिलापिया मछली में बीमारी नहीं लगने और बाजार में इसकी अच्छी मांग होने की वजह से इसमें नुकसान का जोखिम बेहत दक रहता है। कहते हैं अधिकारी अब केरल की तर्ज पर बांका जिले में भी तिलापिया मछली का उत्पादन व उसका उत्पाद तैयार किया जायेगा। इसके लिए 20 एकड भूमि में फार्मिंग, प्रोड्क्शन व प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किये जाएंगे। इसके अलावे मत्स्य पालाकों को भी तिलापिया के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके लिए चयनित मत्स्यपालकों को मुफ्त में बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। जिले के किसानों से सहमति लेकर सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही बीज का वितरण किया जाएगा। मनोज कुमार, डीएफओ, बांका।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


