जिले के सरकारी विद्यालयों में होगा माता समूह का गठन
हिन्दुस्तान विशेषहिन्दुस्तान विशेष सरकारी विद्यालयों में बढेगी माताओं की सक्रिय भागीदारी तेलंगाना की तर्ज पर केंद्रीकृत डैशबोर्ड किया जाएगा विकसित

बांका, निज प्रतिनिधि। सूबे के सरकारी स्कूलों में अब माताओं की सक्रिय भागीदारी बढाने की कवायद शुरू कर दी गई है। बांका जिला सहित बिहार के सभी जिलों के स्कूलों में माता समूह का गठन किया जाएगा, जो बच्चों की नियमित उपस्थिति, पढाई की गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यालय की गतिविधियों पर नजर रखेगा। बच्चों की उपस्थिति से लेकर उनकी पढाई समेत अन्य गतिविधियों की निगरानी भी माता समूह से कराई जाएगी। शिक्षा विभाग नई व्यवस्था के जरिए स्कूल और अभिभावकों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में कदम बढा रहा है। अब नई पहल के तहत माता समूह की बैठक प्रत्येक माह आयोजित होगी। माता समूह द्वारा दिए गए सुझावों और फीडबैक के आधार पर विद्यालयों में सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि माताओं की भागीदारी से बच्चों की पढाई और स्कूल से जुडाव दोनो बेहतर होंगे। शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार सरकारी स्कूलों में अभिभावक - शिक्षक एसोसिएशन का गठन एवं विद्या समीक्षा केंद्र भी बनाए जाएंगे। साथ ही विद्यालयों में मेंटर की व्यवस्था लागू होगी, जो बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी करेंगे। बच्चों के वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों की रैंकिंग तय करने की तैयारी भी चल रही है। महाराष्ट्र, तेलंगाना समेत पांच राज्यों में भेजे गए अध्ययन दल के सुझाव सूबे के स्कूलों में लागू करने की तैयारी है। सुझाव लागू करने के लिए मुख्यालय स्तर पर वर्किंग ग्रुप बनाया जा रहा है। सूबे से पांच अलग-अलग राज्यों में अध्ययन दल भेजे गए थे। इन दलों से उन राज्यों में शिक्षण व्यवस्था में किए गए बदलाव के आधार पर सुझाव लिया गया। पांच अलग-अलग राज्यों में गई टीम ने विभिन्न बिन्दुओं को रखा, जिस पर अमल करने की तैयारी की जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत माता समूह
माता समूह केवल शिक्षकों से ही नहीं, बल्कि समुदाय और स्थानीय लोगों के साथ भी नियमित बैठक करेगा। पूर्ववर्ती छात्रों का समूह बनाकर विद्यालयों के लिए संसाधन जुटाने पर भी जोर दिया जाएगा। वहीं, कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की अर्द्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा के सभी विषयों के अंक ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि बच्चों की प्रगति की डिजिटल निगरानी की जा सके। अध्ययन दल दो सप्ताह के अंदर इन सभी पर नीति निर्धारण कर प्रारूप उपलब्ध कराएंगे। तेलंगाना की तर्ज पर केंद्रीकृत डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे विभिन्न योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग और समीक्षा संभव हो सके।
कहते हैं अधिकारी
अधिकारियों का कहना
जिले के विद्यालयों में समुदाय और अभिभावकों की सहभागिता बढाने के लिए शिक्षा विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। स्कूलों में माता समूह के गठन से बच्चों की उपस्थिति, पढाई और विद्यालय के माहौल में सकारात्मक बदलाव आएगा। विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था लागू की जाएगी।
राज कुमार राजू, डीपीओ, एसएसए, बांका।
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