10 करोड़ से अधिक की योजनाओं को लेकर नए नियमों से बढ़ सकती है प्रक्रिया की जटिलता
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को सख्त निर्देश,बांका नगर परिषद की योजनाओं पर भी पड़ेगा असरटेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को सख्त निर्देश,बां

बांका, निज संवाददाता। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने निविदा प्रक्रिया में हो रही विसंगतियों और अनियमितताओं को दूर करने के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया है। विभाग के अभियंता प्रमुख सह विशेष सचिव विनोद कुमार द्वारा जारी पत्र सभी नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों को प्रेषित किया गया है। इस निर्देश के तहत स्पष्ट किया गया है कि मॉडल निविदा अभिलेख (एनआईटी) और स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट (एसबीडी) में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। साथ ही,निविदा प्रकाशन के बाद किसी भी प्रकार के बदलाव या अवधि विस्तार के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य होगी।
नए आदेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि निविदा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। निविदाकारों से किसी भी प्रकार का हार्डकॉपी दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी भुगतान भी ऑनलाइन या ई-बैंक गारंटी के माध्यम से ही होंगे। जाली दस्तावेज पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया है। इस आदेश का असर बांका नगर परिषद पर भी पड़ सकता है,जहां हाल ही में 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न वार्डों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए टेंडर जारी किया गया है। विभागीय कार्य बंद होने के बाद अब सभी योजनाएं टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही कराई जानी हैं,ऐसे में यह नया दिशा-निर्देश सीधे तौर पर इन योजनाओं की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। हालांकि,आदेश के कुछ बिंदुओं को लेकर व्यवहारिक कठिनाइयों की आशंका भी जताई जा रही है। विशेष रूप से अल्पकालीन निविदा प्रकाशित करने के लिए संबंधित अधीक्षण अभियंता की अनुमति अनिवार्य करने का प्रावधान स्थानीय स्तर पर अव्यावहारिक माना जा रहा है। बांका सहित भागलपुर प्रमंडल में अधीक्षण अभियंता का स्थायी कार्यालय नहीं है और सुपौल स्थित अभियंता ही कई जिलों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसी स्थिति में त्वरित आवश्यकताओं के लिए अल्पकालीन निविदा जारी कर पाना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए निर्धारित समय-सीमा (करीब 90 दिनों में एलओए जारी करने तक) को भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जमीनी स्तर पर फाइलों के निष्पादन में अक्सर अधिक समय लगता है। कुल मिलाकर, विभाग का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कुछ प्रावधानों में लचीलापन नहीं होने पर विकास कार्यों की गति प्रभावित होने या अवरुद्ध होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।कहते हैं अधिकारीनगर क्षेत्र में विभागीय काम बंद किए जाने के बाद विकास कार्य की योजनाओं का टेंडर प्रक्रिया के जरिए होना तय है,ऐसे में विभाग को भी नए नियम निकालने से पुर्व धरातल की वस्तुस्थित से अवगत होना अनिवार्य है। नया नियम विकास कार्य की योजनाओं के रफ्तार पर ब्रेकर नहीं बने,इसका ध्यान विभाग के वरीय अधिकारियों को रखना चाहिए और जमीनी हकीकत से रूबरू होकर ही कोई आदेश पारित करना चाहिए। आयेदिन होने वाले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी वरीय अधिकारियों द्वारा कोई आदेश जारी करने से पहले हरेक जिले से जुड़ी जानकारियां सभी पहलुओं पर लेनी चाहिए।बालमुकुंद सिंहा, (चेयरमैन) बांका नगर परिषद
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