
विभाग की अनदेखी से विद्यालय का जर्जर भवन बना खतरा, शहर के मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर ले रहे शिक्षा
संक्षेप: पेज तीन की लीडपेज तीन की लीड हाल आदर्श ललित गिरिश्वर मध्य विद्यालय बांका का 379 बच्चों को विद्यालय के कुल 12 शिक्षको से मिल रही है
बांका, नगर प्रतिनिधि-: नन्हें मुन्हे बच्चे तेरी मुट्ठी मे क्या है?मुट्ठी में है तकदीर हमारा। " 1953 में आई फ़िल्म बूट पॉलिश का यह मशहूर गाना कहीं विभाग की अनदेखी के कारण विद्यालय भवन के मलबे ना दबकर रह जाय। प्रस्तुत तस्वीरें शहर के पुराने विद्यालयों में से एक आदर्श ललित गिरिश्वर मध्य विद्यालय, बांका की है। जहां विद्यालय प्रशासन को मज़बूरी में विद्यालय के रसोई घर में क्लास रूम को शिफ्ट करना पड़ा है। साथ ही कुल आठ कक्षाओं की पढ़ाई विद्यालय के केवल 6 क्लास रूम में करवानी पड़ रही है। हालांकि विभाग के द्वारा विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों के लिए पर्याप्त शिक्षकों की बहाली जरूर कर दी गई है।

जिससे बच्चों को गुणवत्तपूर्ण शिक्षा मिल सके। वहीं बच्चों के लिए मिड डे मील के जरिये गुणवत्तापूर्ण भोजन भी मिल रहे हैं। मगर इन सभी प्रबंधों के बीच भी विद्यालय प्रशासन मजबूरी में ना केवल बच्चों को डेस्क बेंच की अनुपलब्धता के कारण ज़मीन पर दरी बिछाकर बैठाते हैं बल्कि प्रतिदिन अवकाश के उपरांत भगवान को भी शुक्रिया अदा करते है। चूंकि विद्यालय के 379 नामांकित छात्र छात्राओं के अलावे 12 शिक्षकों की ज़िन्दगी भी प्रतिदिन बच जाती है। दरअसल विद्यालय भवन पुराना होने के साथ साथ काफी जर्जर भी हो चुका। हालांकि विद्यालय प्रशासन के द्वारा कई दफा विभाग को चिट्ठी भेजकर विद्यालय की हालत से अवगत कराया गया है। मगर विभाग के कानों में जो तक नहीं रेंग रहा है, जिससे भूकंप जैसी स्थिति में अनहोनी की आशंका लगातार बढ़ते ही जा रही है। यहां मजे की बात तों यह भी है कि, 1971 में इस विद्यालय को 20 डिसीमल ज़मीन उपलब्ध कराई गई थी। मगर मौजूदा समय में वस्तुस्थिति यह है कि, विद्यालय केवल 7.5 डिसीमल ज़मीन का ही उपयोग कर पा रहा है। जबकि बाकी के 12.5 डिसीमल ज़मीन कहाँ है यह विभाग को भी पता नहीं लग सका है। जिले के सबसे पुराने विद्यालय का ज़मीन के कमी के कारण आज जर्जर भवन में संचालित होना शर्मनाक बात है। जबकि उसी विद्यालय का अपना 12.5 डिसीमल ज़मीन अतिक्रमण का शिकार हो चुका है। शिक्षा विभाग की यह लापरवाही विभाग के सामने कई प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिये हैं। यदि विभाग निष्पक्ष होकर जांच कराये तो विद्यालय की दशा व दिशा दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है। शिक्षा के अधिकार की बातें करने वाला तंत्र जब जमीनी हकीकत से आंखें मूंद लेता है, तो सवाल उठना लाजिमी भी है कि आखिर इन बच्चों का भविष्य किस ओर जा रहा है? दीवारों से झड़ता प्लास्टर, टूटे फर्श, टपकती छतें और फर्नीचर की कमी विद्यालय को भीतर से पूरी तरह से खोखला कर चुकी हैं जबकि विद्यालय के बच्चों में अनुशासन यह दर्शाता है की आज भी वो इस उम्मीद में हैं कि विद्यालय की स्थिति एक दिन बेहतर होगा। हालांकि सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये खर्च करती है ताकि सूबे में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त रहे। मगर इस प्रकार की अनदेखी से हमारे समाज के भविष्य केवल अंधकार की ओर ही अग्रसर रहेगा। जनवरी 2020 में विभाग द्वारा निर्गत 1 लाख 84 हजार 320 रूपये की राशि से हुई थी भवन की हुई थी मरम्मती ज़ब विद्यालय प्रशासन के द्वारा विभाग को पत्र के माध्यम से विद्यालय के जर्जर भवन की स्थिति से अवगत कराया गया था तब विभाग विद्यालय को 1 लाख 84 हजार 320 रूपये की राशि आवंटित की थी। साथ ही विभाग ने विद्यालय प्रशासन को यह निर्देश दिया था कि, आवंटित राशि से केवल अति आवश्यक स्थिति को दुरुस्त किया जाय। जिसके बाद विद्यालय प्रशासन ने किसी तरह दीवारों में आये दरारों व विद्यालय के कमजोर छत की मरम्मती कराई थी। मगर पर्याप्त राशि नहीं होने के वजह से विद्यालय भवन खोखला रह गया। जबकि आज भी विद्यालय के छत से खूब पानी टपकता है। साथ ही दीवारो से पानी रिसाव होने के कारण दीवारों के प्लास्टर कई जगहों से झड़ रहा है। दीवारों में दरारें, छत से टपकता पानी आदर्श ललित गिरिश्वर माध्य विद्यालय, बांका की स्थिति किसी खंडहर से कम नहीं है। भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। जबकि बरसात के दिनों में छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे बच्चों को क्लासरूम के किसी कोने में बैठाना पड़ता है। वहीं कई जगहों पर फर्श उखड़ चुका है और जबकि फर्नीचर के आभाव में विद्यालय के बच्चों को ज़मीन पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है। साथ ही क्लासरूम की जर्जर स्थिति के कारण बच्चे विद्यालय के रसोईघर में पढ़ने को विवाश हैं। बच्चों के साथ साथ शिक्षकों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा वैसे ति आजकल सरकार विद्यालय भवन की नींव इतने मजबूत बनवाते हैं कि, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे की ज़िन्दगी खतरे में ना जाय। मगर आदर्श ललित गिरिश्वर माध्य विद्यालय, बांका में पढ़ाई कर रहे बच्चों के साथ किसी भी दिन अनहोनी होना तय है। केवल कल्पना करने से ही लोगों का रूह काँप जाएगा ज़ब किसी दिन हमारा जिला भूकंप का हल्का झटका ही महसूस करेगा तो इस विद्यालय के जर्जर भवन की क्या दशा होगी? विद्यालय के कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें हर रोज अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय डर लगा रहता है। कहीं छत का कोई हिस्सा गिर न जाए या दीवार ढह न जाए। वहीं विद्यालय के शिक्षकों के सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराते रहते हैं। शिक्षा का अधिकार केवल कागज़ों पर सीमित देशभर में “सर्व शिक्षा अभियान” और जैसी योजनाओं का दावा तो किया जाता है, लेकिन वास्तविकता बिल्कुल विपरीत है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब और निम्न वर्ग से आते हैं, जिनके पास निजी स्कूलों में पढ़ने का विकल्प नहीं होता। ऐसे में जब सरकारी विद्यालय ही असुरक्षित हो जाएं, तो यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार का खुला उल्लंघन है। विद्यालय के शिक्षक तो पूरी निष्ठा से पढ़ाने की कोशिश करते हैं, पर जब भवन ही खतरे में हो तो शायद उनका भी मनोबल टूट जाता होगा। ऊपर से विभागीय लापरवाही ने स्थिति को दिन ब दिन बद से बदतर कर दिया है। क्या कहते हैं प्राध्यापक? दो समस्या विद्यालय के साथ है पहला विद्यालय का जर्जर भवन और दूसरा विद्यालय का गयाब हुआ ज़मीन। 2020 में विभाग द्वारा विद्यालय को 1 लाख 84 हजार 320 रूपये की राशि आवंटित की थी। जिससे हमने भवन के अत्यधिक क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया। बच्चे भय के माहौल में पढ़ाई करते हैं, परंतु मजबूरी में हमें यही भवन उपयोग करना पड़ता है। मनोज पंडित प्राध्यापक, आदर्श ललित गिरिश्वर मध्य विद्यालय

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