Hindi NewsBihar NewsBanka NewsBanka District to Host Grand Kali Puja Festival at Tara Mandir from October 20

तारा मंदिर प्रांगण में 3 दिनों तक रहेगा मेला, भव्य महाआरती देखने जुटते हैं जिलेवासी

संक्षेप: बांका, नगर प्रतिनिधि - बांका, नगर प्रतिनिधि - धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम एक बार फिर से बांका जिले के सुप्रसिद्ध तारा मंदिर

Wed, 15 Oct 2025 02:04 AMNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
share Share
Follow Us on
तारा मंदिर प्रांगण में 3 दिनों तक रहेगा मेला, भव्य महाआरती देखने जुटते हैं जिलेवासी

बांका, नगर प्रतिनिधि। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम एक बार फिर से बांका जिले के सुप्रसिद्ध तारा मंदिर प्रांगण में देखने को काली पूजा में मिलने वाला है। जहाँ तीन दिवसीय वार्षिक मेले की शुरुआत धूमधाम से काली पूजा के उपलक्ष्य पर आगामी 20 अक्टूबर से शुरु होने वाली है। प्रत्येक वर्ष मां तारा के पावन चरणों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। जबकि मेले में भव्य महाआरती हर वर्ष जिलेवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती है। तीन दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में जिलेभर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचे हैं।

8 0के दशक में स्थापित तारा मंदिर में मां काली की आराधना 1996 से आरम्भ हुई है। तब से जिला स्तर पर यहां भव्य मेला का आयोजन प्रत्येक वर्ष होते आ रहा है। वैसे तो हर वर्ष यहां की पूजा अर्चना में कुछ ना कुछ विशेष होता है, इस वर्ष भी कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि को बनारस के पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की जायेगी। वहीं मंदिर प्रांगण को आकर्षक ढंग से फूलों, तोरण द्वारों और रंग-बिरंगे झंडों व विशेष लाइटों से सजाया जाएगा। जबकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मंदिर प्रशासन के द्वारा विशेष प्रबंध भी की जा रही है। 21 अक्टूबर को मंदिर प्रांगण में आयोजित होने वाली भव्य महाआरती श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होने वाली है। साथ ही इस दिन हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु दीप जलाकर महाआरती में भाग लेते हैं। साथ ही मंदिर की घंटियों की आवाज़, शंखनाद और भजन-कीर्तन के मधुर स्वर मिलकर वातावरण को अत्यंत दिव्य और अलौकिक बन जाता है।जबकि आरती के दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए साज-सज्जा वाले दीपों से वातावरण रोशन हो जाता है।जहाँ पुजारी विशेष वेशभूषा में मां तारा की आराधना करते हैं। वहीं ‘जय माता दी, 'जय काली जय जय काली'के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंजा उठता है। मेले के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा संयुक्त रूप से पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपूर्ण परिसर को रखा गया है। जबकि महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष महिला पुलिस बल की तैनाती की गई है। वहीं नगर परिषद बांका के द्वारा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जबकि मेला समिति के सदस्यों के द्वारा लगातार सफाई अभियान में सहयोग कर रही हैं। यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक बन गया है। हर साल की भांति इस वर्ष भी लोगों में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर समिति के अनुसार, इस बार केवल महाआरती में करीब दस हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजू यादव ने बताया कि, मेला को सफल बनाने के लिए समाज के युवा व बुद्धिजीवी वर्ग प्रतिदिन अपना अपना सुझाव दे रहे हैं। साथ ही कई लोगों में श्रमदान कर माता के प्रति समर्पण भाव भी देखा जा रहा है। जो कि वास्तव मे अद्भुत है। बांका के स्थानीय निवासियों के लिए यह मेला सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गौरव का अवसर है। हर साल यह आयोजन जिले को एक नई पहचान दिलाता है। ग्रामीणों से लेकर शहरी नागरिकों तक, हर कोई इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाते हैं। तारा मंदिर परिसर में यह मेला एक ऐसा आयोजन है जहाँ श्रद्धा, संस्कृति और समाज तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। माँ काली की महिमा से जुड़े इस आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया है, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और व्यापार को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन जिलेवासियों के लिए गर्व और श्रद्धा का पर्व बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में और भी भव्यता के साथ आयोजित होगा। जिले में तारा मंदिर अपने शुद्ध व निर्मल पानी के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। जहां प्रतिदिन जिलामुख्यालय के सैंकड़ो लोग पेय जल के लिए चापाकल से पानी डब्बे में भर के घर ले जाते हैं। साथ ही लोग इस निर्मल जल को माता का आशीर्वाद मानते हैं। प्रति दिन यहां सुबह 5 बजे से ही डब्बे में पानी भरने के लिए कतारबद्ध खड़े हो जाते हैं जो कि दिनभर जारी रहता है।