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बांकाकोरोना का लहर कम होते हो परदेस की ओर रुख कर रहे प्रवासी

हिन्दुस्तान टीम,बांकाPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 05:31 AM
कोरोना का लहर कम होते हो परदेस की ओर रुख कर रहे प्रवासी

बांका। निज प्रतिनिधि

कोरोना काल ने कइयों के हाथ से रोजगार छिन लिये हैं। लोग आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे है। उसे संक्रमण का खतरा और रोज़गार की चिंता सता रही है। जिले में पहले दौर के बाद दूसरे कोरोना काल में भी अन्य प्रांतों में रोजगार कर रहे कामगार वापस अपने घर लौटे हैं। हालांकि, इसबार देशव्यापी लॉकडाउन नहीं लगने से घर वापसी करने वाले प्रवासियों की संख्या पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम है। लेकिन फिर भी यहां करीब 10 हजार प्रवासियों के लौटने का अनुमान है। इसबार प्रवासियों के आने के लिए स्पेशल ट्रेन की सुविधा नहीं रहने से अधिकांश कामगार अपनी व्यवस्था से वापस लौटे हैं। जिससे आपदा प्रबंधन और श्रम विभाग के पास भी इसका सही आंकड़ा नही है। वहीं, क्षेत्र में रोजगार नहीं मिलने से अब कोरोना लहर में कमी आते ही कामगार और मजदूर फिर से रोजगार की तलाश में परदेश की ओर पलायन करने लगे हैं।

रोजी-रोटी की जुगत में परदेश जाना मजबूरी :

कोरोना काल मे वापस अपने घर लौटे प्रवासी कामगार बौंसी के गौरव कुमार ने बताया कि वे सूरत में रहकर बिजली का काम करते थे। लेकिन पिछले साल कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से कोलकाता में रहने लगे। लेकिन इसबार भी कोरोना की दूसरी लहर की वजह से घर लौटे हैं। लेकिन अपने क्षेत्र में रोजगार नहीं मिलने से परदेस जाना उसकी मजबूरी है। बाराहाट के प्रीतम राउत ने बताया कि वे दिल्ली में एक फैक्टरी में काम करते थे। जो कोरोना काल मे वापस आए थे।अब संक्रमण का लहर कम होने से वे फिर से परदेस जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन लोगों को क्षेत्र में रोजगार नहीं मिलने से रोजी-रोटी की जुगत में परदेस जाना उसकी मजबूरी है।

मनरेगा में भी नहीं मिल रहा काम :

परदेश से वापस लौटे मजदूरों को अपने ही क्षेत्र में मनरेगा योजना से रोजगार उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा भी अकुशल श्रमिकों का कौशल विकास कर उसे रोजगार उपलब्ध कराना है। लेकिन जमीनी हकीकत तो ये है कि यहां वापस आए प्रवासियों को मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा है। जबकि इसके लिए कई प्रवासियों ने अपने संबंधित मनरेगा कार्यालय में अपनी रिपोर्ट भी की है।

कोट...

इसबार जिले में लंबी दूरी के व स्पेशल ट्रेन नहीं चलने से प्रवासियों के आने की संख्या कम है। विभाग के आकड़ों के मुताबिक कोरोना 2.0 में महज दो हजार प्रवासी ही लौटे हैं। जिन्हें रोजगार से जोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है।

नवल किशोर यादव, प्रभारी पदाधिकारी सह कोषागार पदादिकारी, आपदा प्रबंधन अभिकरण विभाग।

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