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बांका में 10 माह में 400 शिशुओं की हुई मौत

पेज तीन की लीडपेज तीन की लीड हिन्दुस्तान विशेष 50 शिशु नवंबर माह में इलाज के लिए एसएनसीयू में किये गये भर्ती जन्म के बाद से शिशुओं...

बांका में 10 माह में 400 शिशुओं की हुई मौत
हिन्दुस्तान टीम,बांकाMon, 27 Nov 2023 07:00 PM
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बांका। निज प्रतिनिधि
सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी शिशु मृत्यु दर की रफ्तार नहीं थम रही है। हालांकि, पिछले तीन साल में यहां मृत्यु दर के ग्राफ में थोडी कमी आई है। जबकि यहां शिशु मृत्यु कर को कम करने के लिए सरकार की ओर से कई तरह के कार्यक्रम व अभियान चलाए जा रहे हैं। इस साल अब तक जिले में करीब 400 शिशुओं की मौत हो चुकी है। वहीं, बांका सदर अस्पताल के एसएनसीयू में महज नवंबर माह में जन्म के बाद गंभीर 50 शिशुओं को भर्ती कराया गया। जिसमें एक शिशु की मौत हो गई और कई बेहतर इलाज के लिए भागलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिये गये। यहां शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जन्म के बाद से 45 दिनों तक शिशु के स्वास्थ्य की मॉनीटरिंग की जानी है। जिसकी जिम्मेदारी एएनएम एवं आशा की है। जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष प्रशिक्षण भी दिये गये हैं। यहां जन्म समय व इसके बाद शिशुओं की हो रही मौत की सबसे बडी वजह कुपोषण है। जिसकी जद में मां और उसके शिशु आ रहे हैं। मां के कुपोषित होने से इसका असर उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड रहा है। जिससे उसकी मौत हो रही है। यहां शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, इंडियन एकेडमी ऑफ पेडीएट्रिक, पाथ संस्थान एवं परिमल संस्थान की ओर से साझा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बावजूद इसके यहां सरकारी सहित निजी क्लिनिकों में भी जन्म के सामय या इसके बाद नवजात शिशुओं की मौत हो रही है। हालांकि, जिले में शिशु मृत्यु दर 35 फीसदी से घट कर 30 पर पहुंच गया है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के रिपोर्ट जारी

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में नवजात शिशु मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की गई है। एनएफएचएस 4 में 2015-16 के आंकडों की तुलना में बिहार में एक हजार जीवित शिशुओं के जन्म पर नवजात मृत्यु दर में छह प्रतिशत की कमी देखी गई है। एनएफएचएस 5 में बिहार में नवजात शिशु मृत्यु दर में प्रति एक हजार जीवित शिशु के जन्म पर 34.5 प्रतिशत है। जबकि एनएफएचएस 4 में ये प्रति एक हजार जीवित जन्म पर 36.7 था। नवजात शिशु के मृत्यु दर की गणन्ना प्रति एक हजार जीवित जन्म पर एक वर्ष से कम आयु में मरने वाले बच्चों की संख्या के रूप में की जाती है

कोट...

जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य संस्थाओं के सहयोग से साझा कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। जिले में राज्य एवं जिला स्तर पर शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। जिसका आंकलन नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की जारी रिपोर्ट से किया जाता है।

डा. रविंद्र नारायण, सीएस, बांका।

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