
कूड़े-कचरे से पटा उत्तरवारी पोखरा रोक लगने संग सफाई की है दरकार
बेतिया शहर के उतरवाई पोखरा में गंदगी और बदबूदार पानी के कारण नगरवासियों को परेशानी हो रही है। अधिकारियों ने इसके सौंदर्यकरण के लिए 98 लाख रुपए की योजना की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कोई स्थाई समाधान नहीं आया है। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो पोखरा का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
बेतिया शहर के छावनी चौक के पास स्थित उतरवाई पोखरा विगत कई वर्षों से गंदगी और बदबूदार पानी के कारण नगर वासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इसमें व्याप्त गंदगी की चर्चा अधिकारी और जनप्रतिनिधि करते तो हैं लेकिन इसका स्थाई समाधान कभी नहीं करते हैं । शहर के बीचोबीच स्थित इस पोखरे का सौंदर्यकरण सही तरीके से कर दिया जाए तो यह नगर वासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इससे जिला प्रशासन अथवा नगर निगम को राजस्व की भी प्राप्ति हो सकती है। इसके आसपास रहने वाले लोगों और शहर के पर्यावरण विद तथा जागरूक लोगों को हमेशा इस बात की भी चिंता है कि आने वाले दिनों में कहीं इसका अस्तित्व ही संकट में ना पड़ जाए।
पर्यावरण विद् दुर्गा दत्त पाठक, समाजसेवी विशाल मिश्रा, प्रोफेसर अशोक तिवारी, आदित्य दीक्षित, देवेंद्र कुमार, अमित कुमार, भोला कुमार, रिशु कुमार, अरविंद मिश्रा आदि अन्य लोगों ने बताया कि इसके तटों पर छठ जैसे पवित्र पर्व के समय पूजा की जाती है। उस समय शहर के हजारों लोग यहां पर पूजा अर्चना के लिए आते हैं। नगर निगम की देख-रेख में उस समय पूरे तट की जबरदस्त सफाई भी की जाती है लेकिन पूजा बीतने के तुरंत बाद एक साल तक यह तट फिर से इसमें डाले जाने वाले तरह-तरह की गंदगी का शिकार हो जाती है। पर्व बीतने के बाद से लेकर इसमें लोग तरह-तरह की गंदगी डालना शुरू कर देते हैं। पॉलिथीन, इस्तेमाल किया हुआ पैड, घरों से निकला हुआ कूड़ा कचरा, नाली का गंदा पानी आदि प्रतिदिन इसमें डाल दिए जाते हैं। इससे इस पौराणिक पोखरे का पानी बदबूदार हो जाता है। इस पोखर के तट पर मछली बेचने वाले अपनी कई दुकानें लगाते हैं तथा बिक्री के बाद बदबू करने वाले अवशेष को पोखरा में डालकर चले जाते हैं। इससे भी पोखरा का पानी पूरी तरह से दूषित हो रहा है। यहां बता दें कि लगभग 98 लाख की लागत से उत्तरवारी पोखरा के सौंदर्य करण की घोषणा की गई थी। कई बार नगर निगम के आला अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के द्वारा निरीक्षण भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत उत्तरवारी पोखरा के सौंदर्यीकरण के लिए 98 लाख रुपए की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी की घोषणा की गई ।पोखरा के तल से सफाई का कार्य शुरू करने और बीच में रंगीन फव्वारा लगाने की भी घोषणा की गई थी। योजना के तहत पोखरा के पश्चिम, उत्तर और पूर्वी छोर पर सीढ़ी घाट का निर्माण करने की घोषणा की गई थी। साथ ही चारों ओर स्ट्रीट लाइट और सुरक्षित डिजाइनर बेंच लगाने की भी उम्मीद जगी थी। फिलहाल यह पोखरा गंदगी का शिकार है और इसमें सरेआम तरह-तरह की गंदगी डाली जा रही है। बातचीत के क्रम में नगर वासियों ने बताया कि इस पोखरा का अगर सही तरीके से सफाई नहीं किया गया तथा गंदगी डालने पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले कुछ वर्षों में इसके अस्तित्व पर ग्रहण लग सकता है। इस पोखर में सीढ़ी का जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन यह जर्जर हो गया है। सीढ़ियों पर चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। पोखर का पानी स्नान करने लायक भी नहीं रह गया है। यह भूजल स्तर को बनाये रखने के लिए भी जरूरी है।
शिकायतें:
1. उत्तरवारी पोखरा में कूड़ा-कचरा डालकर लोग चले जाते हैं। आसपास के लोग इसमें लगातार कचरा डाल रहे हैं।
2. पोखरा के तट पर अवैध दुकान लगाई जा रही है, दुकानों से निकलने वाली गंदगी पोखर में फेंकी दी जाती है।
3. उत्तरवारी पोखरा पर भूमाफियाओं की नजर है, पोखरे का अतिक्रमकण किया जा रहा है।
4. पोखरा की सुरक्षा और जीर्णोद्धा के प्रति नगर निगम जवाबदेह नहीं रहा, पल्ला झाड़ रहे अधिकारी व जनप्रतिनिधि।
5. पोखरा की तट पर मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया है।
सुझाव:
1. पोखरा में गंदगी डालने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। पहली बार के बाद राशि बढ़ाई जानी चाहिए।
2. पोखरा के तट पर अवैध दुकान लगाने व गंदगी पोखर में फेंकने पर रोक लगननी चाहिए।
3. उत्तरवारी पोखर के तट पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसे जल्द से जल्द हटाया जाना चाहिए। 4. मॉनिटरिंग के लिए पोखरा के चारों तट पर सीसीटीवी कैमरा लगा देनी चाहिए।
5. नए सिरे से योजना बनाकर पोखरा का सौंदर्य करण करना चाहिए।

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