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संस्कार युक्त संतान से बेहतर होगा समाज

संस्कार युक्त संतान से बेहतर होगा समाज

अच्छे व संस्कारयुक्त संतान के माध्यम से ही समाज और देश को बेहतर किया जा सकता है। उक्त बातें मुख्य वक्ता विद्या भारती के क्षेत्रीय शिशु वाटिका प्रमुख अरुण कुमार ओझा ने कहीं। वे राज ड्योढ़ी स्थित सरस्वती शिशु बालिका विद्या मंदिर में रविवार को आयोजित शिक्षण गोष्ठी में बोल रहे थे।

बरवत सेना स्थित सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में नव दंपत्तियों एवं गर्भवती महिलाओं को मानव जीवन से जुड़े सोलह संस्कारों के साथ-साथ गर्भधारण से लेकर 5 वर्ष तक की आयु के बीच तक के शिशु शिक्षा से जुड़े बातों पर चर्चा की गई। जहां शिशु के जन्म व उसकी परवरिश से जुड़ी बातें का धार्मिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक व व्यक्तिगत विश्लेशण व परिवेश के प्रभाव की व्याख्या की गई। सचिव अजय कुमार श्रीवास्तव ने नवदंपति व गर्भवती महिलाओं की शिक्षा व पेट में पल रहे शिशु पर परिवेश के प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। उपाध्यक्ष पूर्णिमा बाला श्रीवास्तव व प्रोफेसर कांति यादव ने शिशुओं के पालन पोषण से जुड़े बातों पर प्रकाश डाली। अंत में बरवत सेना स्कूल के प्राचार्य आशुतोष कुमार दास ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मातृत्व को एक सफल कला व माता के पांच ज्ञानेंद्रियों का शिशु पर पड़ने वाले हैं प्रभाव पर विस्तृत प्रकाश डाला। संचालन लखेन्द्र कुमार सिंह ने किया। मौके पर नव दंपत्तियों एवं गर्भवती महिलाएं उपस्थित रही।

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  • Web Title:Society will be better than rites