रेडीमेड के कई यूनिट पर लगा ‘नॉट वर्किंग’ का टैग

Newswrap हिन्दुस्तान, बगहा
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बेतिया में कारीगरों की स्किल मैपिंग की गई और चनपटिया में स्टार्टअप जोन की शुरुआत हुई। पहले यहां के कारीगरों ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उद्योगों की संख्या घटकर 25-26 रह गई है। हाल ही में पटना से आई टीम ने बंद पड़े यूनिट्स की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें 90% रेडीमेड गारमेंट यूनिट हैं।

रेडीमेड के कई यूनिट पर लगा ‘नॉट वर्किंग’ का टैग

बेतिया, हमारे संवाददाता। कोरोना कल में कारीगरों की स्किल मैपिंग की गई और उनकी गुणवत्ता के लिए चनपटिया में स्टार्टअप जोन की शुरुआत की गई। कारीगरों ने उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया और यहां का माल देश के कोने-कोने तक पहुंचाया गया। कुछ समय तक यहां का काम धंधा ठीक चल लेकिन धीरे-धीरे सुविधाओं के अभाव में यहां के उद्यमी काम छोड़ने पर मजबूर होते रहे। 50 से अधिक संख्या में संचालित यहां के उद्योग यूनिट फिलहाल 25 से 26 के आंकड़े को भी फिलहाल पर नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में पटना से आई दो सदस्यीय टीम, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक और परियोजना प्रबंधक के द्वारा स्टार्टअप जॉन के कारीगरों से, उद्यमियों से तथा यह रोजगार पाने वाले लोगों से काफी देर तक बातचीत की।

इस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए। यह पता चला कि बंद पड़े यूनिट में से 90% यूनिट रेडीमेड गारमेंट के यूनिट है। इन सभी पर नॉट वर्किंग का टैग लग चुका है। जबकि शुरुआती दौर में यहां का तैयार वस्त्र चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, देहरादून आदि जाते थे।

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