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त्याग और बलिदान के प्रति समर्पण ही कुर्बानी

त्याग और बलिदान के प्रति समर्पण ही कुर्बानी बेतिया। हजरत इब्राहिम और हजरत...


त्याग और बलिदान के प्रति समर्पण ही कुर्बानी
हिन्दुस्तान टीम,बगहाMon, 17 Jun 2024 11:00 PM
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बेतिया। हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल के बीच त्याग और बलिदान के प्रति समर्पण को याद दिलाता है। कुर्बानी सिर्फ जानवरों की नहीं बल्कि हर मनुष्यों के अंदर छुपी बुराई का परित्याग करते हुए अल्ल्हाताला के सामने अपने आपको को समर्पण करना ही असल कुर्बानी होती है। उक्त बातें शरीयते काजी मुफ्ती शमशुल हक कासमी ने कही। वे सोमवार को शहर के इंद्रा चौक स्थित बड़ी ईदगाह मे ईद -उल- अजहा की नमाज पढ़ने आए नमाजियों को संबोधित कर रहे थे। सोमवार की सुबह बच्चे, नौजवान, वृद्ध सभी कोई कुर्ता-पायजामा पहन सिर पर टोपी लगा कर इत्र की खुशबू लगा कर ईदगाह की तरफ नमाज अदा करने निकल पड़े। इत्र की खुशबू से सारा वातावरण महक उठा था। हर कोई अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ नमाज अदा करने के लिए जा रहे थे। इसकी खुशी बच्चों में ज्यादा दिख रही थी। उन्होंने कहा इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम पुरी दुनिया को देता है। ये पर्व इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार अंतिम महीना जिलहिज्जा के 10वें दिन ईद-उल-अजहा मनाई जाती है। यह तीन दिनों तक चलता है। सोमवार को शहर के विभिन्न ईदगाह में ईद -उल-अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। ईद -उल-अजहा त्याग और बलिदान की मिशाल पेश करती है। अल्हाताला ने अपने नबी इब्राहिम (अ.स.) की इम्तेहान ली जिसमें वे सफल हुए। अल्हाताला ने इब्राहिम (अ.स.) को खाब मे दिखाए कि आप अपनी सबसे पसंदीदा वस्तु की कुर्बानी दें। अल्लाह ताला के हुक्म के मुताबिक अपने प्यारे लड़के इस्माइल जबीउल्ल्हा को लेकर पहाड़ी पर गए। अल्हाताला के हुक्म को निभाते हुए अपने लड़के को लिटा कर जब गर्दन पर चाकू चला कुर्बानी करनी चाही, इससे अल्हाताला इतने खुश हुए की उनके लड़के की जगह भेड़ को लिटा कर कुर्बानी करा दी। उसके बाद से यह अजीमुत्शान सुन्नत अदा की जाती है और रहती दुनिया तक पुरी दुनिया के मुसलमान इसको अदा करते रहेंगे।यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है। कुर्बानी जो जकात अदा करते हो तथा जो शाहेबे नेशाब हो उन पर कुर्बानी करना फर्ज हो जाता है। कुर्बानी बहुत बड़ी इबादत है। कुर्बानी मर्द और औरत दोनों पर फर्ज है। अगर पति पत्नी दोनों शाहेबे नेशाब हो तो दोनों पर कुर्बानी फर्ज हो जाती है। अगर कुर्बानी नहीं करते हंै तो गुनाह का भागीदार होंगे। बकरीद को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल रहा।

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