बिना डॉक्टर-नर्स प्रसव हुई महिला को चढ़ाया जा रहा पानी

बिना डॉक्टर-नर्स प्रसव हुई महिला को चढ़ाया जा रहा पानी

संक्षेप:

नरकटियागंज के अस्पताल में मरीजों को पर्ची कटाने और इलाज के लिए लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों की शिकायत है कि न तो डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही दवाएं। प्रसव कक्ष में सुरक्षा का अभाव है, जिससे बाहरी लोग आसानी से प्रवेश कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

Dec 10, 2025 12:10 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बगहा
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नरकटियागंज, हमारे संवाददाता। दिन के साढ़े ग्यारह बजे हैं। अस्पताल परिसर में घुसते ही ओपीडी की पर्ची कटाने के लिए खिड़की पर खड़े पुरुष एवं महिला मरीजों की कतार पर नजर पड़ती है। कतार में लगी महिला नसीमा खातून, रीना देवी आदि कहती हैं कि एक घंटे से वे लाइन में लगी हैं। खड़े खड़े पैर दुख गया है। काउंटर के ऊपर ना शेड है और ना नीचे बैठने की कोई व्यवस्था है। बुजुर्गो को पर्ची कटाने में परेशानी हो रही है। पर्ची काट रहे कर्मी से पूछने पर वह बताता है कि अबतक करीब 175 लोगों ने ओपीडी में इलाज कराने के लिए पर्ची कटाई है।

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इमरजेंसी वार्ड में सतवारिया के लालबाबू राय अपनी एक महिला मरीज का इलाज करा रहे हैं। महिला के हाथ में सलाइन लगा हुआ है और उसे पानी चढ़ाया जा रहा है । हालांकि वहां न कोई डॉक्टर है और ना कोई नर्स। यह पूछने पर कि इनको क्या हुआ है। परिजन कहते हैं कि प्रसव के चलते महिला कमजोर हो गई है। इमरजेंसी से बाहर निकलते ही रीमा देवी, आयशा खातून नामक महिलाएं बताती हैं कि सर, कुछ ही दवा अंदर मिलती हैं। अधिकतर दवा तो बाहर से ही खरीद कर लानी पड़ती है। प्रसव कक्ष का गेट खुला हुआ है, कायदे से यहां एक गार्ड की तैनाती होनी चाहिए। ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रसव कक्ष की तरफ नहीं जा सके। लेकिन यहां गार्ड नहीं है। लोग बेहिचक प्रसव कक्ष के अंदर आ जा रहे हैं। गेट के बगल के एक कमरे में करीब आधा दर्जन प्रसूता महिलाएं बेड पर सोई हुई हैं, बेड पर चादर नहीं है। मठ मझरिया की गीता देवी, लखनपुर की मंजू कुमारी एवं सिसही की सीमा देवी जैसी प्रसूता महिलाओं ने बताया कि सुबह 9 बजे से अस्पताल में आए हैं, करीब तीन घंटे हो गए।अभी तक इन्हें देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया । अब हम ऊपर पहली मंजिल की तरफ बढ़ते हैं। ग्राउंड फ्लोर से फर्स्ट फ्लोर पर चढ़ने के लिए जो रैंप बने हैं। उनके ऊपर आधा दर्जन से अधिक बाइक खड़ी हैं। किसी दिव्यांग मरीज को नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे आना हो तो यह बाइक बाधा उत्पन्न करेगी। पिछले दिनों रैंप के ऊपर बाइक खड़ा किए जाने को लेकर बवाल भी हुआ था। बावजूद इसके अस्पताल के अंदर रैंप पर बाइक खड़ी की जा रही है। पूछने पर पता चला कि यह सभी बाइक स्टाफ की हैं। अस्पताल प्रबंधक अपने कक्ष में नहीं है। एक अन्य स्टाफ ने बताया कि गोखुला स्वास्थ्य केंद्र पर गए है, वहां कोई कार्यक्रम है। उपाधीक्षक से भी अस्पताल में मुलाकात नहीं हो सकी। अस्पताल से निकालने के बाद उन्हें फोन किया तो उन्होंने बताया कि अभी वे किसी कार्य से बाहर आए है, कुछ ही देर में अस्पताल पहुंचेंगे।