रोजगार की कमी से मजदूरों का पलायन
बेतिया में स्थानीय रोजगार की कमी के कारण 40 फीसदी मजदूर पलायन को विवश हैं। मजदूर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में रोजी रोजगार की तलाश में जाते हैं। 70 फ़ीसदी जनसंख्या खेती पर निर्भर है और स्थानीय उद्योगों की कमी से रोजगार नहीं मिल रहा है।

बेतिया,बेतिया प्रतिनिधि। स्थानीय स्तर पर रोजगार की व्यवस्था नहीं होने के कारण जिले के 40 फीसदी मजदूर पलायन को विवश हैं। रोजी रोजगार का साधन नहीं होने के कारण यहां के मजदूर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में रोजी रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं।
स्थानीय जनसंख्या और उद्योग
पश्चिम चंपारण जिले की 70 फ़ीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। जिले में लगभग 13 लाख के आसपास निबंधित मजदूर हैं। शुगर फैक्ट्री को छोड़ दिया जाए तो दूसरा कोई उद्योग धंधा यहां नहीं है। सालों भर मजदूरों को रोजगार नहीं मिलता है। मजदूर ललन राम, जाकिर मियां, सरोज बैठा, मुन्ना कुशवाहा ने बताया कि जिले में सालों भर कार्य नहीं मिलता है। साल में यहां 5 से 6 माह ही मजदूरी मिलती है। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मजदूरों की हो रही है। ऐसी स्थिति में परिवार के भरण पोषण के लिए दूसरे प्रांतो में रोजी रोजगार के लिए जाना मजबूरी है।
प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव
बाढ़ और सुखाड़ के कारण भी रोजगार प्रभावित हो रहा है। बड़े-बड़े निर्माण कार्यों में दूसरे राज्यों से ठेकेदार कार्य करा रहे हैं। जिसके कारण स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल आबादी का 40 फीसदी परिवार मजदूरी पर निर्भर है। सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी दर से भी कम मजदूरी मिलती है। नौकरी की तलाश में रेलवे स्टेशन पर मिले सत्येंद्र कुमार, लालबाबू प्रसाद ने बताया कि काफी मुश्किल से यहां 300 से लेकर ₹400 कमा पाते हैं।
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