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कविवर गोपाल सिंह नेपाली आज और भी प्रासंगिक

गीतों के राजकुमार कविवर गोपाल सिंह नेपाली अपनी सहज मानवीय संवेदना व प्रेम के साथ राष्ट्रीयता के प्रखर गायक थे। आज के समकालीन परिवेश में कविवर नेपाली की प्रासंगिगता और बढ़ गई है।

उक्त बातें रिटायार सिविल सर्जन डॉ. सुशील कुमार चौधरी ने कही। वे बुधवार को नगर के नेपाली चौक पर कविवर नेपाली की 55 वीं पूण्यतिथि पर अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे थे। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता कर रहे वरीय कवि प्रीतम बावरा ने कहा कि चम्पारण के एक एक जन को बेतिया के अमर सपूत पर गर्व होना चाहिए। नाटककार व अध्यापक दीवाकर राय ने कहा कि सरकारी उपेक्षा का शिकार कविवर नेपाली की रचनाएं पाठ्यक्रम से गायब होती गईं हैं। कार्यक्रम के संचालक रहे सुरेश गुप्त ने कहा कि-‘हम धरती क्या आकाश बदलने वाले हैं, हम तो कवि हैं हम इतिहास बदलने वाले हैं।

जैसी नेपाली की पक्तियों से प्रकट हो रहा आत्मबोध अन्यत्र दुर्लभ है। बावजूद इसके अपनी जिवंतता के आजीवन चर्चित ओजस्वी कवि का कृतित्व दिनोदिन धुमिल होता जा रहा है। गीत व गजल के सिद्धहस्त कवि अरूण गोपाल ने कहा कि बेतिया की धरती पर जन्मे कविवर गोपाल सिंह नेपाली ने मायानगरी मुंबई से लेकर देश के कोने कोने में कलम व कंठ की छाप छोड़ी। अपने जीवनकाल में उपेक्षा का दंश झेलते रहे नेपाली जी मरने के बाद सत्ता व शासन की उपेक्षा के शिकार हो गए। कवि लाल जय किशोर जय ने कहा कि प्रेम व श्रृंगार से लेकर प्रकृति प्रेम के बेमिशाल रचनाकार कविवर नेपाली राष्ट्रीयता की कविताओं में भी अपने समकालिन अन्य कवियों मेंे दमदार रहे। भूपेन्द्र शेष ने कहा कि पूरा चम्पारण कविवर नेपाली का ऋणी है। कार्यक्रम में मुनीनाथ तिवारी, राज किशोर प्रसाद, च्द्रिरका राम व ज्ञानेश्वर गुंजन सक्रिय सहभागिता रही।

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