ठकराहा सीएचसी में 290 दवाएं मौजूद पर मरीजों को नसीब नहीं
ठकराहा और भितहा सीएचसी में इलाज के लिए आवश्यक दवाओं और चिकित्सकों की भारी कमी है। ठकराहा में 290 दवाएं ऑनलाइन उपलब्ध बताई जाती हैं, लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। भितहा में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को खतरा है। अस्पतालों में सफाई की स्थिति भी खराब है।
ठकराहा। ठकराहा और भितहा सीएचसी में इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कहीं दवा गायब है तो कहीं डॉक्टर। शुक्रवार को हिन्दुस्तान ने ठकराहा सीएचसी का जायजा लिया, जिसमें पाया कि ऑनलाइन पोर्टल पर अस्पताल में 290 प्रकार की दवाएं उपलब्ध दिखाई दे रही हैं, लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। सर्दी-खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों तक की दवाएं नदारद हैं। न कफ सिरप है, न एंटीबायोटिक और न ही सांस (दम) फूलने की जीवनरक्षक दवाएं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्टोर कीपर संजीव कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि वरीय अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि स्टॉक को खाली नहीं दिखाना है।
व्यवस्था का आलम यह था कि पैथोलॉजी विभाग में कोई विशेषज्ञ नहीं है, वहां टीबी के टेक्नीशियन जितेन्द्र कुमार से पैथोलॉजी का काम लिया जा रहा है। अस्पताल परिसर में घुसते ही मुख्य द्वार पर कचरे और गंदगी का अंबार मरीजों का स्वागत करता है, जो संक्रमण को और बढ़ा रहा है। इधर ठकराहा सीएचसी में डा. धीरज कुमार ने पूछने पर कहा कि कफ सीरफ और एंटीबायोटिक दवा की कमी है। दवा काउंटर के संचालक संजीव कुमार ने बताया कि पोर्टल पर 290 प्रकार की दवा उपलब्ध है। इसमें अधिकांश पोर्टल पर एक एक दो दो दवा है। मरीजों को उपलब्ध कराने हेतु नही बल्कि पोर्टल फूल फील रखने के लिए है। कफ सीरफ और एंटीबायोटिक दवा नही है। चिकित्सक व कर्मियों की कमी से जूझ रहा भितहां सीएचसी भितहां सीएचसी में डॉक्टरों और कर्मचारियों की घोर कमी है। कहने को यहां 255 प्रकार की दवाएं मौजूद हैं, लेकिन उन्हें देने वाला या लिखने वाला कोई नहीं है। अस्पताल में जीएनएम की सीटें पूरी तरह खाली हैं, जबकि एएनएम की भी आधी सीटें रिक्त पड़ी हैं। पैथोलॉजी का काम टीबी टेक्नीशियन भारत भूषण पाण्डेय के भरोसे है। मामले की गंभीरता तब सामने आई जब बीएचएम रंजन कुमार ने स्वीकार किया कि रोस्टर के अनुसार किसी डॉक्टर की ड्यूटी नहीं थी, फिर भी सीएचओ लखन कुमार डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों का इलाज करते दिखे। बिना एमबीबीएस डॉक्टर के, केवल सीएचओ के भरोसे ओपीडी चलाना मरीजों की जान को जोखिम में डालने जैसा है। भितहा में सीएचसी में मौजूद बीएचएम रंजन कुमार ने बताया कि शुक्रवार को रोस्टर में आयूष चिकित्सक की ड्यूटी है। लेकिन वे फील्ड में गए हैं। इसलिए सीएचओ लक्षमण कुमार दवा लिख रहे थे। दो एमबीबीएस चिकित्सक हैं। प्रभारी चिकित्सक डा.मनोरंजन कुमार भी फिल्ड में गए है। दवा स्टोर कीपर धीरज कुमार ने बताया कि 294 प्रकार की दवाओं में 258 प्रकार की दवा जरूरत के लिए उपलब्ध है।

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