
बांसी नदी के कटाव से बचाव के लिए ठकराहा को जमींदारी बांध की दरकार
ठकराहा के किसान पिछले कई सालों से बांसी नदी की बाढ़ से परेशान हैं। 1980 के दशक में बने जमींदारी बांध के न होने से हर साल उनकी फसलें बर्बाद हो जाती हैं। जल संसाधन विभाग ने सर्वे किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसान सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
ठकराहा के किसान पिछले कई सालों से एक अनदेखी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। बांसी नदी,जो कभी इस क्षेत्र की जीवन रेखा हुआ करती थी। अब इसमें आने वाली बाढ़ से हर साल किसान परेशान व बर्बाद हो रहे हैं। वीरेंद्र तिवारी, निजामुद्दीन अली, जितेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि बांसी नदी के जलग्रहण टाल क्षेत्र है। नदी में बाढ़ आने पर खरीफ की फसल धान इत्यादि बर्बाद होती है। जमीन में नमी रहने से रबी फसलों की खेती में बिलंब होती है। ऐसे में रबी फसलों की बुआई ससमय करना संभव नहीं हो रहा है। किसान कहते हैं कि सन 1980 के दशक में बांसी नदी का उत्तरी तटबंध पर जमींदारी बांध था,जो समय के साथ-साथ संरक्षण और सरकारी ध्यान के बिना धीरे-धीरे अवशेष में तब्दील हो गया।
इस जमींदारी बांध के न होने से हर साल बांसी नदी की बाढ़ से ठकराहा प्रखंड के धूमनगर, जगीरहा, कोईपट्टी और मोतीपुर पंचायत के लगभग 50% किसान प्रभावित हो रहे हैं। खरीफ की फसल बर्बाद हो जाती है। और निचले क्षेत्रों में जल जमाव के कारण रबी फसलों की बुआई भी प्रभावित होती है। चन्द्रमा शर्मा, मैनेजर यादव, विद्याशरण तिवारी बताते हैं कि जुलाई 2017 में जल संसाधन विभाग के गोपालगंज डिविजन के चीफ इंजीनियर ने किसानों के मांग व अपील पर संज्ञान लेकर विभाग समेत जिला प्रशासन में पत्राचार किया था। क्षेत्रीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाया। सन 2021 में बेतिया से आकर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम ने बांसी नदी पर जमींदारी बांध का सर्वे भी किया। लेकिन फलाफल का परिणाम शून्य रहा। मुन्ना तिवारी, संदीप तिवारी, शशि प्रताप तिवारी कहते हैं कि बांसी की त्रासदी से किसानों की उम्मीदें टूटती रहीं हैं। बांसी की उफान की चोट से किसानों का आर्थिक कमर टूट रहा है। जबकि सरकार व विभाग बांसी की समस्या पर गंभीर नहीं है और हर साल बाढ़ का कहर से खेती बर्बाद हो रही है। इस स्थिति ने किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। वे हर साल अपनी फसलों को बर्बाद होते देखते हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है। सरकार और विभाग की अनदेखी ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। क्या ठकराहा के किसानों को कभी बांसी की समस्या से निजात मिलेगा? क्या बांसी नदी पर जमींदारी बांध का निर्माण मांग तक ही रह जायेगा ? क्या किसानों की इस समस्या की सवाल पर सरकार निर्णय सार्थक निर्णय लेगी ? यह सवाल किसानों को परेशान कर रही है। इसका समाधान प्रशासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। किसानों की दर्दनाक कहानी: कोईपट्टी,जगीरहा व मोतीपुर के पंचायत के निचले इलाके खेतों के किसान कहते हैं कि वे लोग पिछले 30 सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन सरकार और विभाग की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती। कोईपट्टी पंचायत के किसान जितेंद्र कुशवाहा, निजामुद्दीन अली कहते हैं कि हमने कई बार सरकार और विभाग के अधिकारियों से मिले हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। किसानो का कहना है कि कभी कभी उनको लगता है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
शिकायतें:
1.1980 के दशक में बांसी नदी के उत्तरी तटबंध पर जमींदारी बांध था अब यह अवशेष में तब्दील हो गया।
2.जमींदारी बांध के नहीं रहने के कारण ठकराहा व आसपास के क्षेत्र में बांसी नदी की बाढ़ लोगों को प्रभावित करती है।
3.जल संसाधन विभाग सर्वे करने के बाद जमींदारी बांध के निर्माण को लेकर गंभीर नहीं हैं।
4.चार वर्ष पूर्व जमींदारी बांध के निर्माण को लेकर बांसी नदी पर सर्वे का कार्य किया गया था पर नहीं हो सका निर्माण।
4.बाढ़ से धूमनगर, जगीरहा, कोइरपट्टी व मोतीपुर के किसानों की प्रत्येक वर्ष डूब जाती हैं फसलें । सुझाव
1. बांसी नदी के पानी से होने वाली क्षति से बचाव के लिए जमींदारी बांध का निर्माण कर रोका जा सकता है।
2.प्रत्येक साल होने वाली जलजमाव से खेतों की फसलों को बचाने के लिए अधिकारिक स्तर पर प्रयास होना चाहिये।
3.ठकराहा प्रखंड के करीब चार पंचायतों की एक दर्जन से अधिक गांव इससे प्रभावति हैं, इसका उपाय होना चाहिये।
4.बांध का निर्माण करने के साथ ही बांसी नदी से हर साल होने वाली क्षति से बचाया जा सकता है। 5.सरकार व विभाग को इस प्रेजेक्ट पर विशेष तौर पर ध्यान देकर निर्माण कराना चाहिये।
बोले जिम्मेदार:
जमींदारी बांध के संबंध में उनको विशेष जानकारी नहीं है। बांसी नदी के पानी से बचाव के लिए बांध आवश्यक है, तब वे भी स्थानीय लोगो के साथ हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओ से विचार विमर्श करके जमींदारी बांध के जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक प्रक्रिया में अंचल के स्तर पर पूरी कोशिश की जाएगी ताकि स्थानीय लोगो को बांसी नदी से होने वाली क्षति से राहत मिल सके। -सुमित राज अंचल अधिकारी, ठकराहा अंचल

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