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अवधि विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड में रद्द

नप के लेखापाल बने एक कर्मी के अवधि विस्तार प्रस्ताव को विचारण के योग्य नहीं माना गया है। नप के कार्यपालक पदाधिकारी के द्वारा प्रस्तावित इस प्रस्ताव को नियम व विधान के विरुद्ध बता कर सशक्त समिति के चार सदस्यों ने भी विरोध किया है।

सशक्त समिति सदस्य संजय सिंह उर्फ छोटे सिंह, शहनाज खातून, रमाकांत महतो व दीपेश कुमार केविरोध के कारण आठ जनवरी को संपन्न समिति की बैठक में इस पर विचार नहीं किया जा सका। नप सभापति गरिमा सिकारिया ने बताया कि सशक्त समिति में इस पर विचारण नहीं होने के कारण इस प्रस्ताव के नप बोर्ड के भी एजेन्डे में शामिल होने के बावजूद इसे विचारण के योग्य नहीं पाकर रद्द कर दिया गया। सभापति ने बताया कि बीते तीन साल के महालेखाकार की आपत्तियों पर लटकी कार्रवाई को अमल में लाने का प्रस्ताव भी कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार पवन के अनुरोध पर स्वीकार कर लिया गया था। लेकिन कतिपय पार्षदगण के द्वारा इस पर आपत्ति दर्ज की गई। उनका कहना था कि आपत्तियों का निराकरण विरूद्ध रूप से प्रशासनिक मामला है। इसका अनुपालन भी ईओ को सुनिश्चित करना है। इस आलोक में इन उपरोक्त दोनों प्रस्तावों पर विचार नहीं करने का निर्णय लिया गया।

इधर नप के सशक्त समिति सदस्य संजय सिंह ने कहा कि 30 जून को अमान्य कर्मियों की सेवा तत्कालीन ईओ ने समाप्त कर दी थी। बावजूद इसके लेखापाल जैसे महत्वपूर्ण पद ऐसे व्यक्ति के अब तक पद पर बने मानदेय लेते रहना एक आपराधिक मामला है। इसकी जिम्मेदारी तय कर के एफआईआर की कार्रवाई की मांग डीएम से की है।

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  • Web Title:Duration extension proposal canceled on board