
निर्माण में गुणवत्ता की कमी व मेंटेनेंस नहीं होने से ग्रामीण सड़कें हो रहीं जर्जर
पश्चिम चंपारण में ग्रामीण सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़कें जर्जर हो जाती हैं। मेंटेनेंस की कमी और मानकों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार ने मेंटेनेंस अवधि 5 से 7 वर्ष की है, लेकिन गुणवत्ता की अनदेखी जारी है।
ग्रामीण सड़कों की स्थिति खस्ता हाल हो चुकी है। निर्माण के कुछ दिन बाद ही सड़कें जर्जर हो चुकी है। मेंटेनेंस नहीं होने के कारण समय से पहले सड़के टूट रही हैं। जर्जर सड़क होने के कारण आए दिन कोई ना कोई दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सड़क निर्माण के लिए सरकार ने मेंटेनेंस की पॉलिसी 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष कर दिया। ताकि आम लोगों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिले। लेकिन आज भी ग्रामीण सड़कों के निर्माण में मानक की अनदेखी की जा रही है। शिकायत करन पर अधिकारी तो आते हैं, लेकिन उन्हें जर्जर सड़कें नहीं दिखती हैं। निर्माण एजेंसी से लेकर विभाग के अधिकारी मामले को रफा-दफा कर दे रहे हैं।
पश्चिम चंपारण जिले में ग्रामीण सड़कों का जाल बिछा हुआ है। जिसके मेंटेनेंस में अधिकारी से लेकर ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दूर दराज के क्षेत्रों में सड़क निर्माण में मानक की अनदेखी की जा रही है। रही-सही कसर अतिक्रमणकारियों ने सड़क का अतिक्रमण कर पूरा कर दिया है। इसके कारण बड़े वाहनों का निकलना मुश्किल होता है। गन्ने समेत माल की ढुलाई के व यातायात भी इससे प्रभावित हो रहा है। पाकुड़ की गिट्टी की बजाय यूपी की घटिया गिट्टी का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जा रहा है। इसकेे कारण निर्धारित समय सीमा के पहले सड़कें उखड़ जा रही है। हालांकि सरकार ने सड़कों के मेंटेनेंस से लेकर गुणवत्ता तक की मॉनिटरिंग के लिए समय-समय से जांच करा रही है। बावजूद बेहतर क्वालिटी की सड़कें नहीं बन रही है। सामग्रियों से लेकिर निर्मा में गुणवत्ता का अभाव है। सड़क निर्माण के दौरान अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं। ठेकेदारों का कोई टेक्नीशियन नहीं रहता है। जिसके कारण सड़कों की गुणवत्ता में गिरावट आई है। सड़क के अतिक्रमण और सड़क के दोनों तरफ घरों को ऊंचा किए जाने से सड़कों पर पानी लग जाता है, जिसके कारण सड़कें टूट रही है। फ्री मिक्सिंग में क्वालिटी की अनदेखी की जा रही है। पीसीसी सड़क में घटिया सीमेंट व छड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही कारण है कि करोड़ों खर्च के बावजूद ग्रामीण सड़कों की स्थिति अन्य विभागों के सड़कों की अपेक्षा खराब है। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में आम लोगों को होती है। क्वालिटी बेहतर नहीं होने के कारण हल्की बारिश में सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती है। सड़कों के टूटने से आवागमन प्रभावित होता है। रेन कट से अप्रोच टूट जाती है। कई जगहों पर सड़क के दोनों तरफ गड्ढे बन गए हैं, जो हादसों को दावत दे रही है। आज भी कई नदियों पर पुल नहीं है। इसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जिले के दो दर्जन से ज्यादा नदियों पर चचरी का पुल बनाकर ग्रामीण आवागमन कर रहे हैं। कई चचरी पुल का निर्माण स्वयं ग्रामीण अपने पैसे से कराते हैं। सबसे ज्यादा खराबी स्थिति ग्रामीण कार्य विभाग बेतिया डिवीजन और नरकटियागंज डिवीजन के सड़कों की है। जहां जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। इसका सीधा लाभ ठेकेदारों और अधिकारियों को मिल रहा है। सड़क निर्माण बेहतर नहीं होने से सरकारी रुपए का दुरुपयोग हो रहा है। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई नहीं होती है। शिकायतें: 1. ग्रामीण सड़कों के निर्माण में मानक का पालन नहीं हो रहा है। पाकुड़ की जगह यूपी की गिट्टी इस्तेमाल की जा रही है। 2. सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहतर नहीं होने से महीने-दो महीने में के बाद ही सड़कें जर्जर होने लग रही हैं। 3. सड़क के किनारे अतिक्रमण किए जाने से आवागमन हो रही है बाधित, वाहनों का निकलना मुश्किल हो रहा है। 4. सड़कों का मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है। सात वर्षों तक यह काम करना है, जबकि एकाध बार ही किया जा रहा है। 5. नदियों पर पुल नहीं होने के कारण चचरी पुल आवागमन के लिए है सहारा सुझाव: 1. ग्रामीण सड़कों के दोनों तरफ किये गये अतिक्रमण को खाली कराया जाय, सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाय। 2. निर्धारित समय सीमा के पहले सड़क टूटने पर ठेकेदार को किया जाए ब्लैक लिस्टेड। 3. नदियों पर चचरी पुल के जगह आरसीसी पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। 4. यूपी की गिट्टी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगे। यह गिट्टी वजन पड़ने पर मिट्टी की तरह टूट जाती है। 5. मेंटेनेंस का भी समय तय हो, निर्धारित समय पर मेंटेनेंस करना अनिवार्य किया जाय।

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