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कालीबाग मंदिर में आरती में उमड़ी भीड़

हिन्दुस्तान टीम,बगहाPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 10:00 PM
कालीबाग मंदिर में आरती में उमड़ी भीड़

बेतिया (प.च.)। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

नवरात्र की पंचमी और षष्ठी तिथि एक साथ होने के कारण सोमवार को दुर्गा मां के भक्तों ने देवी के पांचवे और छठे स्वरूप की पूजा की। भक्त स्कंदमाता की पूजा सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया। शुभवास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।। आदि मंत्र से किए। मान्यता है कि माता के इस स्वरूप की पूजा करने से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति हैं। यानी चेतना का निर्माण करने वाली हैं। कहा जाता है कि कालीदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुई। स्कंदमाता को बेहद शक्तिशाली और दयालु भी माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ लोगों ने माता के छठवें स्वरुप मां कात्यायनी की पूजा भी पूरे मनोयोग से की। इस दौरान भक्तों ने शहद और शहद से बनी वस्तुओं की भोग भी माता को चढ़ाए। बाद में परिजनों व अन्य को प्रसाद स्वरुप शहद और उससे बनीं वस्तुए दी गईं। वहीं पंडितों और श्रद्धालुओं ने ह्य चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी ह्य आदि मंत्र से माता की पूजा अर्चना की। नगर के दुर्गाबाग और कालीबाग समेत अन्य मंदिरों में भी सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। जो लोग अपने घर से फल-फूल या अन्य पूजन सामगियां नहीं ले गए थे, वे मंदिरों के पास लगी दुकानों से इसकी खरीदारी करते भी नजर आए। इधर मैनाटांड़ प्रखंड क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा धूमधाम व हर्षोल्लास पूर्वक हुआ। पूरा प्रखंड क्षेत्र मां दुर्गा के पूजा में लीन है। मां भगवती के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंच रहे हैं । मंदिरों में घंटा की ध्वनि के बीच माता

पौराणिक कथा : पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस तारकासुर कठोर तपस्या कर रहा था। उसकी तपस्या से भगवान ब्रह़मा प्रसन्न हो गए थे। वरदान में तारकासुर ने अमर होने की इच्छा रखी। यह सुनकर भगवान ब्रह्मा ने उसे बताया कि इस धरती पर कोई अमर नहीं हो सकता। तारकासुर निराश हो गया। जिसके बाद उसने उसने वरदान मांगा कि भगवान शिव का पुत्र ही उसका वध कर सके। तारकासुर ने धारणा बना रखी थी कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे और उनका पुत्र नहीं होगा। तारकासुर यह वरदान पाने के बाद लोगों पर अत्याचार करने लगा। तंग आकर सभी देवता भगवान शिव से मदद मांगने लगे। तारकासुर का वध करने के लिए भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया। विवाह करने के बाद शिव -पार्वती का पुत्र कार्तिकेय हुए। जब कार्तिकेय बड़े हुए तब उन्होने तारकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलायी। कहा जाता है कि स्कंदमाता कार्तिकेय की मां थीं।

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