रतवल में बनेगा घड़ियालों का इनक्यूबेशन सेंटर
बिहार की गंडक नदी अब घड़ियालों के संरक्षण में चंबल को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। वन मंत्रालय और डब्ल्यूटीआई के संयुक्त प्रयास से रतवल में एक इनक्यूबेशन सेंटर बनाया जाएगा। इससे घड़ियालों के अंडों और...

हरनाटाड़ । घड़ियालों की सुरक्षा, संरक्षण के साथ ही संख्या के मामलों में अब बिहार की गंडक नदी चंबल को टक्कर देने के लिए तैयार हो रहा है। इसके लिए बिहार सरकार के वन मंत्रालय व डब्ल्यूटीआई के संयुक्त प्रयास से मास्टर प्लान के तहत कवायद तेज कर दी गई है। घड़ियालों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए वन विभाग व डब्ल्यू टीआई के संयुक्त टीम के साथ पश्चिमी चम्पारण के रतवल में इनक्यूबेशन सेंटर बनाया जायेगा। इसके लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। डब्ल्यूटीआई के निदेशक डॉ समीर सिन्हा ने बताया कि गंडक नदी होकर गुजरी धनहा-रतवल के पास इनक्यूबेशन सेंटर बनाने के लिए भूमि का चयन किया गया है।
विभागीय कागजी प्रक्रिया चल रही है। इनक्यूबेशन सेंटर बनाने के लिए भूमि हस्तांतरण व एनओसी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इनक्यूबेशन सेंटर बन जाने से घड़ियालों के अंडे व बच्चों को संरक्षक व सुरक्षा प्रदान किया जाएगा। निदेशक ने बताया कि घड़ियाल गंडक नदी के तट पर अंडे देते हैं और अंडे से बच्चे बाहर निकलते हैं। गंडक नदी के तट से घड़ियालों द्वारा दिये गये कई अंडे जानवरों के शिकार हो जाते थे। इससे अपेक्षाकृत कम संख्या में घड़ियालों के बच्चे बचते थे। घड़ियाल अपने घोंसले में दो सौ अंडे देते थे तो अंतिम रूप से 30 से 50 ही उसमें बच पाते थे। इसी को देखते हुए देखते हुए गंडक नदी के किनारे रतवल में इनक्यूबेशन सेंटर बनाया जा रहा है। जिससे घड़ियालों के घोंसले से अंडे को लाकर इस सेंटर में रखे जाएंगे। अंडे से बच्चों के बाहर निकलने व नदी में पानी की स्थिति सही होने पर उन्हें गंडक में छोड़ दिया जाएगा। इससे घड़ियालों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी।
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