
जमाबंदी खुद की नहीं तो फार्मर आर्ड भी नहीं रजिस्ट्रेशन नहीं
बगहा अनुमंडल के 75 प्रतिशत किसान फार्मर रजिस्ट्री से वंचित रहेंगे क्योंकि उनके नाम पर जमाबंदी नहीं है। कृषि और राजस्व विभाग के संयुक्त कैंप में अधिकांश किसानों के पूर्वजों के नाम से जमाबंदी चल रही है, जिससे उन्हें पीएम किसान योजना और अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। किसान इस समस्या को लेकर रोष व्यक्त कर रहे हैं।
बगहा,नगर प्रतिनिधि। स्वयं के नाम जमाबंदी नहीं होने के से बगहा अनुमंडल के 75 फ़ीसदी किसानों फॉर्मर रजिस्ट्री से वंचित रहेंगे। कारण कि बगहा अनुमंडल के प्राय: सभी अंचलों में 75 फीसदी किसानों के नाम नहीं जमाबंदी। और फार्मर आईडी के लिए किस के नाम की जमाबंदी होनी चाहिए। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की ओर से संयुक्त रूप से फार्मर आईडी बनाने को लेकर संयुक्त रूप से कैंप का आयोजन किया जा रहा है लेकिन कैंप में आए अधिकांश किसानों के पूर्वजों के नाम से जमाबंदी चल रही है ऐसे में उन्हें फार्मर आईडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिस कारण किसान पीएम किसान योजना सहित कृषि विभाग की कई योजनाओं से किसान महरूम हो जाएंगे। इससे सबसे अधिक परेशानी आदिवासी क्षेत्र के किसानों को है। आदिवासी क्षेत्र के अधिकाशं किसानों की जमाबंदी अभियान भी उनके परिजनों के नाम चल रही है। फार्मर आईडी के लिए स्वयं के नाम से जमाबंदी होने के नियम पर किसानों में गहरा रोष देखा जा रहा है। आदिवासी थरूहट क्षेत्र के किसान पशुराम महतो ,मदन महतो,शुकदेव काजी धर्मलाल चौधरी आदि का कहना है कि राजस्व विभाग के कर्मियों के उदासीनता के कारण उनके पूर्वजों की जमीन की जमाबंदी उनके नाम पर नहीं हैं। किसानों का कहना है पुर्वजों को अपने नाम पर लाने को लेकर वे विगत कई वर्षों से परेशान हैं। परिमार्जन सहित कई आवेदन भी किए लेकिन नतीजा सिफर रहा। विगत अगस्त माह राजस्व विभाग की ओर से डोर टू डोर अभियान भी चलाया है। इस अभियान के तहत उनके द्वारा आवेदन भी दिया गया लेकिन यह महा अभियान भी कोरा साबित हुआ। और इस अभियान के तहत भी उनकी समस्या का निष्पादन नहीं हुआ। और सरकार की ओर से फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान चला उन्हें पीएम किसान योजना आदि से वंचित किया जा रहा है। फार्मर आईडी बनाने को लेकर कृषि विभाग और राजस्व विभाग की ओर से संयुक्त रूप से पंचायत में कैंप लगाया जा रहा है। जिसमें किसानों को फार्मर आईडी के लिए स्वयं के नाम की जमाबंदी की मांग की जा रही है। ऐसे में पंचायत के अधिकांश किसानों के पास स्वयं के नाम के जमाबंदी नहीं होने से कैंप से उन्हें बैरन वापस होना पड़ रहा है जिसको लेकर किसानों में रोष पनप रहा है।

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