Hindi NewsBihar NewsAuto e-rickshaws means of Self-employment after Corona people earning 1000 daily
स्वरोजगार: कोरोना बाद ऑटो और ई-रिक्शा ने दी जिंदगी को रफ्तार, नौकरी छोड़ कमा रहे 1 हजार

स्वरोजगार: कोरोना बाद ऑटो और ई-रिक्शा ने दी जिंदगी को रफ्तार, नौकरी छोड़ कमा रहे 1 हजार

संक्षेप:

बिहार में अब तक खरीदे गए कुल ई-रिक्शा में 88 फीसदी से अधिक की खरीद मात्र पांच वर्षों में हुई। यही हाल ऑटो का है। बिहार में अब तक पांच लाख 23 हजार 899 ऑटो पंजीकृत हैं।

Dec 08, 2025 09:56 am ISTSudhir Kumar हिन्दुस्तान, संजय कुमार, पटना
share Share
Follow Us on

ऑटो और ई-रिक्शा लोगों के लिए आजीविका का साधन बन रहे हैं। खासकर कोरोना काल (2020) के बाद बिहार में ऑटो और ई-रिक्शा की जमकर खरीदारी हुई है। कम वेतन में निजी कंपनियों में काम कर रहे लोग भी अब ऑटो और ई-रिक्शा खरीदकर स्वरोजगार की राह पर चल पड़े हैं। आलम यह है कि अब तक (7 दिसम्बर 25) हुई ई-रिक्शा की खरीद में 88 फीसदी पिछले पांच सालों में बिके हैं। इसी तरह पिछले पांच सालों में ऑटो अब तक के तिहाई बिके हैं।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

परिवहन विभाग के अनुसार बिहार में अब तक तीन लाख छह हजार 544 ई-रिक्शा की खरीद हो चुकी है। कोरोना वाले वर्ष 2020 में मात्र 11 हजार 854 ई-रिक्शा की खरीदारी हुई, लेकिन इसके अगले वर्ष 2021 में 19 हजार 744 ई-रिक्शा खरीदे गए। वर्ष 2022 में जब कोरोना का प्रभाव बहुत हद तक खत्म हो गया लेकिन सैकड़ों लोगों को रोजी-रोजगार छीन चुके थे। तब उस वर्ष 43 हजार 884 ई-रिक्शा की खरीदारी हुई। इसके बाद यह आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ता चला गया। वर्ष 2023 में 69 हजार 627, वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 76 हजार 817 ई-रिक्शा की खरीदारी हुई। इस वर्ष अब तक 60 हजार 743 ई-रिक्शा खरीदे गए हैं।

इस तरह बिहार में अब तक खरीदे गए कुल ई-रिक्शा में 88 फीसदी से अधिक की खरीद मात्र पांच वर्षों में हुई। यही हाल ऑटो का है। बिहार में अब तक पांच लाख 23 हजार 899 ऑटो पंजीकृत हैं। वर्ष 2020 में 31 हजार 219 ऑटो की खरीदारी हुई थी। अगले वर्ष 2021 में 19 हजार 626, वर्ष 2022 में 22 हजार 660, वर्ष 2023 में 32 हजार छह तो वर्ष 2024 में 36 हजार 327 ऑटो खरीदे गए। इस वर्ष अब तक 41 हजार 169 ऑटो की खरीदारी हो चुकी है। यानी कुल ऑटो में 29 फीसदी की खरीदारी पांच सालों में हुई है।

निजी कंपनी छोड़ ऑटो चला रहे कुंदन

कुंदन पहले लुधियाना के एक निजी कंपनी में काम करते थे। कोरोना के बाद पटना आ गए। लोन लेकर ऑटो की खरीदारी की। हर रोज एक-डेढ़ हजार रुपए कमा लेते हैं। दिन भर ऑटो चलाने के बाद परिवार के साथ आराम से रह रहे हैं। घर-परिवार भी खुशहाल है। कहते हैं कि अब किसी की चाकरी की जरूरत नहीं।

गार्ड की नौकरी छोड़ प्रवीण चला रहे ई-रिक्शा

प्रवीण पहले एक अपार्टमेंट में गार्ड की ड्यूटी करते थे। ओवरटाइम करने पर बमुश्किल 10-12 हजार महीने में कमा पाते थे। फिर लोन लेकर ई-रिक्शा की खरीदारी की। अब उतने ही समय में हर रोज औसतन एक हजार की आमदनी हो जाती है। लोन चुकता कर प्रवीण अब आराम से घर-परिवार की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं।

क्या कहता है संघ

ऑटो और ई-रिक्शा बेरोजगारी दूर करने में सहायक साबित हो रहे हैं। शहर की कौन कहे, गांवों में भी ई-रिक्शा चल रहे हैं। लोगों का सफर आसान हुआ है। खेती के बाद परिवहन में ऑटो और ई-रिक्शा से लोगों को रोजी-रोजगार मिल रहा है। लेकिन, यह सत्ता की उपेक्षा का शिकार है। चालकों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। -राजकुमार झा, महासचिव, बिहार स्टेट ऑटो चालक संघ।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar
टीवी मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। क्राइम, पॉलिटिक्स, सामाजिक और प्रशासनिक मामलों की समझ रखते हैं। फिलहाल लाइव हिन्दु्स्तान में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर बिहार के लिए काम करते हैं। इससे पहले ईटीवी न्यूज/News18 में बिहार और झारखंड की पत्रकारिता कर चुके हैं। इंदिरा गांधी नेशनल ओेपन यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में पीजी किया है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar Shapath Grahan, Bihar Election Result 2025, Bihar Chunav Result, बिहार चुनाव 2025 , Bihar vidhan sabha seats , बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स और बिहार चुनाव 2025 की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।