
बिहटा-अरवल-औरंगाबाद रेल परियोजना में देरी पर संघर्ष समिति का ज्ञापन
रेलवे बोर्ड से जमीन अधिग्रहण व निर्माण कार्य तेज करने की मांग और निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए रेलवे संघर्ष समिति ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सतीश
जिले की बहुप्रतीक्षित बिहटा-अरवल-औरंगाबाद रेल परियोजना में जमीन अधिग्रहण और निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए रेलवे संघर्ष समिति ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सतीश कुमार को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। समिति के मुख्य संयोजक मनोज सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 1980 से लंबित यह परियोजना स्वीकृति और बजट मिलने के बावजूद अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना को दो चरणों में मंजूरी दी गई है, जिसमें पहले चरण के तहत 26 जून 2024 को 13 किलोमीटर रेलखंड को पूर्ण स्वीकृति और राशि उपलब्ध कराई गई, लेकिन लगभग एक वर्ष बाद भी कार्य बेहद धीमा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है।
वहीं दूसरे चरण में अनुग्रह नारायण रोड से दाउदनगर, अरवल, पालीगंज और विक्रम होते हुए बिहटा तक 117 किलोमीटर रेलखंड को 30 सितंबर 2025 को 3606 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, पर तीन माह से अधिक समय बीतने के बावजूद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कागजी स्तर तक सीमित है। समिति ने बताया कि अधिकारियों से लगातार संपर्क के बावजूद प्रगति नहीं हो रही है और रेलवे बोर्ड से मांग की कि परियोजना को तीन वर्षों की समय-सीमा में पूरा करने के लिए जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि चार संसदीय क्षेत्रों सहित करोड़ों लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सके।

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