Naxalites farman missing in Lok Sabha elections - लोकसभा चुनाव में गुम हो गए नक्सलियों के फरमान DA Image

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लोकसभा चुनाव में गुम हो गए नक्सलियों के फरमान

नक्सलियों के फरमान और बूथों पर सन्नाटे वाली स्थितियां अब अलविदा कह चुकी हैं। कभी जन अदालतों से चुनावों के फैसले होते थे, लेकिन अब ये बातें गुजरे जमाने की हो गईं। 

औरंगाबाद और काराकाट लोकसभा क्षेत्र में इस बार हुए लोकसभा चुनाव में ना तो नक्सलियों का फरमान काम आया और ना ही उनकी दहशत कहीं हावी हो सकी। यदा-कदा जगहों पर फर्जी बमों को लगा कर सुरक्षाबलों को परेशान किया गया, लेकिन उसका असर मतदान के प्रतिशत पर नहीं पड़ा। 

रविवार को काराकाट लोकसभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही यह महापर्व संपन्न हुआ और कहीं भी नक्सलियों की धमक नहीं दिख सकी। स्थिति यह रही कि जहां 4 बजे तक मतदान हुआ था, वहां 6 बजे तक मतदान संपन्न हुआ। इस चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ता रहा और नक्सलियों की वैचारिक लड़ाई सिसकती रही। 

बदलाव के इस दौड़ में लोगों ने खुद ही मतदान की कमान संभाली और प्रशासनिक सहयोग तथा सुरक्षा बलों की चहलकदमी के बीच मतदान संपन्न हो गया। औरंगाबाद धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल है और यहां अक्सर नक्सली हमले होते रहे हैं, लेकिन इस बार का चुनाव इन हमलों से अछूता रहा और नक्सलियों की धमकी का यहां कोई असर नहीं पड़ा। स्थिति यह रही कि नक्सलियों ने वोट बहिष्कार और जन अदालतों से भी हाथ पीछे खींच लिए। 

औरंगाबाद में 55 प्रतिशत मतदान हुआ जिसे बेहतर संकेत बताया जा रहा है।  जिले के बॉर्डर पर जो बूथ स्थापित थे, वहां भी मतदान निर्धारित समय तक हुआ और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न हो गया। 

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