महाशिवरात्रि पर सजधज कर तैयार हुआ बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर, पेज 4 लीड, संशोधित
औरंगाबाद, अरवल, गया, जहानाबाद सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं श्रद्धालु ग बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर पहुंचेंगे 50 हजार से अधिक श्रद्धालु फोटो- 14 फरवरी एयूआर

औरंगाबाद, अरवल, गया, जहानाबाद सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर देवकुंड में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, पुलिस की होगी तैनाती, की गई है बैरिकेडिंग बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर पहुंचेंगे 50 हजार से अधिक श्रद्धालु फोटो- 14 फरवरी एयूआर 1 कैप्शन - देवकुंड स्थित बाबा दुधेश्वर नाथ मंदिर को फूलों से सजाते कारीगर गोह, संवाद सूत्र। गोह प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बाबा दूधेश्वरनाथ की नगरी देवकुंड में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
शनिवार को मंदिर की सजावट कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा था। स्थानीय मठाधीश कन्हैयानंद पूरी के नेतृत्व में व्यापक तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में सुविधा हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी देवकुंड थाना पुलिस को सौंपी गई है। पुलिस मंदिर परिसर सहित प्रमुख स्थलों पर तैनात रहेगी। प्रत्येक वर्ष औरंगाबाद, अरवल, गया, जहानाबाद सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस वर्ष 50 हजार से अधिक लोगों के आने का अनुमान है। महाशिवरात्रि की रात बल्बों की रोशनी से सजा मंदिर आकर्षण का केंद्र रहता है। रात्रि में कलाकारों द्वारा शिव-पार्वती विवाह का मंचन किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है। बारात में भूत-प्रेत के रूप में श्रद्धालु शामिल होते हैं और महिलाएं मंगलगीत गाती हैं। औरंगाबाद जिले की सीमा पर स्थित देवकुंड की ख्याति बिहार के साथ अन्य राज्यों में भी है। मठाधीश ने बताया कि आयोजन में समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिलता है। स्थानीय युवक, व्यवसायी और प्रबुद्धजन व्यवस्था और सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जिससे महाआयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होता है। सुबह 3:30 बजे खुलेगा गर्भगृह महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर आम श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सुबह 3:30 बजे बाबा दूधेश्वर नाथ मंदिर के गर्भगृह का फाटक खोल दिया जाएगा। इससे पूर्व मठाधीश वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रुद्राभिषेक करेंगे। रुद्राभिषेक के उपरांत गर्भगृह का द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। शाम करीब आठ बजे मंदिर का फाटक बंद कर दिया जाएगा। इस पर्व पर महिला श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। मंदिर के बगल स्थित पवित्र कुंड में स्नान कर श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। देवकुंड में स्वयं प्रज्ज्वलित अग्निकुंड है आस्था का केंद्र देवकुंड का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व सदियों से हुआ है। यहां स्थित मठ का स्वयं प्रज्ज्वलित अग्निकुंड श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। दंतश्रुतियों के अनुसार यह अग्निकुंड सदियों से निरंतर प्रज्ज्वलित होता आ रहा है। परिसर में महान तपस्वी च्यवन ऋषि का आश्रम भी स्थित है, जिससे इस स्थल की पौराणिक महत्ता और बढ़ जाती है। मठाधीश ने बताया कि देवकुंड में स्थापित शिवलिंग बेशकीमती नीलम पत्थर का बना है। उनका कहना है कि ऐसा शिवलिंग देश के किसी अन्य मंदिर में नहीं है। शिव की महिमा और स्थल की विशेषताओं के कारण यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। बाबा दूधेश्वरनाथ के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। देवकुंड महोत्सव कल से बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से महाशिवरात्रि के अवसर पर पिछले दो वर्षों से देवकुंड महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2024 में महाशिवरात्रि पर्व के दिन एक दिवसीय महोत्सव आयोजित किया गया था। वर्ष 2025 में महाशिवरात्रि पर्व के बाद दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इस वर्ष भी 16 और 17 फरवरी को दो दिवसीय देवकुंड महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। महोत्सव का आयोजन महाशिवरात्रि पर्व के उत्सव के अवसर पर ही किया जाता है। कार्यक्रम में कई चर्चित कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
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